पहला एशेज टेस्ट उम्मीदों के बहुमत के बिलकुल विपरीत था . लोग को उम्मीद थी कि ऑस्ट्रेलिया वेस्टइंडीज के खिलाफ शानदार जीत के बाद यहाँ भी अपनी जीत बरकरार रखेगा. लेकिन जीत का ताज इंग्लैंड ने हासिल किया. ख़ैर, इस आर्टिकल में हम डालेंगे पहले एशेज टेस्ट देखने के बाद समझ में आई इन 5 बातो की ओर….

1 . ऑस्ट्रेलिया सिर्फ अपनी सर ज़मीं पर ही है शेर
हाल के वर्षों में ऑस्ट्रेलिया ने विदेशी धरती पर काफी संघर्ष किया है, यह सच है कि घर से दूर ऑस्ट्रेलिया ने वेस्टइंडीज और दक्षिण अफ्रीका को हराया है लेकिन वह इस मामले में पूरी तरह सक्षम नहीं दिखा है. दक्षिण अफ्रीका के साथ ही ऑस्ट्रेलिया में भी कूकाबुरा गेंद का प्रयोग किया जाता है. दक्षिण अफ्रीका में खेलते हुए ऑस्ट्रेलिया के लिए फर्क सिर्फ इतना रहा कि उन्हें भीड़ का समर्थन मिला. विदेशी परिस्थितियों में टेस्ट मैच जीतने में ऑस्ट्रेलिया ने सही मायने में संघर्ष किया है. वे संयुक्त अरब अमीरात और भारत में बुरी तरह से हारे थे. वहीँ इंग्लैंड में भी उनका रिकॉर्ड काफी निराशाजनक रहा है. ऑस्ट्रेलिया ने जेम्स एंडरसन के अपने कैरियर की शुरुआत के बाद से इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज नहीं जीता है.

2. इंग्लैंड में उच्च स्तरीय बल्लेबाज भी हो सकते है फ्लॉप
सीरीज शुरू होने से पहले, इंग्लैंड के स्टुअर्ट ब्रॉड ने कहा था कि स्टीवन स्मिथ की नंबर 3 पर बल्लेबाज़ी विरोधी इंग्लैंड के लिए वरदान होगा स्मिथ आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में नंबर एक बल्लेबाज रहे हैं लेकिन कार्डिफ में उन्हें एहसास हुआ कि रैंकिंग मायने नहीं रखती. इंग्लैंड की टर्न लेती गेंद के खिलाफ स्मिथ असहज लग रहे थे.

3. वॉटसन का शायद ऑस्ट्रेलिया के लिए ये आखिरी टेस्ट है
वाटसन बल्लेबाजी करते हुए काफी नर्वस लग रहे थे. वे एंडरसन और ब्रॉड जैसे खिलाडियों का सामना करने के लिए पूरी तरह से सक्षम नहीं लग रहे थे. तकनीकी तौर पर, वाटसन टेस्ट मैचों में बल्ले के साथ सर्वश्रेसठ प्रदर्शन करने में नाकाम है. इस टेस्ट की दोनों पारियों मे वॉटसन एलबीडब्ल्यू आउट हुए.

4 . आलराउंडर खिलाडियों का योगदान काफी मायने रखता है
एक ऑल राउंडर का योगदान खेल के परिणाम में अत्यधिक प्रभावशाली होता है. अगर टीम के एक भी ऑल राउंडर खिलाडी का खेल में बेहतरीन प्रदर्शन रहा तो टीम के जीतने की सम्भावना बढ़ जाती है. लेकिन इंग्लैंड के अपने शस्त्रागार में दो ऑलराउंडर थे और दोनों ने महान खेला था. स्टोक्स और अली ने ये साबित कर दिया कि ऑलराउंडर की मौजूदगी सफलता प्राप्त करने के लिए बहुत जरूरी है .स्टोक्स और अली दोनों ने पहली पारी में तेजी से अर्धशतक बनाया. वहीँ गेंदबाज़ी में भी इनका बढ़िया प्रदर्शन रहा.

5. “आक्रामकता” रही इंग्लैंड की प्लस पॉइंट
मौजूदा इंग्लैंड की टीम पूर्व कोच  पीटर मूर्स की कोचिंग के तहत काफी कमजोर  थी. लेकिन, मूर्स को कोच पद से हटाने के हटाने के बाद तो कमाल ही हो गया. अब इंग्लैंड अपने खेल में कहीं अधिक प्रामाणिक व् स्पष्ट मानसिकता के साथ नज़र आते हैं. कुक, अपने कप्तानी करियर में शायद पहली बार ही आक्रामक दिखे है और यही उनके खिलाडियों को भी प्रेरित करता है.

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