पिछले कुछ वर्षों में हमने कई तेज गेंदबाजों को भारतीय टीम में आते जाते देखा है .इनमे से कईयों ने अपने राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह बरकरार रख प्रसिधी  बटोरी जबकि कुछ खिलाडी थोड़े समय के लिए ही सुर्ख़ियों में बने और फिर गुमनाम हो गए. पेश है ऐसे ही दस तेज़ गेंदबाज जो भारतीय दस्ते में जगह बनाने में तो कामयाब रहे लेकिन उसे लम्बे समय तक बरकरार नहीं रख पाये.

1) टीनू योहनन

टीनू योहनन राष्ट्रीय टीम के लिए खेलने के लिए केरल का सबसे पहला खिलाडी था.इस खिलाडी ने दिसंबर में मोहाली में इंग्लैंड के खिलाफ एक आशाजनक टेस्ट कैरियर की शुरुआत की थी. इन्होने  पहले ओवर की चौथी गेंद में ही अपना पहला टेस्ट विकेट लिया था. एक शानदार शुरुआत के बावजूद योहनन अपने फार्म में गिरावट की वजह से अपना करियर राष्ट्रीय टीम के साथ जारी नहीं कर पाये. उन्होंने भारत के लिए तीन टेस्ट मैच और तीन एकदिवसीय मैच ही खेल पाये है.

2) अमित भंडारी


अमित भंडारी के प्रभावशाली घरेलू सत्र में प्रदर्शन ने उन्हें राष्ट्रीय टीम में जगह दिलवाई . वहीँ उन्होंने एशिया कप 2003 के दौरान ढाका में पाकिस्तान के खिलाफ भारत के लिए वनडे कैरियर की शुरुआत की थी. लेकिन कई विशेषज्ञों का मानना ​था कि वह अंतराष्ट्रीय कैरियर की शुरुआत के लिए निश्चित रूप से तैयार नहीं थे . इस गेंदबाज का करियर भी डमाडोल रहा.

3) राणादेब बोस


चयनकर्ताओं द्वारा वह लंबे समय से नजरअंदाज किये गए और 2005 में बांग्लादेश दौरे से बाहर रखे गए. 2006-2007 में घरेलू सत्र में जहां उन्होंने 57 विकेट लिए इसके बाद उन्हें 2006 में इंग्लैंड दौरे के लिए बुलाया गया लेकिन एक अभ्यास मैच को छोड़कर वहाँ चार टेस्ट मैचों में से किसी में भी खेलने को नहीं मिला. इसके बाद वह किसी भी प्रारूप में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए नहीं आये. बोस अतिक्रमण के बिना प्रथम श्रेणी और क्लब मैचों में 10,708 गेंदों की गेंदबाजी का विश्व रिकॉर्ड रखते हैं.

4) अविष्कार साल्वी

ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज ग्लेन मैकग्रा के समान गेंदबाजी शैली के साथ साल्वी सुर्ख़ियों में आये . मुंबई टीम में एक आरक्षित गेंदबाज से वह वह भारत ‘ए’ के लिए खेलने लगे फिर उसके बाद बांग्लादेश के खिलाफ भारत के लिए अपने वनडे करियर की शुरुआत की. चोट की चपेट में आने से पहले वह केवल 4 वनडे खेल पाये थे.

5) वीआरवी सिंह (विक्रम राजवीर सिंह)

विक्रम राज वीर सिंह भारत के वास्तविक तेज गेंदबाजों में से एक माने जाते है. 2005-2006 में एक प्रभावशाली घरेलू सत्र के बाद उन्हें 2005 के अंत में श्रीलंका के खिलाफ घरेलू सीरीज के लिए बुलाया गया था .लेकिन दुर्भाग्य से वह एक फिटनेस टेस्ट क्लियर करने में विफल रहे और तुरंत टीम से हटा दिये गये .राष्ट्रीय टीम में इस गेंदबाज ने दोबारा वापसी भी की लेकिन 5 वनडे और 2 टेस्ट मैचों में वह गेंदबाजी से कुछ प्रभावशाली नहीं कर सके.

6) मनप्रीत सिंह गोनी

दाएं हाथ के तेज गेंदबाज मनप्रीत गोनी 2008 में इंडियन प्रीमियर लीग में चेन्नई के प्रमुख विकेट लेने वाले गेंदबाज थे. इस मजबूत प्रदर्शन के माध्यम से वह भारतीय वनडे टीम का हिस्सा बने. उसके बाद उन्होंने  वर्ष 2007-08 में पंजाब के लिए अपने प्रथम श्रेणी कैरियर की शुरुआत की . दूसरे आईपीएल के दौरान वह अपनी फार्म के अनुसार  अच्छा नहीं कर सके और उनका स्तर लगातार गिरता नज़र आया. 2009-10 रणजी सत्र में 31 विकेट लेकर वे अपनी फार्म में वापस तो आये लेकिन भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए ये काफी नहीं था.

7) सुदीप त्यागी

सुदीप त्यागी ने भारतीय घरेलू स्तर पर अपने पहले मैच में एक पारी में दस विकेट लेने का कारनामा किया और 41 विकेट के साथ उच्चतम रणजी सत्र समाप्त किया. इसके बाद उन्हें आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स की टीम में शामिल होने का मौका मिला लेकिन यह उनके लिए काफी दुर्भाग्यपूर्ण रहा और चोट की वजह से उन्हें बाहर होना पड़ा. चैलेंजर ट्रॉफी के फाइनल में जादू चलाने के बाद उसे 2009 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एकदिवसीय मैचों के लिए बुलावा आया. लेकिन प्रदर्शन में गिरावट के बाद वह CSK और राष्ट्रीय टीम दोनों से अपनी जगह खो बैठे.

8) शिव शंकर पॉल

शंकर पॉल पहले रणजी ट्राफी में बंगाल के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन के साथ सबकी नज़रों में आये. चयनकर्ताओं ने जब अगस्त 2004 में उन्हें पूर्वी अफ्रीका के दौरे पर एक मौका दिया तब इन्होने अपने कौशल से सबको प्रभावित किया. इसके बाद 2004-05 में मुंबई में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चौथे टेस्ट के लिए भारतीय टेस्ट टीम में खेलने का मौका मिला, एक भारतीय ए टीम में तो नियमित रूप से है, लेकिन उन्हें कभी नीली टोपी पहनने का मौका नहीं मिला .

9) पंकज सिंह


राजस्थान के  इस दाएं हाथ के मध्यम तेज गेंदबाज ने अंडर 19 स्तर से भारत ए के लिए प्रगति की . 2006 तक गेंदबाज़ी में सुधार के साथ वह 21 विकेट के साथ रणजी प्लेट लीग के फाइनल के लिए राजस्थान टीम को फाइनल तक लेकर गए. 2007 में वह जिम्बाब्वे और केन्या दौरे पर भारत ‘ए’ के जुड़वां दौरे का हिस्सा थे. इस दौरान उन्होंने  कुल 18 विकेट झटके . श्रीसंत और मुनाफ पटेल के घायल होने के बाद इन्हे ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए भारतीय टेस्ट टीम के लिए चुना  गया. वहीँ यह 2009 और 2014 के बीच रणजी ट्राफी में शीर्ष विकेट लेने वाला खिलाडी था. लेकिन भारतीय दस्ते में पूर्ण कामयाबी हासिल करने में सफल नहीं रहा.

10) अभिमन्यु मिथुन


2009-10 में एक सफल शुरुवात के साथ रणजी ट्रॉफी खेलने के बाद वह भारतीय टीम में अपनी पक्की जगह नहीं बना सके. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अहमदाबाद में वनडे की शुरुवात की और पांच महीने बाद श्रीलंका के दौरे पर टेस्ट मैचों में शुरुवात की. तब से वह अक्सर घायल खिलाड़ियों के लिए प्रतिस्थापन के रूप में राष्ट्रीय टीम में चुने जाते है.

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