क्रिकेट के एक दिग्गज खिलाड़ी “स्टीव वॉ” ने कहा था कि “अगर आप लोगों की मदद नहीं करते जिन्हे कि जरूरत होती है, तो वह अच्छे क्रिकेटर नहीं है.” ऐसे कई खिलाडी रहे हैं जिन्होंने क्रिकेट से उनके संन्यास के बाद चैरिटी के लिए अपने जीवन को समर्पित किया है .एक क्रिकेटर होने के नाते दुनिया भर में घूमने जाते रहे हैं. खेल की अपनी कला से उन्होंने बहुत लोगो का दिल जीता है. दौरे के दौरान काम के बाद वे होटल में नहीं बैठे रहते थे बल्कि बाहर निकल जाते थे और उनकी आँखों के सामने गरीब लोगो की दुखद व्यथा नज़र आती थी. उस दौरान तो वो जो कर सकते थे उन्होंने किया लेकिन खेल से सन्यास के बाद भी उन्होंने अप जीवन इसी काम को समर्पित कर दिया.

यहां पेश है वह क्रिकेटर्स जिन्होंने ने इस भले काम में एहम योगदान दिया

“यू वी कैन” युवराज सिंह फाउंडेशन
युवराज सिंह एक ऐसे खिलाडी हैं जिन्होंने बड़े पैमाने पर चैरिटी के काम में ध्यान केंद्रित किया है. कैंसर से लड़ाई जीतने के बाद युवराज सिंह ने ” YouWeCan ” का गठन किया था. इस कार्य के दो उदेशय हैं एक तो ये कि -कैंसर को लेकर लोगो में मौजूद सामाजिक मनोवैज्ञानिक ख़राब चीज को हटाना और जागरूकता पैदा करना और दूसरा ये कि आम जनता की पहुंच के भीतर मोबाइल कैंसर जांच केंद्र प्रदान करना.

म्यूसिक , एक ब्रेट ली फाउंडेशन

ब्रेट ली की यह संस्था विश्वास रखती है संगीत बच्चों में संभावित कला व् हुनर को लाने में एक शक्तिशाली उपकरण है. एक बार उन्होंने कहा था कि अगर आप मेरी ज़िन्दगी से क्रिकेट को निकल दे तो मैं उदास हो जाऊंगा लेकिन अगर मेरे जीवन से संगीत निकल दिया तो मैं तबाह हो जाऊंगा.” ब्रेट ली के बच्चो के प्रति प्यार के बारे में बहुत कम ही लोग जानते हैं . ब्रेट ली ने असहाय बच्चों के लिए इस संस्था की शुरुवात की थी.
“मैं भारत के बारे में बहुत भावुक हूँ मैं यहाँ इस देश व् यहाँ के लोगो से बहुत जुड़ाव महसूस करता हूँ .मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूँ कि भारत में सभी बच्चों को यहाँ ख़ुशी और संगीत की शक्ति का अनुभव करने का अवसर है . “

शाहिद अफरीदी फाउंडेशन
इमरान खान के नक्शेकदम पर चलते हुए शाहिद अफरीदी ने पाकिस्तान के लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य और शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से एक चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की थी. शाहिद अफरीदी फाउंडेशन मार्च 2014 में स्थापित किया गया था,इसके पीछे मूल अवधारणा यह है: “चैरिटी पूर्ण परोपकार से सजी हो.” यह रोगियों के लिए नि: शुल्क उपचार , दवा और देखभाल प्रदान करता है .

पोंटिंग फाउंडेशन
पोंटिंग की यह फाउंडेशन लोगो को कैंसर के खिलाफ लड़ने में मदद करती है. 2002 में बच्चों के कैंसर संस्थान ऑस्ट्रेलिया (CCIA) का एक अच्छा दोस्त था जिसने सिडनी में बच्चों के अस्पताल का दौरा करने के लिए पोंटिंग को आमंत्रित किया था. उस दौरान ऑन्कोलॉजी वार्ड में पोंटिंग ने मरीज़ों की दुःख भरी दास्ताँ सुनी तो वे बेहद भावुक हो गए .उस वक़्त उन्होंने कैंसर से जूझ रहे लोगो व् उनके परिवार के जीवन में सुधार लाने का निश्चय किया. जिसका परिणाम उनकी ये संस्था है.

मैक्ग्रा फाउंडेशन

क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद ग्लेन मैकग्रा ने अपनी पत्नी जेन को खो दिया था. लेकिन वे उनकी यादों में जीते रहे. उनकी पत्नी को 2003 में कैंसर हुआ था. जिसके बाद 2008 में उनकी मृत्यु हो गयी. स्तन कैंसर के साथ एक व्यक्तिगत अनुभव के बाद, जेन और ग्लेन मैकग्रा ने सितंबर 2005 में मैकग्रा फाउंडेशन शुरू करने का फैसला लिया था. जिसमे वे इसी बीमारी से जूझ रहे दूसरे लोगो की मदद करते हैं.

मुथैया मुरलीधरन , फाउंडेशन ऑफ़ गुडनेस

सीनिगमा श्रीलंका का एक गांव है जहाँ मुथैया मुरलीधरन ने अपनी इस फाउंडेशन ऑफ़ गुडनेस की शुरुवात की .यह संस्था स्थानीय लोगों , शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, आवास की जरूरत आजीविका आदि में लोगो का समर्थन करता है. इस काम में श्रीलंका के ,ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के कई क्रिकेटरों ने समर्थन किया है. मुरली संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम के राजदूत भी है. जब 26 दिसंबर 2004 को श्रीलंका में सुनामी आई थी तब मुरली ने इस आपदा से प्रभावित लोगो को खाना देने में भारी योगदान दिया था.

स्टीव वॉ फाउंडेशन

स्टीव ने एक बार कहा था कि “भारत ने मुझे इस जीवन को बदलने के पल दिए हैं जब मैंने कोलकाता में मदर टेरेसा से मुलाकात की .”
उन्होंने कोलकाता में कोढ़ी बच्चों के लिए रकम जुटाई थी. स्वभाव से जिज्ञासु थे स्टीव जो कि हमेशा उनकी कप्तानी के कार्यकाल के दौरान अपने साथियों को दौरा कर देशों के बारे में पता करने के लिए प्रोत्साहित करते थे.

इमरान खान फाउंडेशन

इमरान खान पाकिस्तान के सबसे बढ़िया खिलाडियों में से थे. उन्होंने एक समय में टूटी हुई टीम के साथ पाकिस्तान के लिए विश्व कप जीता क्योंकि वह अपने साथियों को “घायल बाघ” कहकर प्रेरित किया करते थे. उनके मानवीय प्रयासों के बीच सबसे उल्लेखनीय अपनी दिवंगत मां के नाम पर रखा , “शौकत खानम मेमोरियल कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र” की स्थापना थी. यह पाकिस्तान का पहला और एकमात्र कैंसर अस्पताल है जो 75% नि: शुल्क स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करता है .

इयान बॉथम चैरिटी फाउंडेशन

इयान बॉथम महान ऑलराउंडर क्रिकेटरों में से एक थे, एक तेजतर्रार क्रिकेटर जिनका नाम बीफी भी था उन्हें 1985 में लोगों की मदद करने की आदत जब उन्हें जॉन ओ ‘ग्रोएट्स से 900 मील पैदल सफर तय करना पड़ा. उन्हें ये फाउंडेशन की प्रेरणा तब मिली जब वह अपने पैर के टूटे अंगूठे के इलाज के लिए टांटन के मुसग्रोव पार्क अस्पताल पहुंचे और गलती से बच्चों के वार्ड में चले गए .वहां उन्हें पता लगा कि कि इनमे से कुछ बच्चो की कुछ पल की ही ज़िन्दगी है .तब से उन्होंने दान के लिए € 12,000,000 जमा की.

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