आमतौर पर 25 और 30 की उम्र के बीच एक क्रिकेटर अपने करियर के बढ़िया फॉर्म में कहा जा सकता है, उसके बाद खिलाडी को तकरीबन संघर्ष करते देखा जाता है. और फिर 40 के आसपास की उम्र में खेल से सेवानिवृत्ति ले लेता है. लेकिन कई ऐसे भाग्यशाली खिलाडी रहे हैं जिन्होंने 40 साल की उम्र पार करने के बाद भी क्रिकेट खेलने का लुत्फ़ उठाया है.

आइये देखते हैं ऐसे ही कुछ महान खिलाडी जिन्होंने 40 + की उम्र में भी क्रिकेट में अपना जलवा दिखाया –

# 1 सनथ जयसूर्या

अंतिम मैच- 42 साल की उम्र में.
श्रीलंका के दिग्गज खिलाडी सनथ जयसूर्या ने 20 साल की उम्र में 1989 में अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की थी. यह युवा खिलाडी एक शानदार खिलाडी के रूप में उभरे. 28 जनवरी 2009 को भारत के खिलाफ अपने 107 के साथ, 39 साल और 212 दिन की उम्र में सनत एक वनडे शतक बनाने वाले सबसे अधिक उम्र के खिलाड़ी बन गए. इसके बाद 2015 के विश्व कप में संयुक्त अरब अमीरात के बल्लेबाज खुर्रम खान ने यह रिकॉर्ड पार कर लिया. जयसूर्या ने 40 की उम्र के बाद दो साल के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलना जारी रखा.

# 2 सर जैक हॉब्स

अंतिम उपस्थिति – 52 साल की उम्र में.
20 वीं सदी के सबसे बड़े बल्लेबाजों में से एक सर जैक हॉब्स ने 26 साल की उम्र में 1908 में इंग्लैंड के लिए अपनी शुरुवात की थी. जैक क्रिकेट के इतिहास के सबसे उर्वर बल्लेबाजों में से एक बने हुए है. लेकिन वह अपने 61,237 प्रथम श्रेणी रन और 197 शतकों से और भी कही ज्यादा बना सकते थे अगर पहला विश्व युद्ध उनके खेल को बाधित न करता. इसके बाद इन्होने अपनी ख़राब सेहत से काफी संघर्ष किया. लेकिन फिर 42 साल की उम्र तक पहुंचने के बाद वे एक नै फॉर्म में आये और 6 साल के लिए इंग्लैंड के लिए खेले. 46 वर्ष 82 दिन की उम्र में 1929 में एमसीजी पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इंग्लैंड के लिए 142 के साथ – हाब्स टेस्ट शतक लगाने वाले सबसे अधिक उम्र के खिलाडी है. जैक केवल चार लोगों में से एक है जिन्होंने 40 की उम्र के बाद एक टेस्ट में दोहरे शतक लगाये हैं. अपनी 43 और 46 की उम्र के बीच इस सलामी बल्लेबाज ने 11,000 रन के आसपास रन बनाए हैं. 1935 में 52 वर्ष की उम्र में सर जैक हॉब्स ने क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की थी.

# 3 शिवनारायण चंद्रपाल

अंतरराष्ट्रीय चयन के लिए अभी भी उपलब्ध.
शिवनारायण चंद्रपाल ने 1994 में 19 वर्ष की उम्र में अपनी शुरुवात की थी. शुरुवाती संघर्ष के बाद वह वेस्टइंडीज टीम की बल्लेबाज़ी लाइन अप के एक बढ़िया खिलाडी साबित हुए. वह सर्वाधिक टेस्ट रन बनाने वाले सभी समय के 7 वें खिलाड़ी और अपने देश से दूसरे नंबर के खिलाडी बने.

# 4 सी.के नायडू

अंतिम उपस्थिति – 62 साल की उम्र में.
1932 में सी.के नायडू भारत के पहले टेस्ट कप्तान थे. दिसंबर 1926 में एक मजबूत एमसीसी टीम के खिलाफ हिन्दूस के लिए नायडू ने 116 मिनट की पारी में 153 रन बनाये जिसमे 11 छक्के और 13 चौके शामिल थे. एक साहसी बल्लेबाज , एक चतुर मध्यम तेज गेंदबाज और एक तेज क्षेत्ररक्षक सी.के नायडू ने 1936 में 41 साल की उम्र में भारत के लिए अपना आखिरी टेस्ट खेला. लेकिन 62 वर्ष की उम्र में 1957 में इन्होने दोबारा क्रिकेट में कदम रखकर सबको चकित कर दिया. 62 साल की उम्र में 52 के स्कोर के साथ इन्होने उत्तर प्रदेश के लिए अपनी आखिरी पारी खेली. नायडू , 69 साल की उम्र में 1963-64 में एक चैरिटी मैच में खेलने के लिए फिर लौटे जिसमे वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकादश के खिलाफ महाराष्ट्र के राज्यपाल एकादश के लिए खेले थे.

# 5 मिस्बाह -उल -हक

मिस्बाह -उल -हक 33 साल की उम्र में 2007 टी 20 विश्व कप में प्रमुखता से पाकिस्तान के स्टार के रूप में उभरे. अक्टूबर 2014 में मिस्बाह 40 की उम्र के बाद शतक बनाने वाले वर्तमान युग से केवल एक दो बल्लेबाजों में से एक बन गए. ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के खिलाफ इन्होने 69 *, 101, 101 * 102 * स्कोर किया. इस साल जुलाई में मिस्बाह ने श्रीलंका के खिलाफ तय टेस्ट में एक अमूल्य 59 * रन बनाए. जहां उन्होंने यूनुस खान के साथ मिलकर 3 मैचों की श्रृंखला के अंतिम दिन श्रीलंका में श्रृंखला जीतने के लिए अपनी टीम पाकिस्तान के लिए बेहतरीन योगदान दिया.

 

# 6 डब्लू.जी ग्रेस ( सब पुराने टेस्ट कप्तान )

अंतिम मैच – 60 वर्ष की उम्र में.
ग्रेस, टेस्ट क्रिकेट के प्रारंभिक दिनों में इंग्लैंड टीम के प्रमुख सदस्यों में से एक थे जिन्होंने 32 साल की उम्र में 1880 में अपने कैरियर की शुरुआत की थी. हालाँकि इन्होने खेल में सफलता 47 वर्ष की उम्र में हासिल की थी. 1895 के सीजन में इन्होने 2346 रन बनाए और अपना 100 वां शतक पूरा किया था. इन्होने अपने करियर के बाद के वर्षो में कभी कभी गेंदबाज़ी की और मैदान में सुस्त फील्डिंग के कारण इंग्लैंड को चोट पहुंचने लगी. और फिर 51 की उम्र में, जोकि उस वक़्त इंग्लैंड के कप्तान थे, इन्होने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ श्रृंखला के मध्य में ही संन्यास का फैसला लिया. लेकिन ग्रेस ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलना जारी रखा, 60 साल की उम्र में इन्होने अपना अंतिम प्रथम श्रेणी मैच खेला. सेवानिवृत्ति के बाद भी कई वर्षों के लिए इन्होने माइनर क्रिकेट खेलना जारी रखा और 66 की उम्र के बाद 1914 में एल्थम क्रिकेट क्लब के लिए एक उस्तादाना 69 * रन बनाए .

# 7 एलेक स्टीवर्ट

अंतिम मैच- 40 साल की उम्र में.
इंग्लैंड के खिलाडी स्टीवर्ट को 1989 में 26 वर्ष की आयु में अपने कैरियर की शुरुआत के बाद से कप्तानी के लिए तैयार किया गया था. लेकिन माइकल आथर्टन के 1998 में सेवानिवृत्त होने के बाद ही इन्हे कप्तानी सौंपी गयी. 35 साल की उम्र होने के बावजूद भी फिटनेस के मामले में स्टीवर्ट बढ़िया थे. स्टीवर्ट वर्तमान युग के सबसे ज्यादा टिकाऊ क्रिकेटरों में से एक हैं जोकि 40 साल की उम्र तक अपनी टीम के लिए खेले.

# 8 विल्फ्रेड रोड्स ( सब पुराने टेस्ट क्रिकेटर)

अंतिम मैच- 52 साल की उम्र में.
रोड्स, 1899 और 1930 के बीच के वर्षों में इंग्लैंड के लिए एक चतुर धीमी गति से बाएं हाथ के गेंदबाज थे. रोड्स ने 21 साल की उम्र में खेल में अपनी शुरुआत की और 44 साल की उम्र को पार करने तक वह टीम के लिए बढ़िया खेले. 1926 एशेज में चार ड्रॉ के बाद चयन समिति के सदस्य ने सह- सदस्य रोड्स से अंतरराष्ट्रीय वापसी करने के लिए पूछा तब रोड्स 49 वर्ष के थे. एक बेहतरीन खिलाडी ने अपना बढ़िया प्रदर्शन कर अपने चयन को सार्थक किया. 1930 में कैरेबियन के एक दौरे के बाद अपनी उम्र के 53 वें वर्ष में इन्होने खेल से रिटायर होने की अपनी इच्छा ज़ाहिर की. इस दौरे के बाद से वह आज तक के सबसे पुराने टेस्ट विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं.

# 9 पल्वांकर बालू

अंतिम मैच- 44 साल की उम्र में.
बाएं हाथ के स्पिनर बालू भारत के प्रमुख घरेलू टूर्नामेंट के स्टार थे. 1911 में भारत के इंग्लैंड के उद्घाटन दौरे पर 18.84 की औसत से 114 विकेट लेने वाले 35 साल की उम्र के खिलाडी बालू ही थे. जब 44 साल की उम्र में बालू को हिन्दू टीम से हटा दिया गया तब खिलाड़ियों और प्रशंसकों द्वारा इसका बहुत विरोध हुआ और फिर अगले ही मैच में इन्हे उप कप्तान के रूप में वापस लाया गया.

# 10 जॉन ट्राइकोस

अंतिम मैच- 45 साल की उम्र में.
जॉन टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले एक मात्र मिस्त्र देश का निवासी थे. युवा ट्राइकोस 23 साल की उम्र में 1969-70 में दक्षिण अफ्रीका टीम का हिस्सा थे. जिम्बाब्वे को स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद जॉन ट्राइकोस 1983 विश्व कप टीम का एक अभिन्न हिस्सा रहे जिसमे ऑस्ट्रेलिया पर बढ़िया जीत दर्ज की थी. 1992 में जब जिम्बाब्वे को टेस्ट का दर्जा दिया गया था तब 45 वर्षीय ट्राइकोस देश के सबसे बढ़िया ऑफ स्पिनर और दुनिया में भी सर्वश्रेष्ठ खिलाडियों में से एक थे. 22 साल बाद टेस्ट क्रिकेट में लौटने पर जॉन ने 5/86 के अपनी सर्वश्रेष्ठ टेस्ट गेंदबाजी के आंकड़ों के साथ चयनकर्ताओं के फैसले का मान रखा. जिम्बाब्वे के लिए इन्होने तीन और टेस्ट मैच खेले और 45 वर्ष और 304 दिन की उम्र में अपनी अंतिम उपस्थिति दर्ज करवाई.

# 11 गुब्बी एलेन

अंतिम मैच- 52 साल की उम्र में.
एलन एक अंग्रेजी तेज गेंदबाज थे जिन्होंने 28 साल की उम्र में 1930 में अपनी शुरुआत की थी. दूसरे विश्व युद्ध के बाद जब फिर से क्रिकेट का खेल शुरू हुआ तब एलन 43 वर्ष के थे. हालांकि 1947 में, 45 साल की उम्र में एलन कैरेबियन के दौरे पर अपनी टीम के कप्तान बने. एक मजबूत वेस्ट इंडीज टीम के खिलाफ वह श्रृंखला तो हार गए लेकिन एलन ने खुद को बतौर कप्तान बखूबी प्रदर्शित किया. 1954 में एलन ने 52 साल की उम्र में फ्री फॉरेस्टर्स के लिए अपना अंतिम प्रथम श्रेणी मैच खेला.

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