ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जीत दिलाने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले इन तीन खिलाड़ियों ने गरीबी की वजह से केवल पानी पी कर गुजारी हैं कई रातें | Sportzwiki Hindi

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ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जीत दिलाने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले इन तीन खिलाड़ियों ने गरीबी की वजह से केवल पानी पी कर गुजारी हैं कई रातें 

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जीत दिलाने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले इन तीन खिलाड़ियों ने गरीबी की वजह से केवल पानी पी कर गुजारी हैं कई रातें

भारत ने ऑस्ट्रेलिया को रविवार को खेले गये मुकाबले में 26 रनों से जीत दर्ज की. इस मैच में हार्दिक पंड्या, महेंद्र सिंह धोनी और भुवनेश्वर कुमार जीत के असल हीरो रहे. इन तीनो की ही बल्लेबाजी के कारण भारत एक सम्मानजनक स्कोर बनाने में सफल हुआ. इन भारतीय खिलाड़ियों ने यहाँ तक पहुँचने के लिए कड़ी मसक्कत की है. ये खिलाड़ी कभी इतने गरीब हुआ करते थे कि एक समय का खाना भी नसीब नही होता था.

आइये डालते हैं पांच खिलाड़ियों की पूर्व स्थिति पर नजर-

हार्दिक पंड्या-

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हार्दिक पंड्या और उनके भाई कुनाल पंडया का बचपन बड़ी ही तंगहाली में गुजरा है. हार्दिक के पिता एक प्राइवेट नौकरी करते थे. ऐसे में घर की आर्थिक स्‍थिति अच्‍छी नहीं थी. हार्दिक के घर में आमदनी क जरिया सिर्फ उनके पिता की सैलरी थी.

बाद में जब पिता ने भी नौकरी छोड़ दी तो घर में खाना खाने के पैसे तक नहीं होते थे. कई बार एक बार का खाना भी बड़ी मुश्‍किल से नसीब होता था. हार्दिक को पूर्व क्रिकेटर किरण मोरे ने ट्रेनिंग दी है. उन्होंने इस दौरान हार्दिक से तीन साल कोई फीस नही ली. यहीं से पंड्या ने क्रिकेट कौशल सीख नाम कमाया.

महेंद्र सिंह धोनी-

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फिल्‍म एम एस धोनी ए अनटोल्‍ड स्‍टोरी में कई लोग भारतीय टीम के सबसे कामयाब कप्‍तान के संघर्ष की कहानी से वाकिफ हो चुके हैं. एक मामूली नौकरी करने वाले धोनी के पिता पान सिंह उनके क्रिकेटर बनने के इरादे से कोई खास खुश नहीं थे. कैप्‍टन कूल कहे जाने वाले माही ने कामयाबी से पहले ट्रेन टिकट एग्‍जामिनर यानि टीटीई की नौकरी की है. उस वक्‍त उनके घर की हालत काफी अच्‍छी नहीं थी. धोनी का परिवार दो कमरों के क्‍वॉर्टर में रहता था.

भुवनेश्वर कुमार-

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उत्‍तर प्रदेश में मेरठ के पास एक गांव के रहने वाले वाले हैं तेज गेंदबाज भुवनेश्‍वर कुमार. सब इंस्‍पेक्‍टर पिता के बेटे भुवी के पास आर्थिक समस्‍याओं के चलते क्रिकेट क्‍लब में शामिल होना आसान नहीं था. एक वक्‍त में उनके पास खेलने के लिए ढंग के स्‍पोर्टस शूज भी नहीं हुआ करते थे.

वो इस मुकाम तक ना पहुंच पाते अगर उनकी बहन ने उनकी मदद ना की होती. उनको पहचान 2008 और 2009 के दौरान रणजी ट्रॉफी के लिए खेले गए एक मैच से मिली, जब उन्‍होंने सचिन तेंदुलकर को शून्‍य पर आउट किया और मैन ऑफ द मैच का खिताब जीता.

रविन्द्र जड़ेजा-

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सर जडेजा के नाम से मशहूर अब एक ऑलराउंडर बन चुके क्रिकेटर रवींद्र जडेजा के लिए भी जिंदगी फूलों का बिछौना नहीं रही है. उनके पिता एक शिपिंग कंपनी के कांप्‍लेक्‍स में सिक्‍योरिटी गार्ड थे और वो आर्थिक परेशानियों से जूझते हुए इस मुकाम पर पहुंचे हैं. उस पर भी महज 17 साल की उम्र में जडेजा ने अपनी मां को खो दिया था.

उमेश यादव-

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विदर्भ की ओर से खेलते हुए भारतीय क्रिकेट टीम में शामिल होने वाले उमेश यादव पहले क्रिकेटर हैं. उमेश के पिता एक कोयला खान मजदूर थे और उनका बचपन नागपुर के कोयला मजदूरों के गांव में बीता है.

2007 से पहले उमेश टेनिस बॉल से ही क्रिकेट खेला करते थे. भारतीय टीम में शामिल होने से पहले उमेश ने पुलिस की नौकरी के लिए भी आवेदन किया था.

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