टेस्ट क्रिकेट में भारत के सबसे सफल ऑफ स्पिन गेंदबाज हरभजन सिंह ने चार साल तक टीम का हिस्सा न होने पर अपने मुश्किल समय के बारे में बात की. पिछले एक महीने में तीनों प्रारूपों के लिए वापसी करने वाले हरभजन ने कहा था कि 2011 की दूसरी छमाही में टेस्ट और वनडे दोनों में से बाहर का रास्ता दिखा देना एक बड़ा झटका था .

पिछले एक महीने के दौरान भारत के टेस्ट , वनडे और ट्वेंटी -20 टीमों के लिए हरभजन को वापस बुलाया गया था.बांग्लादेश के खिलाफ वन-ऑफ टेस्ट के लिए बुलावे के साथ वापसी का सफर शुरू हुआ. उन तीन मैचों में नौ विकेट के साथ आगे चयन में इस खिलाडी के लिए काफी आसानी हो गयी. Bcci.tv से बातचीत में 34 वर्षीय ऑफ स्पिनर ने टीम से बाहर अपने मुश्किल समय और वापसी को लेकर अनुभव साँझा किये.

हरभजन ने कहा “बहुत अद्भुत लगा.यह वो पल था जिसका मैंने मैं दो साल तक इंतजार किया था.उन दो वर्षों के दौरान एक मिनट भी ऐसा नहीं था जब मैंने ये सोचा हो कि मैं फिर से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेल सकूंगा. मुझे हमेशा से विश्वास था कि मैं फिर से भारत के लिए खेलूंगा और मैच जीतूंगा. और फिर जब बांग्लादेश टेस्ट मैच के लिए मैं मैदान पर गया ,मैं वास्तव में खुश था और राहत मिली कि मैं जहाँ पहुंचना चाहता था अंत में वहां था. और अब अपनी टीम के लिए कड़ी मेहनत करना जारी रखना जरुरी है.”

हरभजन को नवंबर, 2012 में इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज के लिए टेस्ट टीम में वापस बुलाया गया और फिर 2013 के शुरू में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दो टेस्ट मैचों के बाद छोड़ दिया गया. 2012 आईसीसी विश्व ट्वेंटी 20 के लिए वापसी में इन्होने चार विकेट लिए लेकिन सितंबर 2012 से हाल ही में जिम्बाब्वे दौरे तक चयनित नहीं किये गए. जून 2011 से हाल ही में तीन मैचों की सीरीज तक इन्हे वनडे टीम से बाहर रखा गया.

हरभजन ने कहा ” शुरू में जब मुझे हटा दिया गया था तब मैं उतना निराश नहीं हुआ था .मैंने सोचा था, कि आज नहीं तो कल सेलेक्ट हो जाऊंगा .और हर बार जब भारतीय टीम की घोषणा की जाती, तो मैं अपना नाम सूची में होने की आशा करता. और जब नाम नहीं होता तो मैं बेहद निराश होता .”

“टीम से बाहर रखे जाने के विभिन्न कारण हो सकते हैं. मेरी फार्म और फिटनेस एक कारण हो सकता है. एक और पहलू है कि जब आप के पास एक लंबे समय के लिए कुछ होता है तो आप भूल जाते हैं कि इसे खो भी सकते हैं .और फिर जब आप इसे खोते हैं तो बहुत चोट लगती है. तब एहसास होता है कि शायद थोड़ा और कठिन परिश्रम किया होता .”

अपनी फिटनेस और गेंदबाजी तकनीक पर काम करने के अलावा हरभजन को अपने कैरियर पर एक सकारात्मक दृष्टिकोण रखने से उसे उत्साहित रहने में मदद मिली है .

“मैंने खुश होने के लिए एक सचेत निर्णय लिया कि कुछ भी हो खुश रहना है, क्योंकि मुझे एहसास हुआ कि क्रिकेट से आगे भी और जीवन है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों के रूप में हम हमारे आसपास इस छोटी सी दुनिया में खो जाते हैं, जिसमे क्रिकेट के मैदान , होटल व् हवाई अड्डे शामिल है और हम बाहरी दुनिया से संपर्क खो बैठते हैं . इन दो सालों में भी मैंने बहुत कुछ सीखा. मुझे एहसास हुआ कि जब आप खेल रहे है तब आपको ये भी सीखना है कि खेल को मैदान में ही छोड़कर कर भी आना है. इससे पहले मैं अपने होटल के कमरे में खेल को मेरे साथ लाता  था. मैं एक मैच मैदान पर खेल कर आता और फिर होटल के कमरे में मेरे दिमाग में मैच शुरू हो जाता. “

“हाँ, क्रिकेट है जो मुझे सबसे अधिक खुशी देता है .इसने मुझे जीवन में इतना कुछ दिया है जिसे मैं लौटा नहीं सकता .लेकिन एक ही समय में क्रिकेट से दूर भी एक ज़िन्दगी है. जिसका अब मुझे एहसास हो गया है और वह जीवन जाना शुरू करने के बाद आप और अधिक खुश और आराम महसूस करेंगे जिससे अंततः आपको अपने खेल में भी बेहतर बनाएगा.”

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