ऑस्ट्रेलिया के पूर्व खिलाड़ी डीन जोंस इस समय तमिलनाडू में आईपीएल के तर्ज पर ही खेली जा रही टी-20 क्रिकेट लीग तमिलनाडु प्रीमियर लीग के दूसरे सीजन में मौजूद हैं। डीन जोंस के साथ ही विश्व क्रिकेट के और भी कई दिग्गज खिलाड़ी तमिलनाडु प्रीमियर लीग में सपोर्टिंग स्टाफ या कमेंटेटर के तौर पर जु़ड़ा हुआ है तमिलनाडु प्रीमियर लीग के दौरान ही मौजुद डीन जोंस ने एक साक्षात्कार में अलग-अलग मुद्दों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी।

भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच वनडे सीरीज का नहीं है कोई मतलब

डीन जोंस ने विश्व क्रिकेट में दो देशों के बीच होने वाली वनडे सीरीज को अर्थहीन करार दिया है। डीन जोंस के अनुसार दो देशों के बीच वनडे सीरीज का कोई तुक नहीं बनता है। जोंस ने इसको लेकर कहा कि मुझे खुशी है कि बारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वनडे सीरीज होने जा रही है। क्योंकि एक समय ऐसा था जब लग रहा था कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया और ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटरों के बीच वेतन को लेकर चल रहे विवाद के बीच इसकी संभावना नहीं है।लेकिन मुझे लगता है कि ये पूरी तरह से अर्थहीन वनडे सीरीज है। मैं तो सिर्फ उम्मीद करता हूं कि इस सीरीज में ऐसी शानदार टक्कर देखने को मिले जिससे कि कुछ मनोरंजन हो सके।श्रीलंका के खिलाफ दुसरे टेस्ट जीतने के बाद भारतीय टीम के खिलाड़ियों को हुआ जबरदस्त फायदा, जाने कौन से खिलाड़ी पहुंचे टॉप 10 में

विकेटों के बीच दौड़ में नहीं हो रहा है कोई सुधार

इसके साथ ही डीन जोंस ने वनडे क्रिकेट में विकेटों के बीच की दौड़ को सबसे महत्वपूर्ण करार दिया। डीन जोंस ने इसको लेकर कहा कि ” विकेटों के बीच दौड़ में कोई सुधार नहीं हुआ है मैं देखता हूं कि तो मुझे बड़ा ही दिलचस्प लगता है जब नो बॉल को चैक करने के लिए जब रिप्ले दिखाई देता है उस समय आमतौर पर नॉन स्ट्राइक के बल्लेबाज को पिच की ओर देखना चाहिए लेकिन वो तो गेंदबाज की एक्शन को देखता है। वो ये भी नहीं जानता कि एक ही रेखा में किस तरह से दौड़ना है।”

विकेटों के बीच दौड़ने में माही का नहीं है कोई जवाब

वहीं डीन जोंस ने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी की विकेटों के बीच दौड़ की जबरदस्त प्रशंसा की। डीन जोंस धोनी की रनिंग द बिटविन विकेट के फैन हो गए हैं। इसको लेकर डीन जोंस ने कहा कि “वर्तमान में जिस तरह से एमएसडी(धोनी) विकेट के बीच सिंगल के लिए भागते हैं वो सबसे शानदार हैं। धोनी इनमें से एक अपवाद है जो सिर्फ तेजी से रन ही नहीं बनाते जबकि बहुत चतुराई के साथ फैसले लेते हैं। 80 के दशक में हमें महसूस होता था कि विकेटों के बीच दौड़ सबसे महत्वपूर्ण है। क्योकिं टीमें उस समय सिंगल्स और डबल्स के साथ ही स्कोर करती थी।”टेस्ट क्रिकेट में नंबर एक गेंदबाज और ऑलराउंडर बनने पर जडेजा को आई धोनी की याद, दिया सफलता का पूरा श्रेय

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