खेल में कई बार ऐसी घटनाएं हो जाती हैं जिसकी वजह से खिलाडी मैदान में या मैदान के बाहर विवादों में घिर जाते हैं. हालाँकि कुछ खिलाडी ऐसे भी हैं जिन्होंने हर परिस्थिति का धैर्य से सामना किया और विवादों से दूर रहे. और इन्ही कुछ ख़ास खिलाडियों को क्रिकेट के गुड बॉयज़ के रूप में जाना जाता है.

राहुल द्रविड़ ( भारत)
द्रविड़ 1996 में अपनी शुरुआत के बाद से लेकर अपने रिटायर होने तक भारत के सबसे सुसंगत बल्लेबाजों में से एक रहे. इन्हे क्रिकेट के मैदान पर अपने शांत रवैये और धैर्य के लिए जाना जाता है. इन्हे कभी अंपायर के फैसले के खिलाफ जाते नहीं देखा गया. अपने 16 साल के करियर के दौरान द्रविड़ मैदान पर या मैदान के बाहर एक अच्छे खिलाडी व् शख्स के तौर पर ही नज़र आये. स्थिति जो भी रही हो इन्होने कभी अपना आपा नहीं खोया.

एडम गिलक्रिस्ट (ऑस्ट्रेलिया)
ऑस्ट्रेलियाई टीम मैदान पर अपने आक्रामक व्यवहार के लिए जानी जाती थी. साथ ही वे स्लेजिंग में भी माहिर हैं. लेकिन एडम गिलक्रिस्ट एक ऐसे खिलाडी हैं जिहोने हमेशा ईमानदारी से अपना खेल खेला और कभी अपनी हद पार नहीं की. जब गिलक्रिस्ट को लगता था कि वह आउट हो गए हैं तो वह हमेशा अंपायर के फैसले का इंतजार किए बिना ही मैदान से चले जाते थे. गिलक्रिस्ट को टीम में जूनियर के साथ अच्छी तरह से काम करने के लिए भी जाना जाता था.

वीवीएस लक्ष्मण (भारत)
वीवीएस लक्ष्मण भारत के एक गुमनाम नायक थे. इन्होने कई अवसरों में शानदार प्रदर्शन किया लेकिन किसी का ध्यान इस खिलाडी की ओर नहीं गया. लेकिन लक्ष्मण हमेशा अपनी टीम के हित के लिए खेलने वालों में से थे. द्रविड़ की तरह लक्ष्मण भी कभी विवादों में नहीं पड़े.

अनिल कुंबले ( भारत)
अनिल कुंबले भारतीय टीम में सबसे अधिक शिक्षित क्रिकेटरों में से एक थे. उन्होंने हमेशा व्यक्तिगत तरक्की से ज्यादा टीम को अहमियत दी. कुंबले भारत के ऑस्ट्रेलिया केअब तक के  सबसे खतरनाक दौरे के दौरान कप्तान थे. दोनों टीमों ने रेफरल प्रणाली का उपयोग नहीं करने का निर्णय लिया था. जिस कारण बहुत से फैसले विरोधी टीम के पक्ष में गए थे. कुंबले ने मैदान पर कोई असंतोष नहीं दिखाया. बाद में कुंबले ने कहा था कि केवल एक ही टीम मन में खेल की भावना रखते हुए खेल रही थी.

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर (भारत)
महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर हमेशा क्रिकेट के प्रति समर्पित रहे. सचिन अपने पुरे करियर में कभी विवादों में नहीं पड़े. सचिन ने कभी भी तंबाकू या शराब उत्पादों से संबंधित विज्ञापनों का हिस्सा बनना स्वीकार नहीं किया. भारत सरकार ने सचिन को देश में सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया है.

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