स्पिरिट ऑफ़ क्रिकेट- कितना सच और कितना झूठ - Sportzwiki
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स्पिरिट ऑफ़ क्रिकेट- कितना सच और कितना झूठ

  • साल 2000 में 3 मई को स्पिरिट ऑफ़ क्रिकेट का निर्माण किया गया था. जिसमें इस खेल को खेल के नियमों के तहत ही खेलने की बात हुई. इसके अलावा अगर कोई भी इसके नियमों से खिलवाड़ करता है या खेल कि आत्मा को ठेस पहुँचाने का काम करता है. तो उसे नियम के तहत सजा दी जाएगी. साथ ही कप्तानों को ये जिम्मेदारी दी गयी कि वह इस खेल को साफ़ सुथरे तरीके से खेलें.

    लेकिन हाल के समय में क्रिकेट के खिलाड़ियों का व्यहवहार निंदनीय रहा है. जहाँ उन्हें फुटबॉल और अन्य खेलों की तरह से लाल कार्ड और पीले कार्ड तक दिखाये जाने लगे हैं. मेरिलबोन क्रिकेट क्लब जो क्रिकेट के नियमों को समय-समय पर नवीनता देता रहता है.

    ये सब उसी के नियम से देखने को मिलता है- जब कोई युवा बल्लेबाज़ 90 रब पर बल्लेबाज़ी कर रहा हो, तो उसे बाउंसर गेंद न डाली जाये. साथ निचले क्रम के बल्लेबाजों को भी बाउंसर न डाली जाये. अगर बल्लेबाज़ को पता है कि वह आउट है तो वह पवेलियन बिना अंपायर के इशारे से जा सकता है. साथ ही फील्डर को कैच की सफाई के बारे में नहीं छुपाना चाहिए. मांकड़ की तरह रनआउट करने के चांस को अवॉयड करना चाहिए. कप्तान को बल्लेबाज़ को गलत निर्णय पर वापस बल्लेबाज़ी के लिए बुलाना चाहिए. जैसा कि गुंडप्पा विश्वनाथ ने किया था. 

    इसी तरह से मैच में कई बार खिलाडी एक दूसरे पर टीका टिप्पणी भी करते हैं. इसे आजकल स्मार्ट क्रिकेट भी माना जाता है. जिसमे वह माइक्रोफोन और कैमरे को अवॉयड करते हैं. जैसाकि जेम्स एंडरसन और भारत के रविन्द्र जडेजा के बीच इंग्लैंड में एक टेस्ट मैच के दौरान हुआ था. उन्होंने एक दूसरे को स्लेज किया था. जिस्मेना वह कैमरे के सामने पड़ गये थे.

    स्लेजिंग जैसे मामले कप्तान और फील्ड अंपायर अपनी सहमति से निपटा लेते हैं. जोकि ज्यादा संवेदनशील नहीं माना जाता है. साथ ही अब इस खेल में पहले के मुकाबले कुछ ज्यादा ही खिलाड़ियों को तेज तर्रार होना होता है. इस वजह से कुछ खिलाड़ियों दिमागी खेल भी खेलते रहते हैं. जिससे स्लेज को बढ़ावा मिलता है. ऐसे में कई बार खिलाडी अपना धैर्य खो बैठते हैं. संजय मांजरेकर ने कहा था कि भारत के दिग्गज आलराउंडर कपिल देव ने अपने पूरे करियर में कभी अपना कूलनेस नहीं खोया.

    अभी हाल ही में अंडर 19 विश्वकप में वेस्टइंडीज के कीमो पाल ने जिम्बावे के बल्लेबाज़ रिचर्ड नगरवा को मांकड़ रन आउट कर दिया. जिसकी वजह से इस आउट करने के तरीके ने पूरी दुनिया में सुर्खिया बटोरी किसी ने इसे बुरा माना तो किसी ने इसके पक्ष में अपनी बात रखी.

    हालाँकि इन सबके बावजूद जावेद मियांदाद बनाम डेनिस लिली, अंपायर बनाम कोलिन क्रॉफ्ट, माइकल होल्डिंग बनाम स्टंप के बीच कई  यादगार स्लेज और नाटकीय किस्से आज भी लोगों को याद हैं.

    टेस्ट मैच छोटे प्रारूप से ज्यादा अच्छे या बुरे स्पिरिट से खेला जाता है. लोगों आज भी हरभजन और सायमंड्स का किस्सा याद है. जो बहुत ही बुरे घटनाओं में आता है.

    स्पिरिट ऑफ़ क्रिकेट- इधर कुछ सालों से क्रिकेट की आत्मा के साथ खिलवाड़ करने वाले खिलाड़ियों  को लाल और पीला कार्ड भी दिखाया गया है. जो क्रिकेट जैसे खेल में ज्यादा चलन में नहीं था.

    हालाँकि ये कार्ड सिस्टम टी-20 टूर्नामेंट में चलन में आया है. खासकर प्रोफेसनल लीगों में इसका इस्तेमाल हो रहा है. लेकिन अब दो सवाल उठते हैं कि क्या क्रिकेट को साफ़ सुथरा पहले जैसा किया  जा  सकता  है. दूसरा जो नियम हैं उन्हें अगर फालो किया गया तो आधुनिक क्रिकेट का मजा किरकिरा हो जाएगा. खास बात ये है कि इन दोनों का समर्थन विश्व स्तर के क्रिकेटर करते आये हैं.

     

     

     

     

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