भारत जैसे देश में मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स जैसे खेल को बढ़ावा देना कोई आसान काम नहीं है, लेकिन ‘क्रॉसट्रेन फाइट क्लब’ के फाउंडर सिद्धार्थ सिंह ने इसे मुमकिन बनाया है.

सिद्धार्थ से हुई ख़ास बातचीत में उन्होंने हमे अपने सफ़र के बारे में बताया, और यह भी बताया कि वो किस तरह से कोशिश में लगे है, कि बाकी खेलों की तरह MMA भी भारत में लोकप्रिय हो सके.

सिद्धार्थ से हुई बात चीत में उन्होंने दिए हमारे सवालों के जवाब

आपने MMA शुरू कहाँ से किया और कैसे इस खेल में आपकी रूचि बनी?

सिद्धार्थ- सबसे पहले मैंने बॉक्सिंग शुरू किया जब मैं 12 साल का था, मेरी पढ़ाई दून स्कूल से हुई है और वही से मैंने अपना बॉक्सिंग का सफ़र शुरू किया. उसके बाद जब मैं इंग्लैंड में मास्टर्स की डीग्री के लिए गया तो वहाँ  मैंने किक बॉक्सिंग शुरू की, जिसे मुआय थाई कहते है, थाई किक बॉक्सिंग. उसके बाद लगभग 6 साल पहले मैंने जियो जित्सू शुरू किया जो कि एक बहुत अहम भाग है MMA रेसलिंग का. और अब मैं अपनी टीम के साथ क्रॉस ट्रेन फाइट क्लब चला रहा हूं 2012 से.

आपने MMA को अपने करियर के तौर पर चुना जबकि सभी लोग भारत में क्रिकेट को ही खेल में करियर के तौर पर चुनते है. आपको ऐसा क्या लगा जिसने आपको MMA चुनने पर मजबूर किया?

देखिये लोग MMA को करियर के तौर पर नहीं चुनते, वो तो सिर्फ इस खेल के प्रति अपने जूनून के लिए MMA का हिस्सा बनना चाहते है. उनका जूनून है UFC के प्रति, REEBOK जो कर रहा है UFC  के लिए उसके प्रति. और जितना इन लोगों को मैंने जाना है मुझे ऐसा लगा कि उन्हें यह खेल पसंद है, UFC  टीवी पर देखना और अगर उन्हें पसंद आयेगा तो ज़ाहिर सी बात है उनका मन करेगा वैसा ही कुछ करने का. हर खिलाड़ी का अपना एक विशेष खेल होता है और हमारे लिए यह MMA है.

Siddharth Singh Practicing
Siddharth Singh Practicing

आपके लिए यह सफ़र कितना मुश्किल रहा क्यूंकि इस खेल के बारे में न तो किसी ने सुना था और न ही कभी देखा था ?

हमारा सफ़र बहुत मुश्किल था क्यूंकि जब हमने शुरुआत की2012 में तब किसी को भी नहीं पता था कि MMA आख़िर है क्या, कुछ ही लोगों को इस खेल के बारे में जानकारी थी. इंडिया वापस लौटने से पहले मैंने काफी सर्वे किये ऑनलाइन यह जानने के लिए की क्या भारत में लोग इस खेल के बारे में जानते है, या फिर इस खेल को सीखना चाहते है. मुझे इस विषय को समझने के लिए 2 सालों का वक्त लगा और मैंने यह तय किया कि मैं इंडिया में जा कर लोगों को इस खेल के बारे में समझाऊ और उन्हें यह सीखने में मदद करू. इतना वक्त मुझे इसलिए लगा क्योंकी मैं नहीं जनता था कि क्या लोग इसे सीखना चाहेंगे लेकिन हम लोग अभी तक यहाँ बने हुए है, मतलब लोग अभी भी सीखना चाहते है और समय के साथ साथ इस खेल की लोकप्रियता भी इंडिया में बढ़ रही है.

कुछ लोग टीवी पर देखकर बगैर मान्यता प्राप्त किये, MMA स्कूल खोल रहे है जो कि बेहद ही खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि अगर इस खेल की बारीकियां ठीक से न समझाई जाये तो इसमें आपकी जान भी जा सकती है.

आपके लिए जब आपने यह खेल खेलना शुरू किया आपका आइडल उस समय कौन था?

जब मैंने बॉक्सिंग शुरू की उस समय मेरे एक ही आइडल थे माइक टायसन, लेकिन उम्र  के साथ साथ आपके आइडल भी बदलते रहते है और जब मैंने मुआय थाई शुरू किया तब मेरे आइडल थे  टायिरोंन स्पोंग. लेकिन हाल ही में ब्राज़ीलियाई जियो जित्सू में मारसेअलो गार्सिया हिक्सन ग्रेसी जैसे दिग्गज मेरे आइडल है.

आपका जो क्लब है क्रॉस ट्रेन फाइट क्लब वहाँ पर कितने ट्रेनर्स है और क्या आपका यह फाइट क्लब किसी सरकारी संस्था से मान्यता प्राप्त वाला क्लब है?

सिद्धार्थ- हमारे क्लब में 12 ट्रेनर्स है, जिसमे 80% ट्रेनर्स पहले हमारे यहाँ के स्टूडेंट्स थे, वो लोग आये और सीखने के बाद हमारे साथ ही जुड़ गये और वो सब लोग भी क्लब में MMA सीखाते है. मुआय थाई का सर्टिफिकेशन अलग है और हम लोग इकलौते ऐसे क्लब है, भारत में जहाँ एक ब्राज़ील का ब्लैक बेल्ट जियो जित्सू ट्रेनर ट्रेनिंग देता है, जो कि इटली से है. इसके अलावा बॉक्सिंग के ट्रेनर्स हमारे यहाँ नेशनल लेवल के बाक्सर्स है,  मुआय थाई के वर्ल्ड मुआय ब्रांड फेडरेशन से मान्यता प्राप्त ट्रेनर्स है. सभी ट्रेनर्स सर्टिफाइड है कोई भी ऐसा नहीं है जो सर्टिफाइड न हो.

जहाँ  तक सरकारी मान्यता की बात है, तो ऑल इंडिया मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स एसोशिएशन से हमारा क्रॉस ट्रेन फाइट क्लब मान्यता प्राप्त है, और यह ही इस खेल की देख रेख करती है. हमे मिनिस्ट्री ऑफ यूथ एंड स्पोर्ट्स से मान्यता प्राप्त है.

 

भारत जैसे देश में जहाँ  क्रिकेट के अलावा लोगों को कोई और खेल नज़र ही नहीं आता. तो आप किस तरह से MMA को भारत में लोगों के बीच लाने का प्रयास कर रहे है.

सिद्धार्थ-  देखिये भारत में हर कोई क्रिकेट का बहुत बड़ा फैन है, और मैं खुद भी क्रिकेट को बहुत अच्छे से फॉलो करता हूं. क्रिकेट से आप भारत में किसी भी खेल की तुलना नहीं कर सकते. लेकिन हाँ धीरे-धीरे हम लोग कोशिश कर रहे है और लोग भी अपनी दिलचस्पी इस खेल में दिखा रहे है. लेकिन इसे बड़े स्तर पर ले जाने के लिए हमे बड़ी ब्रांड्स का साथ चाहिए जैसे REEBOK और MMA जो कि हमे मिल भी रहा है और यह खेल अपने स्तर पर ज़रूर भारत में आगे बढ़ेगा.

 

 

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    सभी खेलों में दिलचस्पी है लेकिन सबसे पसंदीदा खेल क्रिकेट, पसंदीदा खिलाड़ी विराट कोहली और नोवाक जोकोविच.

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