अपने शुरुआती दिनों में आत्महत्या करना चाहते थे सुरेश रैना - Sportzwiki
इंटरव्यूज

अपने शुरुआती दिनों में आत्महत्या करना चाहते थे सुरेश रैना

  • भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना अब एक बडे क्रिकेटर बन गये है, लेकिन उन्हें काफी बुरे दिन भी देखने को मिले है, और उन्होंने एक बार तो खुदकुशी करने का भी सोचा था.

    सुरेश रैना ने एक अखबार में दिये इंटरव्यू में कहा,कि वे आज भले ही एक सफल क्रिकेटर है, लेकिन बचपन में उन्हें काफी बुरे दिन देखे है.

    रैना एक किस्सा बताया  कि, वे ठंड से बचने के लिए ट्रेन में अखबार बिछाकर उसपर सोये थे, लेकिन जब मेरी आंख खुली तो देखा की मेरे हाथ तो बंधे हुए है.

    रैना तब आगरा में एक टूर्नामेंट खेलने जा रहे थे, जब वे काफी छोटे थे. उनके साथ कई और छोटे बच्चे भी थे. रैना ने ठंड से बचने के लिए, ग्लब, पैड, ये सब पहनकर सो गये थे.

    रैना ने कहा जब मैनें देखा, तो एक मोटा बच्चा मेरी छाती पर बैठकर मेरे चेहरे पर पेशाब कर रहा था.

    रैना के हाथ बंधे हुए थे, लेकिन रैना ने एक एक घुसा मारा और उस बच्चे के बाहर गिरा दिया. इस घटना की वजह से रैना ने होस्टल छोड घर जाने का भी सोचा था.

    रैना जब होस्टल में रहते थे, तब कई दुसरे बच्चे रैना से जलते थे, क्योंकी रैना काफी अच्छा खेलते थे, और कोच के चहेते थे. उस जलन की वजह से रैना ने आत्महत्या करने का सोचा था.

    रैना ने कहा, तब बडे बच्चे मेरे उपर रात को ठंडा पानी डालते थे, दूध में घास डालते थे, मुझे बहुत गुस्सा आता था, लेकिन मुझे पता था, कि अगर मै एक को मारुंगा तो बाकी बच्चे मिलकर मुझे मारेंगे, इसलिए मै शांत रहता था.

    रैना को एक बार हॉकी स्टिक से भी पीटा गया था, और उनका एक दोस्त इस वजह से आत्महत्या करने जा रहा था, लेकिन रैना और उसके एक दोस्त ने उसे रोका था. उसके बाद से पुलिस वहां पर रात को आने लगी.

    रैना ने कहा, काफी बच्चों के पास तब रिवॉल्वर थी, और वे सभी अपने अपने पास बंदूक रखकर ही सोते थे. रैना ने इस वजह से एक साल में वो हॉस्टल छोड दिया था.

    लेकिन रैना के भाई ने फिर से रैना को हॉस्टल पहुंचा दिया, और बाद में उनको पुरी सुरक्षा दी गयी.

    रैना ने कहा वो दिन बहुत मुश्किल भरे थे, पापा 200 रुपये देते थे, और उसी से हम सभी समोसा, बिस्कुट खाया करते थे. लेकिन बाद में सभी का ध्यान मेरे क्रिकेट पर गया, और सब लोग मुझे अपनी टीम में लेना चाहते थे.

    तब रैना को छक्के लगाने के पैसे मिलते थे, और उसी से उन्होंने शूज खरीदे थे. रैना ने कहा, अगर मै युपी में ही रहता तो आज मै यहां नहीं होता.

    1999 में रैना को एयर इंडिया की स्कॉलरशिप मिली, और उन 10,000 में से रैना अपने परिवार को 8 हजार देते थे, और 2 हजार से अपना काम चला लेते थे.

    2003 में रैना इंग्लैंड क्रिकेट क्लब की ओर से खेले, और फिर 2005 में उन्होंने भारत की और से खेला.

    रैना के पहले मैच में वे धोनी के कमरे में सोये थे, और बेड की बजाय नीचे सोये थे. तब धोनी भी निचे सोये थे, क्योंकि बेड पर सोने की हमे आदत नहीं थी.

    आईपीएल ने रैना की जिंदगी बदल डाली, और आज वे एक बडे खिलाडी है.

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