भारतीय टीम पिछले दो सालों से वनडे क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन कर रही है जिसके चलते साल 2017 में ही भारतीय टीम ने कुल 6 वनडे सीरीज जीती थी और एक भी वनडे सीरीज नहीं हारी थी. भारतीय टीम वनडे क्रिकेट रैंकिंग में भी नंबर-1 के स्थान पर काबिज है.

भारतीय टीम के पास शानदार तेज गेंदबाज भी है शानदार स्पिन गेंदबाज भी है और भारत के टॉप-3 में भी रोहित, शिखर, कोहली जैसे तीन शानदार बल्लेबाज है, लेकिन अगर भारतीय टीम की पिछले दो साल में कोई सबसे बड़ी समस्या रही है तो वह मध्यक्रम की रही है.

भारत का मध्यक्रम पिछले दो साल से कुछ खास नहीं कर पाया है. भारतीय टीम का मध्यक्रम अंत के 10 ओवर में भी रनों की गति नहीं बढ़ा पाता है और ऐसा वर्तमान में खेली जा रही भारत-साउथ अफ्रीका की वनडे सीरीज में भी बार-बार देखने को मिल रहा है.

भारत और साउथ अफ्रीका के बीच मंगलवार को खेले गये पांचवे वनडे मैच में भी भारतीय टीम को टॉप-3 बल्ल्लेबजों ने अच्छी शुरूआत तो दिलाई, लेकिन भारतीय मध्यक्रम के बल्लेबाजों एक बार फिर नाकामयाब साबित हुए और अंत के 10 ओवर में ना तो रन की गति बढ़ा पाये और ना ही टिक कर बल्लेबाजी कर पाये. आज इसी के चलते हम आपकों अपने इस खास लेख में वो पांच कारण बताएंगे, जिनके चलते भारत के मध्यक्रम के बल्लेबाज अंत के 10 ओवर में रन बनाने में असफल साबित हो रहे है.

भारत के मध्यक्रम में अनुभव की कमी 

Shreyas Iyer

भारत के मध्यक्रम में अनुभव की कमी है भारत के पास मध्यक्रम में श्रेयस अय्यर, मनीष पाण्डेय, केधार जाधव जैसे बल्लेबाज है और इन बल्लेबाजों को अभी अंतर्राष्ट्रीय वनडे क्रिकेट में इतना अनुभव नहीं है और अनुभव ना होने के चलते ही यह बल्लेबाज खुद भी फेल होते जा रहे है और इन बल्लेबाजों के चलते भारतीय टीम भी अंत के 10 ओवर में बड़ा स्कोर नहीं बना पा रही है.

मध्यक्रम के खिलाड़ियों में बार-बार बदलाव करना 

भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली और भारत का टीम मैनेजमेंट भारत के मध्यक्रम के बल्लेबाजों पर बदलाव करता रहता है. मध्यक्रम के बल्लेबाजों का स्थान सुनश्चित नहीं है. कभी अय्यर को मौका मिलता है तो कभी मनीष पाण्डेय को कभी केदार जाधव को मौका मिलता है, तो कभी दिनेश कार्तिक को, टीम मैनेजमेंट लम्बे समय तक किसी भी बल्लेबाज के संग नहीं बना रहा है. जिसका असर भारत के अंत के 10 ओवर की बल्लेबाजी में भी पड़ रहा है.

एक बल्लेबाजी क्रम निश्चित ना होना 

भारत के टॉप-3 तो हर मैच में निश्चित रहते है और गलती से भी टीम मैनजमेंट इसमें कोई ऊपर-निचे नहीं करता है, लेकिन नंबर-4 से भारत के किसी भी बल्लेबाज का स्थान फिक्स नहीं है नंबर-4 से कभी भी कोई भी बल्लेबाज बल्लेबाजी करने आ जाता है, इसलिए खिलाड़ी मानसिक रूप से मध्यक्रम पर बल्लेबाजी करने के लिए तैयार नहीं हो पा रहे है और इसका असर भारत के आखिरी के कुछ ओवर की बल्लेबाजी में पड़ रहा है.

धोनी पर जरुरत से ज्यादा निर्भरता 

भारतीय टीम का मध्यक्रम धोनी पर भी जरुरत से ज्यादा निर्भर है अगर धोनी अंत तक खेलते है, तो टीम कुछ अच्छा कर पाती है, लेकिन अगर अच्छा ना खेले तो भारत का मध्यक्रम पूरी तरह से बिखर जाता है.

टीम में एक अच्छे फिनिशर का ना होना

भारतीय टीम के लिए पिछले कुछ सालों में अच्छे फिनिशर का रोल महेंद्र सिंह धोनी ने बखूबी निभाया है, लेकिन अब उनमें भी वह पहले वाले मैच फिनिशर की बात नहीं रही है. इसलिए भारतीय टीम को अब एक अच्छे फिनिशर की जरुरत पड़ा रही है, क्योंकि अब तक मनीष, केदार, दिनेश और अय्यर एक अच्छे फिनिशर के रोल में खुद को साबित नहीं कर पाये है.

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