डीडीसीए ने किया छवि को सुधारना शुरू, कोच की नियुक्ति के लिए विवेक राजदान की अगुवाई में बना पैनल - Sportzwiki
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डीडीसीए ने किया छवि को सुधारना शुरू, कोच की नियुक्ति के लिए विवेक राजदान की अगुवाई में बना पैनल

  • डीडीसीए जिला क्रिकेट एसोसिएशन ने सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति मुकुल मुदगल के नेतृत्व में छवि को सुधारने का काम शुरू कर दिया है। उन्हें हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त किया गया है ताकि वह क्रिकेट संस्था कि दिन प्रतिदिन की गतिविधियों पर नजर रख सकें। मामलों की देखरेख के लिए दो पैनलों का भी गठन किया गया है- एक पुरुषों और महिलाओं के लिए। इसके साथ ही यह आगे के क्रिकेट सत्र के लिए कोच, प्रबंधक और सहयोगी स्टाफ को चुनने का काम करेगा।

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    भारतीय पूर्व टेस्ट क्रिकेटर विवेक राजदान ने पैनल की अध्यक्षता की और अनुराधा दत्त ने महिलाओं के पैनल को संभाला है। डीडीसीए उपाध्यक्ष गंगे गुप्ता, कोषाध्यक्ष रविंदर मनचंदा, और संयुक्त सचिव सलिल सेठ इसमें शामिल हैं। न्यायमूर्ति मुदगल ने डीडीसीए के सभी सदस्यों को सूचित करते हुए बताया कि “चयनकर्ता सभी पैनलों के चयन जिसमे कोच, प्रबंक और कर्मचारी शामिल हैं उनका साक्षात्कार करेंगे और उनका पारिश्रमिक तय करेंगे। विभिन्न पदों के लिए के लिए किन मानदंडों को अपनाया गया है इस बात की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी और इसके साथ ही सभी जानकारी को डीडीसीए की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।”

    इन फैसलों के अलावा, कमेटी राजधानी में क्रिकेट के सुधार और छवि को लेकर कई अभियान भी चलाएगी। पहला बड़ा बदलाव जो पिछले साल असफल रहा था उसे एक बार फिर से शुरू किया जा सकता है। इसमें अंडर-14, अंडर-16, अंडर-19 और अंडर-23 और रणजी ट्रॉफी के लिए अलग-अलग तीन जूनियर सिलेक्टरों का चयन किया जाएगा। इस बात का निर्णय शनिवार को हुई मीटिंग के दौरान लिया गया।

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    इसके साथ ही इन्हें दिए जाने वाले वेतन को भी निर्धारित किया जाएगा और जिस भी महिला या पुरुष को इस जिम्मेनदारी के लिए चुना जाता है उसके पास अलग से कोई अतिरिक्त अधिकार नहीं होगा। उन्हें उनके निर्धारित वेतन के अलावा प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी जो इस बात पर निर्भर करेगी कि वो जिस आयु वर्ग का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं वह किस प्रकार का प्रदर्शन कर रहा है।

    इस संबंध में सचिव सलिल सेठ का कहना है कि “हम एक ऐसी संस्कृतति को बढ़ावा देना चाहते हैं जिसमें कोचों और चयनकर्ता अपने काम को इस तरह करें कि वह उन्हें उनकी पहली प्राथमिकता लगे। इसके अलावा ऐसे कोच जो अपनी जान लगा देंगे उनके लिए प्रोत्साहन सुनिश्चित किया जाएगा।”

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