गांगुली अपनी सेवानिवृत्ति के बाद भी प्रशंसकों के दिलों में जगह बनाये हुए हैं और अब जगमोहन डालमिया के जाने के बाद उनकी कुर्सी पर विराजने को तैयार हैं. सौरव गांगुली एक सफल क्रिकेट प्रशासक क्यों हो सकते हैं जानिए इसके कुछ कारण-

1. ज्ञान और कौशल
जैसा की सौरव गांगुली खुद एक क्रिकेटर रह चुके हैं ऐसे में उनकी विशेषज्ञता कई मायनों में बंगाल क्रिकेट टीम के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है. सौरव एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर होने के नाते सब जानते हैं कि कैसे अपने साथियों और विरोधियों के साथ डील करना है. हाल ही में, संयुक्त सचिव सौरभ गांगुली ने नई दिल्ली में बंगाल रणजी टीम के कोच के रूप में सेराज बहुतुले के नाम की घोषणा करके अपनी प्रशासनिक भूमिका निभाई जिसके कि बोर्ड के सदस्यों में से कुछ नाराज भी हुए. लेकिन सौरव गांगुली ने कहा था कि बहुतुले के नाम की बैठक में पहले से चर्चा हो चुकी थी. इसलिए चौंकने व् नाराज़गी का सवाल नहीं. इस तरह दादा ने ये संकेत दे दिया कि जो उन्हें सही लगता है वह उसे किसी भी कीमत पर करेंगे.

2. सदस्यों का बढ़िया मैनेजमेंट
जब सौरव गांगुली भारतीय टीम के कप्तान थे तब वह हर खिलाड़ी से उनके बेहतरीन प्रदर्शन को बाहर लाने में भरपूर कार्य करते थे और उसका बढ़िया तरीके से इस्तेमाल किया करते थे. इसलिए उम्मीद है कि गांगुली बोर्ड के अध्यक्ष होने के नाते अपने बोर्ड के सदस्यों के साथ भी ऐसा ही करेंगे. वह पहले से ही बोर्ड सदस्यों में से प्रत्येक को अच्छी तरह से जानते हैं और राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी साथ मिला है. तो इसलिए उन्हें अपने काम काज में मुश्किलों से निपटने में ज्यादा दिक्कत नहीं होगी.

 

3. नेतृत्व क्षमता
दादा की कप्तानी का जादू सबने देखा है. उनमे टीम की कमान सँभालने का कौशल किसी से छिपा नहीं है. अपने बलबूते पर सौरव को कैब की कल्याणी अकादमी में समस्या को सुलझाना होगा. आमतौर पर बंगाल रणजी क्रिकेटर कोलकाता से और उपनगरीय क्षेत्रों से आते हैं लेकिन जिले में कई प्रतिभा गांवों में ही दब कर रह जाती हैं. इसलिए दादा को इस मामले में भी कदम उठाना होगा.

4. विजन 2020
जब वे सीएबी प्रशासनिक मामले में शामिल हुए और कैब के संयुक्त सचिव बने तब उन्होंने बंगाल क्रिकेट को विकसित करने के लिए एक परियोजना विजन 2020 की योजना बनाई थी. लेकिन सीएबी के सुस्त रवैये की वजह से यह परियोजना ढीली होती गयी. एक बोर्ड बैठक में सभी निर्णय सर्वसम्मति से लेते हैं लेकिन कुछ लोग हैं जिनकी वजह से ये योजना सफल नहीं हो पाई थी लेकिन अब दादा को बोर्ड के अध्यक्ष होने के नाते अपनी परियोजना को सफल बनाने के लिए सब कुछ करना होगा.

5. संचार का बढ़िया तौर तरीका
सौरव गांगुली एक हाई प्रोफाइल अध्यक्ष है और उनके बोर्ड के हर सदस्य के साथ अच्छे संबंध हैं. तो अगर वह वार्षिक आम बैठक , उपसमिति की बैठक के रूप में किसी भी बैठक के लिए सभी को बुलाएँगे तो उमेश है कि हर बोर्ड सदस्य मीटिंग में भाग लेगा. अपने कप्तानी के दिनों की तरह वह जल्दी ही बैठक के बारे में सदस्यों को जानकारी देंगे और उसे सफल बनाने के लिए कार्य करेंगे. सौरव गांगुली अपने बातचीत के बढ़िया कौशल के माध्यम से ईस्ट जोन बोर्ड के अन्य सदस्यों के बीच खुद को लोकप्रिय बनाने में पीछे नहीं हैं.

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