देश में कई मुद्दे उठे है और मीडिया द्वारा उन्हेंकाफी तवज्जो दी गई है लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है, जब देश के खिलाडि़यों से किसी मुद्दे पर इतनी तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हों। इस समय पूरे देश में जेएनयू का मुद्दा छाया हुआ है वहां पर लगाए गए देश विरोधी नारों के बारे में चर्चा जोरों पर है। कोई इसे गलत तो कोई सही बता रहा है। हमारे देश के कुछ खिलाड़ी है भी जिनसे रहा नहीं गया और उन्होंने इस मामले पर अपने विचार खुलकर सबके सामने रख दिए हैं।

इन्ही खिलाडि़यों में से एक है योगेश्‍वर दत्त जिन्होंने अपनी भावनाओं को सोशल प्लेटफार्म पर कुरेद कर रख दिया। योगेश्वर दत्त एक भारतीय कुश्ती खिलाड़ी हैं। इन्होंने 2012 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। जब वो देश के लिए खेलते है तो उनका लहू आज भी पसीने के रूप में उनके शरीर से बहता हुआ देखा जा सकता है। योगेश्वर ने देश के लोगों से पूछा है कि अफजल को अगर शहीद कहते हो तो हनुमनथप्पा क्या कहलाएगा?

योगेश्वर देश के लोगों एक सीधा सवाल किया है, कि आप कैसे हमारे खून-पसीने की मेहनत को किसी ऐसे व्यक्ति के बराबर लाकर खड़ा कर सकते हैं जिसने लोगों की हत्याये की है, देश के खिलाफ साजिश रची है। अफजल को शहीद बताकर आप ना केवल उन सैनिकों का अपमान कर रहे हैं जो ऐसे मौसम में भी खड़े रहते है जहां सांस लेते ना लेते ना बने बल्कि उन खिलाडि़यों का भी जो तिरंगे को ऊपर देखने के लिए अपनी जिंदगी भर पसीना बहाकर एक मेडल हासिल करने की कोशिश में लगे रहते हैं।

 

योगेश्वर ने जेएनयू की इस घटना को अपनी एक कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया है क्या इसे पढ़ने के बाद आप खुद निर्णय लीजिए कि इस खिलाड़ी ने सही लिखा है या गलत-

योगेश्वर दत्त की कविता
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गजनी का है तुम में खून भरा जो तुम अफजल का गुण गाते हों,
जिस देश में तुमने जनम लिया उसको दुश्मन बतलाते हो!
भाषा की कैसी आजादी जो तुम भारत मां का अपमान करो,
अभिव्यक्ति का ये कैसा रूप जो तुम देश की इज्जत नीलाम करो!
अफजल को अगर शहीद कहते हो तो हनुमनथप्पा क्या कहलायेगा,
कोई इनके रहनुमाओं का मजहब मुझको बतलायेगा!
अपनी मां से जंग करके ये कैसी सत्ता पाओगे,
जिस देश के तुम गुण गाते हो, वहां बस काफिर कहलाओगे!
हम तो अफज़ल मारेंगे तुम अफजल फिर से पैदा कर लेना,
तुम जैसे नपुंसको पे भारी पड़ेगी ये भारत सेना!
तुम ललकारो और हम न आये ऐसे बुरे हालात नहीं
भारत को बर्बाद करो इतनी भी तुम्हारी औकात नहीं!
कलम पकड़ने वाले हाथों को बंदूक उठाना ना पड़ जाए,
अफजल के लिए लड़ने वाले कहीं हमारे हाथो न मर जाये!
भगत सिंह और आज़ाद की इस देश में कमी नहीं,
बस इक इंकलाब होना चाहिए,
इस देश को बर्बाद करने वाली हर आवाज दबनी चाहिए!
ये देश तुम्हारा है ये देश हमारा है, हम सब इसका सम्मान करें,
जिस मिट्टी पे हैं जनम लिया उसपे हम अभिमान करें! जय हिंद।

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