ऐसे कईं क्रिकेटर्स हैं जिन्होंने इस खेल में अपनी पहचान बनाई लेकिन उनमे से कुछ ही ऐसे हैं जिन्होंने क्रिकेट कि दुनिया में अपनी छाप छोड़ी ओर लोगों पर उनका काफी प्रभाव पड़ा |

चलिए एक नज़र डालते हैं भारत के उन शीर्ष 5 क्रिकेटर्स पर जो क्रिकेट के खेल को एक अलग और ऊँचे स्तर पर लेकर गए |

 

1 . सचिन तेंदुलकर :

” क्रिकेट का देवता ” कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट के सभी रूपों को परिभाषित किया | उनकी खासियत ये थी कि वह स्थिति को जल्द ही भांप लेते हैं और उसके अनुसार उसमे ढल भी जाते है| तेंदुलकर के बारे में सबसे अच्छी चीज़ों में से एक ये भी है कि वह हमेशा विपक्ष के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ों से अधिक स्कोर करने कि कोशिश करते हैं और अगर ऐसा कर लिया तो मतलब आधा काम हो गया | बल्लेबाज़ी के अलावा टीम में उनकी उपस्थिति हमेशा से अन्य खिलाडियों के लिए फायदेमंद रही है |

 

2009 में न्यूज़ीलैंड में जब भारत दोनों टी-20 मैच हार गया था तब धोनी ने कहा था कि जब सचिन ODI के लिए वापिस आये तो उन्होंने टीम का सारा माहौलही सकारात्मक कर दिया और खिलाडी भी आत्मविश्वास महसूस करने लगे | यही कारन रहा होगा कि टेस्ट और ODI में भारत न्यूज़ीलैंड को हरा सका|

 

2 . कपिल देव :

इसमें कोई शक नहीं कि कपिल देव भारत के बेहतरीन हरफनमौला खिलाडी रहे| अक्सर ‘ haryana hurricane’ के नाम से जाने जाने वाले कपिल देव अपनी घातक गेंदबाज़ी से विरोधी बल्लेबाज़ों के पसीने छुड़ा दिया करते थे | बल्लेबाज़ी में भी उनका जवाब नहीं था | चपलता और दृढ़ता उनकी खासियत थी| दूसरी बात ये थी कि कपिल उस देश के खिलाडी थे जहाँ शायद ही कभी फिट तेज़ गेंदबाजों का उत्पादन हुआ हो| इसीलिए कपिल ने अपनी अलग पहचान बनाई| वह नेट में 50 -६० ओवरों तक बोलिंग कर सकते थे और हमेशा फिट भी रहे|

 

3 . सौरव गांगुली :

2000 में मैच फिक्सिंग के घोटालों के बाद जब गांगुली ने कप्तानी संभाली तो वे एक कठिन, ज्ञान युक्त व् समझदार लीडर साबित हुए| उनके नेतृत्व में भारत ने विदेश में टेस्ट मैच जीतने शुरू कर दिए थे |उनमे प्रतिभा खोजने की क्षमता बहुत विशाल थी |एक छोटे राज्य पंजाब से उन्होंने दो सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटरों को पाया, वे थे युवराज सिंह और हरभजन सिंह| सौरव ने टीम को मज़बूती दी और वर्ल्ड कप 2003 के फाइनल तक लेकर गए |

 

4 . महेंद्र सिंह धोनी :

क्रिकेट में जब मैच कठिन हो जाता तब क्रीज़ पर मौजूद खिलाडी मैच को जल्द ख़त्म करने की कोशिश करते हैं क्यूंकि उसे लास्ट ओवर्स तक लेजाने में ज़्यादा दबाव पड़ता है | लेकिन धोनी के साथ ऐसा नहीं है | उनमे कुशलता है की वो मैच को अंतिम ओवरों तक लेजाते हैं फिर भले ही अंतिम ओवर में 10 – 15 ही क्यों न बनाने हो|

सबसे अच्छा उदहारण 2013 में वेस्ट इंडीज का है जहा भारत श्रीलंका और वेस्ट इंडीज के साथ Tri Series के लिए गया था | लास्ट ओवर में भारत को 15 रनों की जरुरत थी , धोनी ने 2 छक्के और एक चौका लगाकर मैच जिताया |

धोनी टीम की सिर्फ कप्तानी ही नहीं करते बल्कि टीम को जीतना भी सिखाते हैं |

 

5 . वीरेंद्र सेहवाग :

परम्परागत रूप से एक टेस्ट मैच ओपनर्स से ये उम्मीद होती है कि वह पहले सामने आरही गेंद को देखे और फिर उस हिसाब से बल्ला चलाये , लेकिन सेहवाग के आने से इसकी परिभाषा ही बदल गयी | सेहवाग पहले से ही काफी हद तक नई गेंद के लिए तैयार रहते थे| इसका एक उदहारण 2008 में भारत बनाम इंग्लैंड मैच में देखने को मिला | सेहवाग ने कुशलता से खेलते हुए भारत को जीत दिलवाई | अब और भी खिलाडी डेविड वार्नर और तमीम इक़बाल ,सेहवाग के नक्शेकदम पर चल रहे हैं| जो कि टेस्ट मैचों को और भी दिलचस्प बनाता है |

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