रियो डी जनेरियो, 16 अगस्त (आईएएनएस)| ब्राजील के सबसे बड़े महानगर में जारी 31वें ओलम्पिक खेलों के 11वें प्रतिस्पर्धी दिन की समाप्ति के बाद भी भारत की पदकों की तलाश जारी है। सोमवार (भारत में मंगलवार) को अंतिम पहर में जहां पीवी सिंधु ने बैडमिंटन की महिला एकल स्पर्धा के क्वार्टर फाइनल में पहुंचकर पदक की उम्मीद जिंदा रखी है वहीं मुक्केबाजी में विकास कृष्ण और चक्का फेंक में सीमा पूनिया को हार मिली। सबसे पहले बात सिंधु की।

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विश्व चैम्पियनशिप में दो बार कांस्य जीत चुकीं सिंधु ने चीनी ताइपे की खिलाड़ी ताई जू यिंग को सीधे गेम में हराया। महिला वर्ग में भारत की एकमात्र उम्मीद सिंधु ने रियोसेंट्रो पवेलियन में आयोजित यह मैच 21-13, 21-15 से जीता। यह मैच 40 मिनट चला।

सोमवार को हुए इस पहले ताई और सिंधु के बीच कुल छह मैच हुए थे, जिनमें से चार में ताई ने जीत हासिल की थी लेकिन अहम पड़ाव पर सिंधु ने बाजी मारते हुए भारत के लिए बैडमिंटन में पदक की उम्मीदें जिंदा रखीं।

क्वार्टर फाइनल में हालांकि जीत के लिए सिंधु को अपना पूरा दमखम लगाना होगा क्योंकि सामना चीन की यिहान वांग से होगा, जो लंदन ओलम्पिक में एकल वर्ग का रजत जीत चुकी हैं। साथ ही वह एशियाई चैम्पियन भी हैं और 2011 विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण हासिल कर चुकी हैं।

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दुनिया की नम्बर-2 खिलाड़ी वांग से होने वाले अपने अगले मुकाबले को लेकर सिंधु ने कहा, “मैं हर चीज को लेकर चौकन्नी थी। मैं किसी एक खास रणनीति के तहत नहीं खेल रही थी। मेरा अगल मैच वांग के खिलाफ है और मुझे हर लिहाज से चौकन्ना रहना होगा। वैसे मुझे उम्मीद है कि मैं वांग को हराने में सफल होऊंगी। “

सिंधु ने यह भी कहा कि वांग के खिलाफ वह अपना बेहतरीन खेल दिखाएंगी। वांग से कैसे भिड़ना है, इस सम्बंध में मैं अपने कोच से विचार-विमर्श करूंगी। मैंने वांग के खिलाफ काफी खेला है लेकिन अंतिम मैच हुए काफी अरसा गुजर गया है।

मुक्केबाजी में विकास क्वार्टर फाइनल में हार मिली। हार के बाद विकास ने देशवासियों से माफी मांगी है। इसके साथ रियो ओलम्पिक में मुक्केबाजी में भारत की चुनौती समाप्त हो गई है। भारत के शिवा थापा और मनोज कुमार पहले ही हार चुके हैं। थापा तो पहले ही दौर में हारे थे जबकि मनोज को दूसरे दौर में हार मिली।

विकास को सोमवार को 75 किलोग्राम वर्ग में 2015 में विश्व चैम्पियनशिप में रजत पदक जीत चुके उजबेकिस्तान के बेकतेमीर मेलीकुजीव ने 3-0 से हराया। मनोज यह मैच 27-30, 26-30, 26-30 से हारे।

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24 साल के विकास ने हालांकि 20 साल के बेहद प्रतिभाशाली बेकतेमीर को कड़ी चुनौती दी लेकिन जज-बी की नजर में वह बेहतर मुक्केबाज साबित नहीं हुए। इस जज मार्सेला पाउला सोजा ने उन्हें दो बार 8-8 अंक दिए।

विकास ने राउंड-1 में 9, 9, 9 अंक हासिल किए जबकि राउंड-2 में 9, 8, 8 अंक की प्राप्त हुए। तीसरे राउंड में फिर से विकास को 9, 9, 9 अंक मिले लेकिन उजबेक मुक्केबाज को तीन राउंड में तीनों जजों ने 10-10 दिए।

मुकाबले के बाद विकास ने कहा, “मैंने सोचा था कि देश को 15 अगस्त के मौके पर पदक का तोहफा दूंगा लेकिन मैं ऐसा कर नहीं सका। मुक्केबाज महासंघ पर प्रतिबंध के कारण हम इस साल बाहर जाकर अभ्यास नहीं कर सके लेकिन इसके बावजूद मैं किसी और को जिम्मेदार नहीं ठहरा रहा। मैं माफी चाहूंगा कि मैं जीत नहीं सका।”

विकास ने कहा कि पहले राउंड में उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया था लेकिन जजों ने उजबेक मुक्केबाज का साथ दिया, जिससे कि उन पर काफी नकारात्मक मानसिक असर पड़ा।

बकौल विकास, “पहला राउंड के बाद मुझे लगा था कि यह राउंड मेरा होना चाहिए था। हमने लगभग एक समान स्कोर किया था लेकिन पहला राउंड उसे दे दिया गया। इसके बाद मैं अपने खेल में सुधार नहीं कर सका। इसके बावजूद मैं अपनी क्षमता तक लड़ा।”

चक्का फेक एथलीट सीमा इस स्पर्धा के फाइनल में भी जगह नहीं बना सकीं। क्वालीफाईंग के ग्रुप-बी में सीमा ने नौवां और कुल 20वां स्थान हासिल किया। सीमा ने 57.58 मीटर की दूरी नापी जबकि क्वालीफाई करने के लिए 62 मीटर चक्का फेकना जरूरी था।

सीमा अगर दोनों ग्रुपों से बने वरीयता क्रम में 12वें स्थान पर भी आती तो वह फाइनल के लिए क्वालीफाई कर सकती थीं।

सीमा ने ओलम्पिक स्टेडियम में अपने पहले प्रयास में 57.58 मीटर की दूरी नापी। दूसरे प्रयास में वह अयोग्य करार दी गईं जबकि तीसरे प्रयास में सीमा ने 56.78 की दूरी नापी।

फाइनल के लिए क्वालीफाई करने वाली 12 एथलीटों में 8 ऐसी हैं, जिन्होंने 62 मीटर के स्वत: क्वालीफाईंग सीमा को पार किया है जबकि चार ऐसी है, जिन्होंने अधिकतम दूरी नापी है।

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इन चार एथलीटों में सिर्फ एक ही ग्रुप-बी से है जबकि तीन ग्रुप ए से हैं। ऐसे में अगर सीमा अपना व्यक्तिगत 62.62 मीटर की दूरी नापतीं तो वह फाइनल में पहुंच सकती थीं।

एशियाई चैम्पियन सीमा अपने व्यक्तिगत श्रेष्ठ प्रदर्शन से काफी दूर रहीं। यहां तक की वह लंदन ओलम्पिक के अपने 61.91 मीटर से भी काफी पीछे रहीं। लंदन में वह 13वें स्थान पर थीं।

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