1971 में ओ डी आई की शुरुवात से लेकर अब तक इस खेल में समय के साथ साथ कुछ परिवर्तन तो आते ही रहे  हैं।  खेल के प्रारूप ,नियम व् खिलाडी ये सब बदला है लेकिन कुछ खिलाडियों ने ओ डी आई में अपनी ऐसी छाप छोड़ी है जो कि उन्हें अन्य खिलाडियों से अलग बनाता है. ओ डी आई में उनका ख़ास योगदान ही उन्हें खेल परिवर्तक बनाता है.

पेश है उन्ही 11 खिलाडियों के नाम .(सूची पायदान पर आधारित नहीं है)

सचिन तेंदुलकर , भारत
मास्टर ब्लास्टर सचिन ने ओ डी आई प्रारूप की एक पारी में रन बनाने के तौर तरीके को बदला है. सचिन पुरे मैदान पर कहीं भी गेंद हिट कर सकते थे और आसानी से एक या दो रन जुटाते थे. उन्होंने ओ डी आई प्रारूप में हुए हर बदलाव में खुद को सहज़ता से ढाला है. उनकी इसी क्षमता ने भारत में इस खेल को बदला है. तभी वे ओ डी आई के इतिहास में एक पारी में 200 रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज़ बने. उन्होंने इस कथन को सच साबित किया कि परिवर्तन ही केवल एक ऐसी चीज़ है जो जीवन में निरंतर है.

सनाथ जयसूर्या , श्रीलंका
इस बल्लेबाज़ ने ओ डी आई में उद्घाटन बल्लेबाज़ी की कला को एक नयी परिभाषा दी. जयसूर्या ने अपने कौशल से ओ डी आई के प्रारूप में बल्लेबाज़ी को नै दिशा दी. इस दिग्गज खिलाडी ने जबरदस्त प्रदर्शन से ओ डी आई में 300 रन बनाये थे. 1996 विश्व कप के दौरान जयसूर्या ने बड़ी उपलब्धि हासिल की.

एडम गिलक्रिस्ट , ऑस्ट्रेलिया
पहले दौर में विकेट कीपर की इसी एक जिम्मेवारी के साथ साथ 8 वे या 9 वे नंबर पर बल्लेबाज़ी कर निचले क्रम के बल्लेबाजों को मजबूती देना होता था, लेकिन एडम ने इस प्रक्रिया व् सोच को बदला. जिस तरह से उन्होंने बढ़िया बल्लेबाज़ी की उससे उन्होंने साबित किया कि विकेट कीपर का काम सिर्फ यही तक सीमित नहीं है वह बल्लेबाज़ी में भी धमाल कर सकता है.

सर विव रिचर्ड्स, वेस्ट इंडीज
ओ डी आई के प्रारूप में जल्द से जल्द रन बनाने की एहमियत व् इसका सिलसिला शुरू किया सर रिचर्ड्स ने . उस समय के बल्लेबाज़ी के तौर तरीकों से वे कहीं ज्यादा आगे थे. और बिना हेलमेट पहने गेंद को बेख़ौफ़ खुलकर हिट करते थे. इस दिग्गज खिलाडी के नाम 1984 में इंग्लैंड के खिलाफ हुए मैच के दौरान 189 * रन का रिकॉर्ड है जो कि 1997 तक कायम रहा. बढ़िया बल्लेबाज़ के साथ साथ वह एक अच्छे कप्तान व् फील्डर भी थे.

विराट कोहली , भारत
आज के युग का खिलाडी विराट कोहली बल्लेबाज़ी में कमाल कर दिखता है. अपने करियर की 2008 में शुरुवात से विराट ने जिस तेज़ी से जितने रन बनाये हैं वे इस खिलाडी को साचिन और रिचर्ड्स जैसे दिग्गजों की पंक्ति में खड़े करते हैं. विराट ने ऐसा अपने आक्रामक रवैये के चलते किया जो कि भारतीय बल्लेबाज़ी में पहले नहीं था.

रिक्की पोंटिंग , ऑस्ट्रेलिया
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान पोंटिंग ने ओ डी आई में कप्तानी के ढांचे को नया रूप दिया. ओ डी आई के इतिहास में पोंटिंग एक बढ़िया कप्तान माने जाते  हैं . पोंटिंग की कप्तानी में टीम ने दो विश्व कप जीते. और तो और इस कप्तान व् टीम के नाम कई रिकॉर्ड दर्ज हैं. जो दर्शाते हैं कि आक्रामकता से भरी एक दृष्टिकोण के साथ टीम महान बन सकती है और पोंटिंग ने यही दुनिया को साबित किया.

महेंदर सिंह धोनी , भारत
सबसे नवीन कप्तानों में से एक और खेल में आज सबसे बड़ा फिनिशर माने जाने वाले खिलाडी हैं धोनी. दूसरी इनिंग में धोनी की पारी खेल ख़त्म होने के अंतिम ओवर में थी और धोनी ने छक्का जुड़कर जीत का आगाज़ किया. धोनी की कप्तानी कई बार जोखिम भरी लगती है लेकिन प्रभावशाली भी तभी 2011 में भारत विश्व कप जीत पाया था.

शेन वार्न , ऑस्ट्रेलिया
सीमित ओवरों के प्रारूप में लेग स्पिन के लुप्त होने के बाद शेन वार्न इसे खेल में फिर से वापिस लाये. टीम में लेग स्पिन को रखने से ज्यादा फायदा ने होने के चलते यह खेल से गायब हो गया था लेकिन वार्न ने अपने कौशल से सबको दिखा दिया कि स्पिनर भी ओ डी आई में कामयाब साबित हो सकता है . लेग स्पिनर विकेट लेने में सफल हो सकता है .वार्न की बड़ी उपलब्धि रही 1999 के विश्व कप के सेमीफइनल व् फाइनल में जहाँ इन्होने दोनों मैचों में चार चार विकेट लेकर मैन ऑफ़ द मैच अवार्ड हासिल किया.

वसीम अकरम , पाकिस्तान
वसीम अकरम ने ओ डी आई क्रिकेट के डेथ ओवरों में तेज़ गेंदबाजों की प्रक्रिया में परिवर्तन किया. वसीम में इतनी क्षमता है कि वह गेंद को कई तरीकों से स्विंग कर फैंक सकता है, चाहे नै गेंद हो,बाउंसर या फिर यॉर्कर. ओ डी आई में 500 विकेट और 2 हॅट्ट्रिक लेने वाले वसीम पहले गेंदबाज थे.

शोएब अख्तर, पाकिस्तान
शोएब अपनी तेज़ रफ़्तार गेंदबाज़ी के लिए जाने जाते हैंजो कि किसी भी बल्लेबाज़ के मन में डर पैदा कर देता था. वह 100 एम पी एच की गति से यॉर्कर डालते थे. 1999 विश्व कप के दौरान अख्तर ने न्यूज़ीलैंड की टीम के ३ महत्वपूर्ण विकेट लेकर ध्वस्त किया था .अपनी तीव्र गति के कारन शोएब ने दर्शकों के दिल में जगह बनाई जो की इंतज़ार करते की कब शोएब विरोधी बल्लेबाज़ों की विकेट गिराये.

लसिथ मलिंगा , श्रीलंका
एक मात्र गेंदबाज जिसने की ओ डी आई में चार गेंदों पर चार विकेट लिए और 3 हॅट्ट्रिक ली. मलिंगा एक विकेट लेने वाले गेंदबाज के तौर पर ही जाने जाते थे. मलिंगा मैदान में मुस्कराहट के साथ ही अपना प्रदर्शन करते हैं फिर चाहे उनकी गेंद पर चौक ही क्यों न  लग जाये.

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