मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली भारतीय टीम के दो दिग्गज खिलाडी रहे हैं जिन्होंने विश्वभर में अपना लोहा मनवाया है. ये एक प्रसिद्ध सलामी जोड़ी थी जिन्होंने एक साथ 20 शतक बनाये हैं (वनडे क्रिकेट में सलामी जोड़ी द्वारा सबसे ज्यादा). ये दोनों भारतीय बल्लेबाजी लाइन अप की नींव थे और विरोधियों के लिए मुसीबत.

अपनी शानदार फॉर्म खोने और सहवाग के भारतीय टीम में आगाज से पहले स्टाइलिश बाएं हाथ के बल्लेबाज गांगुली और मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर बराबर की प्रसिद्धि पा चुके थे. जब वीरेंद्र सहवाग ने टीम में प्रवेश किया, तब सचिन ने पहले से ही कप्तानी छोड़ दी थी और सौरव गांगुली को कप्तानी का कर्तव्य सौंप दिया गया था. सौरव टीम से एक प्रतिभाशाली बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग को बाहर नहीं करना चाहते थे. तो उन्होंने सचिन से नंबर तीन पर बल्लेबाजी के लिए कहा और खुद सहवाग के साथ पारी की शुरुआत करनी शुरू किया. हालाँकि सौरव ने कुछ मैचों के बाद पारी की शुरुआत नहीं की और सचिन से सहवाग के साथ पारी ओपन करने के लिए अपनी पसंदीदा पोजीशन में वापस आने के लिए कहा.

लेकिन, टेस्ट क्रिकेट एक अलग ही स्थिति थी. सचिन और सौरव दोनों ने अपने जीवन में केवल एक बार पारी की शुरुआत. सचिन नंबर 3 में कभी नहीं खेले जबकि सौरव ने 47 की औसत के साथ इस स्थिति पर 18 पारी खेली. दोनों महान बल्लेबाज़ बल्लेबाजी क्रम में 5 वीं , 6 वीं पोजीशन और कभी कभी नंबर 7 पर भी खेले. लेकिन नंबर 4 पोजीशन काफी चर्चित रही सचिन तेंदुलकर ने उस स्थिति में खेल कर विशाल ख्याति अर्जित की थी. वहीँ सौरव गांगुली ने कप्तान होने के नाते अपने स्वयं के हित के साथ समझौता करने में कभी गुर्रेज़ नहीं किया. उन्होंने हमेशा टीम के हित के हिसाब से निर्णय लिए. सचिन नंबर 5 पर अच्छी तरह से बल्लेबाजी कर रहे थे. 29 पारियों में सचिन ने 59 की औसत के साथ 5 शतक और 6 अर्द्धशतक दर्ज किये थे. मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के करियर में शायद सबसे अच्छी पोजीशन रही. लेकिन फिर क्यों उन्हें नंबर 4 पर ला दिया गया?…

ये जानने के लिए हमने सौरव के करियर पर ध्यान दिया. सचिन की तरह, सौरव भी कई बल्लेबाजी स्थिति में खेले. सचिन द्वारा नंबर 4 पर अपना स्थान पुख्ता करने से पहले सौरव गांगुली वहाँ बल्लेबाजी करते थे और इस स्थिति में उनका एक आश्चर्यजनक रिकॉर्ड है. 20 पारियों में उन्होंने 66 की औसत के साथ तीन शतक , चार अर्द्धशतक लगाकर कुल 1188 रन बनाए. तो फिर क्यों सौरव इस पोजीशन से बाहर हो गए और इसी प्रकार क्यों सचिन ने सौरव गांगुली की नंबर 4 के साथ अपनी नंबर 5 की स्थिति स्वैप की….

यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब कभी सामने नहीं आया. यकीनन भारतीय क्रिकेट के इतिहास के सबसे अच्छे कप्तान रहे सौरव गांगुली ने भारतीय पारी को मजबूती देने के लिए ऐसा कदम उठाया हो क्योंकि सचिन तकनीकी रूप से उनसे अधिक कुशल हैं. गांगुली जिन्हे की एक बेहतर वनडे बल्लेबाज के रूप में जाना जाता था वह टेस्ट क्रिकेट में भी जल्दी से ढेरो रन बनाने में कभी नहीं हिचके.

 

बल्लेबाजी पोजीशन द्वारा सचिन तेंदुलकर के टेस्ट करियर प्रदर्शन का विश्लेषण-

बल्लेबाजी पोजीशन द्वारा सौरव गांगुली के टेस्ट करियर प्रदर्शन का विश्लेषण-

बल्लेबाजी पोजीशन द्वारा राहुल द्रविड़ के टेस्ट करियर प्रदर्शन का विश्लेषण-

यहाँ हमने राहुल द्रविड़ के टेस्ट करियर को भी साँझा किया है जिससे ये पता चले कि दादा ने निचले क्रम में क्यों बल्लेबाज़ी की. अपने पूरे क्रिकेट करियर में नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने वाले राहुल ने नंबर चार पर भी अच्छा प्रदर्शन किया है. 21 पारियों में उन्होंने दो शतक और 6 अर्धशतक लगाये थे. लेकिन फिर भी सौरव और टीम प्रबंधन द्वारा उन्हें नंबर 3 पर लाया गया और सौरव ने खुद नंबर 5 पर बल्लेबाजी करने का फैसला किया. टीम में रक्षात्मक तरीके से खेलने के साथ साथ लम्बी पारी खेलने की जरुरत थी. इसलिए राहुल ने जोकि एक टेस्ट बल्लेबाज के रूप में बेहतर जाने जाते थे उन्होंने नंबर तीन पर अपनी जगह पुख्ता की.

जहाँ राहुल द्रविड़ गेंदबाजों को हताश करने में सक्षम थे वहीँ सचिन भी ऐसा करते थे लेकिन वह इसके साथ साथ स्ट्राइक रोटेट कर सकते थे. इसलिए कप्तान सौरव ने उनकी कषमताओं को देखते हुए टीम के लिए इस्तेमाल किया जिससे कि भारतीय टेस्ट टीम को सफलता भी मिली.

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