भारत देश में भारतीय क्रिकेट टीम में जगह मिलना एक खिलाड़ी के लिए सपने को सच कर देना जैसा होता है. मगर भारतीय टीम में कदम रखने के लिए उस खिलाड़ी को कई इम्तिहानो से गुजरना पड़ता है और कड़ी मेहनत करनी पड़ती है.

इनमे से कई खिलाड़ी तो एक धनी परिवार से होते है, लेकिन कुछ खिलाड़ी बहुत ही गरीबी की स्तिथि से भारतीय टीम में जगह बनाते है और ऐसी ही गरीबी परिस्थितियों से निकलकर भारत के उभरते हुए ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या ने भी भारतीय टीम में जगह बनाई है.

हार्दिक के क्रिकेट सफर में आई है बहुत चुनौती

भारतीय टीम के उभरते हुए ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या ने अपने शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन से भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले वनडे में जीत दिलाई थी और आज इसी के चलते आज हम आपको हार्दिक पंड्या के क्रिकेट करियर के सफर में आई हुई चुनौती के बारे में इस खास लेख में बताते है.

2010 में पिता को आया हार्टअटैक

हार्दिक पंड्या गुजरात के एक काफी साधारण परिवार से आते है. हार्दिक के पिता फाइनेंसिंग का काम करते थे, लेकिन इस काम में ज्यादा कमाई नहीं हो पाती थी. 2010 में हार्दिक के पिता को हार्टअटैक आ गया था और अपनी खराब सेहत के चलते हार्दिक के पिता फिर आगे नौकरी नहीं कर पाये. जिस वजह से हार्दिक के घर की आर्थिक स्तिथि बेहद खराब हो गई.

पैसों के लिए खेलते थे दुसरे गांव से 

हार्दिक के बड़े भाई कृणाल पंड्या भी एक क्रिकेट खिलाड़ी ही है और आईपीएल में मुंबई इंडियन की तरफ से खेल चुके है. कुणाल पंड्या के मुताबिक हार्दिक और कुणाल पंड्या 400-500 रूपये कमाने के लिए पास के गांव में क्रिकेट खेलने जाते थे. गांव का नाम ‘पालेज’ था, उन्हें हर मैच खेलने के लिए 400-500 मिल जाते थे. कुणाल के मुताबिक वो दिन नहीं होते तो आज के ये दिन शानदार नहीं होते.

मैगी खाकर करते थे गुजरा 

pc: google

पंड्या परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि वह मैगी खाकर अपना गुजारा करते थे. हार्दिक ने अपने एक इंटरव्यू के दौरान खुद ये बात कही थी, कि वह उस दौरान केवल मैगी खाते थे, क्योंकि उनके पास बेहतर खाना खाने के लिए पैसे नहीं होते थे. हार्दिक का परिवार अपनी आर्थिक तंगी के कारण किराये के घर में रहता था इतना ही नहीं हार्दिक के पास अपना खुद का क्रिकेट किट भी नहीं होता था.

करियर सवारने में किरण मोरे का रहा हाथ 

हार्दिक पंड्या पढ़ाई में भी अच्छे नहीं थे और सिर्फ 9वी क्लास में ही फेल हो गये थे. इसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी  और अपना पूरा ध्यान क्रिकेट में ही लगाने लगे. पूर्व क्रिकेटर किरण मोरे ने हार्दिक पंड्या को अपनी क्रिकेट एकेडमी में तीन साल फ्री ट्रेंनिंग दी और उन्हें के बेहतर क्रिकेट खिलाड़ी बनाया.

आईपीएल नीलामी से बदली किस्मत 

2015 की आईपीएल नीलामी पंड्या परिवार के लिए खुशियां लेकर आई, क्योंकि इस साल मुंबई इंडियन की टीम ने हार्दिक को उनके बेस प्राइज़ 10 लाख रूपये में खरीदा और तब से लेकर अब तक हार्दिक ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

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