विजेंद्र सिंह ने किया पेशेवर मुक्केबाजी करियर की शुरुआत - Sportzwiki
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विजेंद्र सिंह ने किया पेशेवर मुक्केबाजी करियर की शुरुआत

  • भारत के सबसे सफल मुक्केबाजो में से एक विजेंद्र सिंह अब अपने पेशेवर मुक्केबाजी करियर की शुरुआत करने जा रहे है.

    बाक्सनेशन को दिये अपने एक इंटरव्यू में विजेंद्र ने कहा वो ब्रिटेन से अपने पेशेवर मुक्केबाजी करियर की शुरुआत करने जा रहे है, इसके साथ ही उन्होंने बाकी अन्य चीजो पर भी जमकर चर्चा किया.

    जब उनसे यह पूछा गया की वो अपने पेशेवर करियर की शुरुआत ब्रिटेन से ही क्यों करना चाहते है, तो इस सवाल पर इस मुक्केबाज ने बहुत ही खुबसुरत जबाब देते हुए कहा, कि ब्रिटेन मुक्केबाजो का मक्का है, और आमिर खान इस मामले में मेरे आदर्श है.

    जब उनसे यह पूछा गया, कि ओलम्पिक 2016 में जल्द ही शुरू होने वाला है, और आप ओलम्पिक में गोल्ड मेडल जितने के बजाय पेशेवर मुक्केबाजी में क्यों जाना चाहते है, इस सवाल के जबाब में विजेंद्र ने एक बार फिर बहुत ही चलाकी से अपना बचाव करते हुए कहा, कि “ओलम्पिक में भारत का लगातार 3 बार प्रतिनिधित्व करने वाला मै अकेला भारतीय मुक्केबाज हूँ, अब भारत में ओलम्पिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए काफी करने के लिए काफी मुक्केबाज आ चुके है, लेकिन पेशेवर मुक्केबाजी में कोई नहीं है, तो वहाँ भी कोई होना चाहिए.”

     साथ ही उन्होंने यह बात भी स्वीकार किया कि वो मैनचेस्टर (इंग्लैंड) में ली बेयर्ड के साथ अपनी ट्रेनिंग शुरू होने से पहले अपने परिवार के पास जाने की सोच रहे है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा, कि

    “यह मेरे प्रसंशको के लिए अच्छी खबर है, मै जब ब्रिटेन या अन्य देशो में जब फाइट करते हुए दिखूंगा तो यह देखना उनके लिए काफी रोमांचक होगा.”

    हालाँकि विजेंद्र प्रोफेशनल बॉक्सिंग चुनने वाले उम्रदराज खिलाड़ियों में से एक है, लेकिन उनका दावा है, कि इस खेल पर उम्र का कोई असर नहीं पड़ता है, यह सिर्फ कड़ी मेहनत और अच्छी तकनीक पर निर्भर करती है, और मुझे विश्वास है, कि मै इसमें सक्षम हूँ.

    हालाँकि विजेंद्र ने यह भी माना कि अभी उन्होंने यह फैसला नहीं किया है, कि वो किस ग्रुप में मुक्केबाजी करेंगे, लेकिन अभी फ़िलहाल वो मध्यम ग्रुप (70.5 किलोग्राम से 72.5 किलोग्राम) वर्ग को चुनेंगे.

    जब विजेंद्र से शौकिया और पेशेवर मुक्केबाजी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, कि “शौकिया मुक्केबाजी में आपको अपने कदमो पर काम करना होता है, जबकि पेशेवर मुक्केबाजी में आपको अपने शरीर और तकनीक पर काम करना होता है. क्यूंकि इसमें सामने वाले को मारने के लिए आपको सही समय की जरूरत होती है.”

    sw
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