इसमें कोई शक नहीं कि क्रिकेट को एक ‘जेंटलमैन गेम’ कहा जाता है और ऐसा है भी लेकिन यह खेल कई कुख्यात गतिविधियों से सना हुआ भी है. सही मायनो में एक उचित खेल खेलने के लिए टीम भावना होनी अत्यंत आवश्यक है. एक व्यक्तिगत रिकॉर्ड की प्राप्ति की बजाये टीम के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए. लेकिन इस खेल में कई खिलाड़ी ऐसे भी हैं जो टीम के बारे में न सोच कर सिर्फ अपने व्यक्तिगत रिकॉर्ड बनाने के लिए खेले हैं.

पेश है टॉप 5 सबसे स्वार्थी क्रिकेटरों के बारे में चर्चा –

ज्योफ्री बायकाट :
इस दिग्गज नाम को इस सूचि में देख कर शायद कई लोग चौंक जायेंगे लेकिन कुछ कारणों से वह इस सूची में शामिल हुए हैं. बायकाट अपने क्रिकेट दिनों में स्वार्थी हो गए थे. वह बहुत धीमी गति से क्रिकेट खेलने लगे थे ताकि वह खुद के लिए एक बड़ा स्कोर कर सके. इस कारण कई मौकों पर इंग्लैंड कई मैच हार भी चुका है. दरअसल, बॉयकॉट को एक टेस्ट के बाद 1967 में हटा दिया गया था जहाँ उन्होंने नाबाद 246 रन बनाए थे, इसके पीछे कारण यही था कि वह बहुत ज्यादा स्वार्थी हो गए थे और टीम के लिए खेलने की बजाये अपने बारे में सोचते हुए बहुत धीरे से स्कोरिंग कर रहे थे.

शाहिद अफरीदी :
पाकिस्तान के खिलाड़ी शाहिद अफरीदी का नाम भी इस सूची में शुमार है. अपने करियर के दौरान अफरीदी अपने अहंकार संबंधित कारणों के लिए अपने पाकिस्तानी टीम के साथियों के साथ कई बार झगड़े में शामिल हो गए थे.

रिचर्ड हैडली :
न्यूज़ीलैंड के इस खिलाड़ी ने भी अपनी टीम के हित के बारे में न सोचते हुए अपने रिकॉर्ड और आंकड़ों को ज्यादा तवज्जो दिया. अपने करियर के अंत में इन्हे अपनी ऊर्जा बचाते हुए अपने रन अप छोटा करने के लिए आलोचना का सामना भी करना पड़ा था.

शिवनारायण चंद्रपाल :
वेस्टइंडीज के मध्यक्रम के बल्लेबाज के तौर पर यह खिलाड़ी अपनी टीम के लिए उच्चतम रन स्कोरर में से एक था. वह खुद नोट आउट रहने के लिए ज्यादातर आमतौर पर अंतिम बल्लेबाज़ों के साथ बल्लेबाजी करते थे और महत्वपूर्ण गेंदबाजों का सामना करने के लिए उन बल्लेबाज़ों को आगे कर दिया करते थे ताकि खुद नोट आउट रह सके. अतीत में उनसे इस मामले के बारे में पूछताछ भी की गई थी.

सुनील गावस्कर :
टीम की क्या स्थिति है इसे नज़रअंदाज़ करते हुए रन बनाने में सुस्ती के चलते इन्हे भी आलोचना का सामना करना पड़ा था. सबसे चौंकाने वाली घटना भारत और इंग्लैंड के बीच विश्व कप मैच में हुई थी जब भारत को 60 ओवर में 334 रन बनाने थे. उस दौर में ये इतना आसान नहीं था. एक विशाल स्कोर का पीछा करते हुए गावस्कर ने क्रीज पर सेट होने के लिए बहुत अधिक समय लिया. उन्होंने 176 गेंदों पर मात्र 36 रन ही बनाए थे. तब भारत के मैनेजर जीएस रामचंद ने कहा था कि “यह सबसे शर्मनाक और स्वार्थी प्रदर्शन था”.

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