साल 2005 के अक्‍टूबर का वह आखिरी दिन था और भारत श्रीलंका के खिलाफ अपना तीसरा एकदिवसीय मैच खेलने जा रहा था। वैसे भी इस सीरीज में भारत 2-0 से आगे चल रहा था। श्रीलंका निश्चित तौर पर दुनिया में नंबर 2 की वनडे टीम टैग का खिताब खोने वाला था। दूसरी ओर भारत सीरीज जीतने वाला था। भारत ने दो मैचों में दो बार मेहमान टीम को कम रनों पर पर ही ढेर कर दिया था। इस दौरान बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों ही विभाग एक दूसरे का पूरा साथ दे रहे थे। जिसका लाभ राहुल द्रविड़ की टीम पूरी तरह ले रही थी। इसी के साथ राहुल ने अपने आप को एक अच्‍छे विकेटकीपर और बेहतरीन बल्लेबाज के तौर पर स्थापित किया।

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मैच की शुरूआात श्रीलंका ने टॅास जीत कर की और बल्‍लेबाजी करने का निर्णय लिया। मार्वन अटापट्टू की टीम ने कुल 298 रन का स्‍कोर 4 विकेट के नुकसान पर खड़ा किया। उस समय श्रीलंका टीम को आगे ले जाने की जिम्‍मेदारी महेला जयवर्धने और कुमार संगाकारा के कंधों पर थी। इन्‍होंने बेहतर प्रदर्शन किया और संगाकार ने इसी के साथ अपना चौथा एकदिवसीय शतक लगाया।

वीरेन्‍द्र सहवाग और सचिन तेंदूलकर दूसरी परी में ओपनर बल्‍लेबाज के तौर पर मैदान में लक्ष्‍य का पीछा करने के लिए उतरे। उस समय धोनी रोज ढ़ेर सारा दूध पीने के कारण चर्चा का केन्‍द्र बने हुए थे। इसीलिए उनके अंदर बहुत जोश और फूर्ती थी। जयपुर का सवाई मान सिंह स्‍टेडियम उस दिन एक यादगार पारी का गवाह बनने वाला था। धानी ने अपने शुरूआती 26 रन में 3 छक्‍के और 1 चौका लगाया। उन छक्‍कों में से दो छक्‍के चमिंडावास की गेंद पर लगाये। फरवीज़ महरूफ ने उन्‍हें रोकने की कोशिश की लेकिन धोनी ने केवल 40 गेंदों में ही अपना अर्धशतक पूरा कर लिया।

दूसरी तरफ सहवाग केवल स्‍ट्राइक बदलने के लिए एक या दो रन लेकर काम चला रहे थे। तभी वो मुरली धरन की गेंद पर एलबीडब्‍ल्‍यू होकर आउट हो गये। जिसके बाद राहुल द्रविण ने धोनी का साथ शुरू किया। लेकिन तभी 18वें ओवर में उपुल चंदाना की गेंद को धोनी समझ नहीं पाये और एक बड़ा शॉट लगाने के चक्कर में उनके जांघ में खिंचाव आ गया। लेकिन उन्‍होंने खेल जारी रखा। फिर धोनी ने खेल को आराम से खेलना शुरू किया और दूसरी ओर राहुल को मौका दिया। लेकिन तभी राहुल और धोनी पिच पर मिले और आपस में बातें की। हम कह सकते हैं कि उन्‍होंने आपस में यही कहा होगा कि अभी बहुत रन बनाने हैं कुछ और करना होगा।

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दोनों ने महसूस किया कि उनके बाद युवराज तो हैं खेलने के लिए लेकिन धोनी इस समय फार्म में चल रहे हैं और अपना शतक पूरा कर सकते हैं। फिर क्‍या धोनी ने चौकों और छक्‍कों की बौछार कर दी और कोई भी गेंदबाज उन्‍हें रोकने में असमर्थ रहा। लेकिन 32 ओवर के बाद धोनी की दिक्‍कत बढ़ गयी।

तब विकल्‍प के तौर पर धोनी के लिए वीरेन्‍द्र सहवाग को रनर के तौर पर बुलाया गया। लेकिन अचरज वाली बात यह थी कि सहवाग को अच्‍छे रनर के तौर पर नहीं जाना जाता था। बात दरअसल यह थी की कोई और विकल्‍प न होन के कारण उन्‍हें ही मैदान में आना पड़ा।

इसी के साथ धोनी ने खेल फिर शुरू किया और 145 गेंदों पर 183 रन की शानदार पारी खेली। धोनी ने तिलकरत्‍ने दिलशान की गेंद पर छक्‍का मार कर मैच जीत लिया। इसी के साथ श्रीलंका सीरीज से भी बाहर हो गयी।

देखें धोनी की यादगार पारी

अब तक भारतीय टीम में जिस  खिलाड़ी ने भी 183 रन बनाया है, उसे भारतीय टीम की कप्तानी करने का मौका मिला है, जिसके ताजा उदाहरण धोनी, सौरव गांगुली और विराट कोहली है. तो अगर सहवाग ने धोनी के लिए रनर का काम नहीं किया होता, तो शायद धोनी के 183 रन नहीं होते.

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