सौरव गांगुली इस पल को मानते हैं अपने जीवन का सबसे खास पल

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डेब्यू मैच रहा सबसे ख़ास, नहीं था मन में किसी प्रकार का डर: सौरव गांगुली 

डेब्यू मैच रहा सबसे ख़ास, नहीं था मन में किसी प्रकार का डर: सौरव गांगुली

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज कप्तान सौरव गांगुली का देश की क्रिकेट टीम के लिए जबरदस्त योगदान रहा है। सौरव गांगुली ने अपने करियर में भारतीय टीम के एक कप्तान, एक बल्लेबाज के रूप में जो योगदान दिया है वो कभी भूले से नहीं भुलाया जा सकता है। इसके बाद अब सौरव गांगुली भारतीय क्रिकेट में प्रशासक के रूप में अपना रोल निभा रहे हैं।

सौरव गांगुली अपने करियर में इस पल को मानते हैं खास

सौरव गांगुली का करियर बड़ा ही जबरदस्त रहा है जिसमें उन्होंने अपने करियर के आगाज से लेकर अंजाम तक चर्चा में रहे। मौजूदा समय में बीसीसीआई के अध्यक्ष के रूप में भारतीय क्रिकेट में सेवाएं दे रहे सौरव गांगुली के करियर में कई खास पल रहे।

डेब्यू मैच रहा सबसे ख़ास, नहीं था मन में किसी प्रकार का डर: सौरव गांगुली 1

भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के इन खास पलों की बात करें तो वैसे तो हमारे जेहन में अलग-अलग हो सकते हैं लेकिन खुद सौरव गांगुली इन खास पलों में अपने डेब्यू टेस्ट मैच में लगाए गए शतक को मानते हैं।

डेब्यू मैच रहा खास, नहीं था उस मैच में मन में कोई डर

सौरव गांगुली ने अपने डेब्यू मैच में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में 131 रन की पारी खेल मैच को ड्रॉ कराने में खास भूमिका अदा की थी। उसी पल को याद करते हुए दादा ने इंडिया टूडे के साथ इंस्पिरेशन कार्यक्रम में कहा कि

डेब्यू मैच रहा सबसे ख़ास, नहीं था मन में किसी प्रकार का डर: सौरव गांगुली 2

उस समय मेरे दिमाग में कोई डर नहीं था। मैं बस मैदान में जाकर खेलना चाहता था। इस मैच से पहले वार्म अप मैच की पहली पारी में मैं डक पर आउट हुआ तो दूसरे पारी में 70 रन बनाए थे। सीरीज में मैं और बेहतर खेल रहा था।”

सौरव गांगुली अपने करियर में कई बार किए गए थे ड्रॉप

भारतीय क्रिकेट के लिए सौरव गांगुली का करियर जबरदस्त रहा लेकिन साथ ही उन्होंने इस दौरान उतार-चढ़ाव का भी सामना किया। भारत के लिए 2001 से 2005 तक कप्तानी करने वाले सौरव गांगुली की अपने 16 साल के करियर के दौरान कई बार अंदर-बाहर का खेल चला।

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वैसे दादा ने 1992 में टीम में जगह बना ली थी लेकिन तभी उन्हें ड्रॉप किया गया था। जिसके बाद साल 2005 में कप्तानी से हटने के तुरंत बाद ही उन्हें फिर से टीम से बाहर निकाला लेकिन 2007 में गांगुली ने वापसी की और अपने टेस्ट करियर की सबसे बड़ी पारी खेली। जिसके बाद उन्होंने संन्यास ले लिया।

 

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