ये है वो दिग्गज क्रिकेटर जिनको कप्तान बनाना था देश के लिए सबसे बड़ी भूल, टॉप पर दिग्गज भारतीय खिलाड़ी

prashant / 21 October 2017

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में 11 खिलाड़ियों से सजी टीम का प्रतिनिधित्व करना कोई मामूली सा खेल नही है. कप्तानी के लिए किसी के लिए भी  एक लीडरशिप क्षमता होनी चाहिए. कप्तानी करने के लिए दबाव में बेहतर करने की काबिलियत और मानसिक स्थिरता की आवश्यकता होती है.

कई खिलाड़ियों ने बेहतरीन कप्तानी से मन मोहा है तो कई खिलाड़ी ऐसे रहे जो कप्तानी का बोझ नही उठा पाए. ऐसे खिलाड़ी व्यक्तिगत तौर पर तो बेहतरीन रहे. मगर जब बात टीम को जिताने की आई या टीम को आगे ले जाने की आई तो वह या तो पीछे हट गये या वह टीम को गर्त में ले गये. आज हम ऐसे ही 5 खिलाड़ियों की बात करेंगे, जिन्होंने मैदान पर अपने प्रदर्शन से तो खूब झंडे गाड़े मगर जब बात टीम की आई तो वह सबसे बेकार कप्तान साबित हुए.

5. हाशिम अमला-

हासिम अमला को बेहतरीन खिलाड़ी मन जाता है. न जाने वह कितने बार टीम को संकट से उबार कर विजयी बनाने में कामयाब रहे, मगर हाशिम अमला एक बेहतर कप्तान साबित नही हो पाए.

हाशिम अमला को 2014 में ग्रीम स्मिथ के संन्यास लेने के बाद कप्तान बनाया गया. यह बेहद चुनौती भरा था क्योंकि वह एक ऐसे खिलाड़ी की जगह ले रहे थे जिसने अफ्रीका के 100 से अधिक मुकाबलों (109) का प्रतिनिधित्व किया था.

अमला ने शुरुआत में तो अपने घर में श्रीलंका, जिम्बाबे और वेस्टइंडीज को हराया. मगर असली चुनौती तब आई जब वह भारत दौरे पर आए, यहाँ उन्होंने 3-0 से सीरीज गंवाई यही हाल उनका इंग्लैंड में भी हुआ इसके बाद  उन्होंने कप्तानी छोड़ दी.

4. एंड्रू फ़्लिंटॉफ़-

इंग्लैंड के खिलाड़ी एंड्रू फ़्लिंटॉफ़ अपने समय के सबसे बेहतरीन आल राउंडर खिलाड़ियों में से एक थे. हालांकि, उन्होंने चोंटो से जूझते हुए जल्द ही क्रिकेट से सन्यास ले लिया लेकिन इतने ही समय में वह इंग्लैंड के कप्तान भी बना दिए गये.

2006 भारत दौरे पर आई टीम में उन्होंने अपनी कप्तानी से सभी को वाहवाह करने पर मजबूर कर दिया, जब मुंबई में हुआ तीसरा टेस्ट जितवाया, लेकिन वह वनडे सीरीज में ऐसा प्रदर्शन करने में नाकाम रहे. इसके बाद 2006 की एशेज सीरीज में टीम की बुरी हार हुई. जिस कारण उन्हें तमाम आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. उन्होने इंग्लैंड के 11 मैचों में कप्तानी की जिसमे केवल 2 ही जिता सके. 7 मैचों में टीम की हार हुई

3. क्रिस गेल-

क्रिस गेल को सबसे खतरनाक बल्लेबाजी और लम्बे लम्बे छक्कों के लिए जाना जाता है. ब्रायन लारा के संन्यास ले लेने के बाद गेल को टीम की कप्तानी दी गयी. वह जिस तरह की बल्लेबाजी करते हैं उसके बाद लोगों को उम्मीद थी कि वह कप्तानी में भी कमाल करेंगे. मगर हुआ बिल्कुल उल्टा .

उनकी कप्तानी में न केवल टीम की लुटिया डूबी बल्कि वह खुद बल्लेबाजी में जूझने लगे. उन्होंने वेस्ट इंडीज के लिए 53 मैचों में कप्तानी की इस दौरान टीम केवल 17 बार ही जीतने में सफल हुई, जबकि 30 मैचों में हार का सामना करना पड़ा.

2. ब्रायन लारा-

 

ब्रायन लारा की गिनती महानतम खिलाड़ियों में होती है. उन्होंने वेस्टइंडीज टीम की 9 साल 1997-2006 तक कप्तानी की. मगर जिन रेकॉर्डों के वे धनी हैं वैसा रिकॉर्ड अपनी टीम को दिलाने में नाकाम रहे. लारा ने 47 टेस्ट मैचों में कप्तानी की जिसमे वह टीम को केवल 10 मैच्चों में ही जीत दिला पाए.

हालंकि, लारा दुनिया के एक मात्र कप्तान हैं जिन्होंने अपनी टीम की नाकामियों को अपने ऊपर हावी नही होने दिया.

1.सचिन तेंदुलकर-

 

सचिन तेंदुलकर क्रिकेट जगत में सबसे बड़े खिलाड़ी हैं. चाहें टेस्ट हो या वनडे वह सभी में कमाल के खिलाड़ी रहे हैं. उन्होंने भारतीय टीम की दो बार कप्तानी की. एक बार सन 1996 में, इस कप्तानी में वह ऐसा कोई कमाल नही दिखा पाए जिसमे वह सराहे जा सकें. दूसरी बार उन्हें मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी के बाद टीम संभालने की जिम्मेदारी दी गयी.

सचिन तेंदुलकर जब कप्तान बने तब भारतीय टीम 1999-2000 में ऑस्ट्रेलिया गयी जहां से टीम बुरी तरह हार के आई. भारत के लिए उन्होंने 25 टेस्ट में कप्तानी की जिसमे केवल 4 में जीत मिली.