पाकिस्तान के होनहार आल-राउंडर फवाद आलम ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड पर निशाना सादते हुए कहा है, कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड कुछ खिलाड़ियों के प्रति ज्यादा ध्यान देता है, यही एक कारण है, कि मुझे टीम में जगह नहीं दी गई.

31 वर्षीय आलम ने वर्ष 2007 में अन्तराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था, तब से आलम ने केवल 3 टेस्ट 35 एकदिवसीय और 24 टी-ट्वेंटी खेले हैं.  पाकिस्तान में खेला जायेगा ये नया क्रिकेट टूर्नामेंट, दिग्गज खिलाड़ी लेंगे हिस्सा

पाकिस्तान के प्रथम श्रेणी के इतिहास (55.40) में सर्वाधिक बल्लेबाजी औसत वाले फवाद का मानना ​​है, कि घरेलू सर्किट में उनके प्रदर्शन के आधार पर सभी को चुना जाता है, जबकि उन्हें बार-बार नजरअंदाज किया जाता है.

एक्सप्रेस ट्रिब्यून से बात करते हुए फवाद ने कहा, “बहुत सारे कारण हैं. मैं उन्हें स्क्रीन पर नहीं बता कर सकता हूँ  लेकिन यह कह सकता हूँ कि, वहाँ(पीसीबी में) पक्षपात है.”

फवाद ने आगे कहा, “लोगों का मानना ​​है, कि यह अफवाह है लेकिन यह एक वास्तविकता है. नए खिलाडियों को राष्ट्रीय टीम में शामिल किया गया है, उन्हें टीम में शामिल किये जाने का आधार घरेलू सर्किट में प्रदर्शन बताया जाता है, लेकिन फिर फवाद आलम को क्यूँ नज़रंदाज़ किया जाता है? क्या वह बांग्लादेश के घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन कर रहा है, उन्होंने मुझे अपने घरेलू प्रदर्शन पर टीम में शामिल नहीं किया, जबकि बाकी सभी को उसी मानदंड के आधार पर चुना गया है.”  क्रिकेट के इतिहास में ऐसा पहली बार देखने को मिला जब पिता और पुत्र की जोड़ी ने लगाए अर्धशतक

वर्ष 2015 में बांग्लादेश के विरुद्ध अपना आख़िरी अन्तराष्ट्रीय मैच खेलने वाले फवाद का मानना है, कि कभी कभी उन्हें लगता है, कि पाकिस्तान के लिए खेलने उनके भाग्य में नहीं हैं.

“मुझे यह समझ में नहीं आता है (मुझे क्यों नहीं चुना जा रहा है). हालाँकि, मैं कभी-कभी सोचता हूँ, कि मैं पाकिस्तान के लिए खेलने के लिए नहीं हूँ. लेकिन मैं लड़ रहा हूँ और जो कुछ भी कर सकता हूँ, वह करने के लिए पूरी कोशिश करता हूँ, और मेरा मानना ​​है, कि प्रतीक्षा करने वालो का अच्छा समय आता हैं.”

फवाद ने यह भी कहा कि वह एकलौते खिलाड़ी नहीं जिसे इन सब चीज़ सामना करना पड़ा रहा हैं, लेकिन वह उन खिलाड़ियों में से है जो कभी हार नहीं मानते हैं.  पाकिस्तान की मौजूदगी में सुल्तान ऑफ जोहर कप में नहीं खेलेगा भारत

फवाद ने कहा, “मैं एकलौता खिलाड़ी नहीं हूँ जिसे इन सब चीजों का सामना करना पड़ रहा हैं. मुझे उम्मीद है और कभी न हार मानने का ज़ज्बा हैं. जब आप काफ़ी लोगो के साथ खेलते है तो कई लोग आपको निचा दिखाने वाले मिलेगे, जबकि कुछ आपकी मदद करने वाले मिलेगे. इसलिए मैं उन लोगों के साथ रहने की कोशिश करता हूँ जो मुझे प्रोत्साहित करते हैं.”

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