ये है वो 5 कारण जिसके वजह से जल्द होनी चाहिए महिला विश्वकप की शुरुआत 1

क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर रविवार(23 जुलाई) को भारत और इंग्लैंड के महिला टीम के बीच महिला विश्वकप का फाइनल मुक़ाबला खेला गया, इस मैच में मेजबान इंग्लैंड ने भारत को एक रोमांचक मुक़ाबले में 9 रनों से हराकर ख़िताब पर कब्ज़ा किया. भारत की टीम यह मैच जरुर हार गई, लेकिन पुरे टूर्नामेंट में जिस अंदाज़ में भारतीय टीम ने प्रदर्शन किया है, वे वाकई तारीफ़ के काबिल हैं.

भारतीय टीम टूर्नामेंट में अंदरडॉग मानी जा रही थी, लेकिन मिताली राज एंड कंपनी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए, टूर्नामेंट में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी बड़ी टीम को हराया. कप्तान मिताली राज ने मैच के बाद के प्रेस सम्मेलन में सुझाव दिया और कहा कि उनकी टीम दबाव में टूट गई और कहा कि यह इंडियन प्रीमियर लीग संस्करण को शुरू करने का सही समय है.

इस लेख में हम 5 कारण जानेगे आखिर क्यों बीसीसीआई को आईपीएल का महिला संस्करण जल्द ही शुरू करना चाहिए:-

5) महिला क्रिकेटरों को आर्थिक रूप से फ़ायदा होगा
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2005 महिला क्रिकेट विश्वकप के फाइनल में पहुंचने के बावजूद, भारतीय महिला क्रिकेटरों को अभी भी एक सभ्य आजीविका सुरक्षित करने के लिए आर्थिक रूप से संघर्ष करना पड़ा हैं, हालाँकि महिला विश्वकप 2017 में शानदार प्रदर्शन करने के बाद जल्द ही महिला फ्रंचाईजी बेस क्रिकेट की पहल तेजी से की जाने लगी हैं.

बिग बैश लीग और इंग्लिश टी-20 लीग ने हरमनप्रीत कौर और स्मृति मंधाना जैसे भारतीय क्रिकेटरों का ध्यान आकर्षित किया है. भारत खेल से जुड़ा हुआ देश है, हमारे स्टार क्रिकेटरों के लिए क्रिकेट लीग में निवेश करने के लिए फ्रेंचाइजी की कोई कमी नहीं होगी.

एक ए ग्रेड की महिला खिलाड़ी को बीसीसीआई से सालाना 15 लाख रूपए मिलते है, जोकि एक ग्रेड के पुरुष क्रिकेटरों की कमाई का सिर्फ 8 फ़ीसदी हैं. अन्तराष्ट्रीय क्रिकेट में महिला टीम के लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद महिला क्रिकेट से टीवी कमाई में भी वृद्धि हुई हैं.

मुख्य रूप से, यह पुरुष क्रिकेटरों की कमाई और महिला क्रिकेटरों की कमाई के बीच की खाई को कम कर देगा. दूसरे, यह अधिकांश क्रिकेटरों की वित्तीय स्थितियों का समाधान करेगा और इससे युवा लड़कियों के क्रिकेट ने अपने करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित मिलेगा.

4) भारतीय क्रिकेटरों की दबाव में खेलने की क्षमता में सुधार
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इंग्लैंड की विरुद्ध फाइनल में मिली हार का सबसे बड़ा कारण दवाब में स्तिथि में बल्लेबाजों का लचर प्रदर्शन रहा. अंतिम में ओवरों में भारतीय बल्लेबाज़ विश्वकप का दवाब झेलने भी नाकाम रही थी.

महेंद्र सिंह धोनी यह स्वीकार कर चुके है, कि आईपीएल के दौरान प्लेऑफ मुक़ाबले में प्रसंशको से भरे हुए  स्टेडियम में खेलने से युवा खिलाड़ी दवाब की स्तिथि के आदी बनते हैं.

आईपीएल जैसे बड़े फ्रंचाईजी लीग से बाकि अन्य खिलाड़ियों को भी बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा. अगले 4 वर्षो में भारत को 2 बड़े आईसीसी टूर्नामेंट खेलने है, ऐसे में महिला आईपीएल संस्करण महिला क्रिकेट की रूप रेखा बदल सकता हैं.

3) सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के खिलाफ खेलने का अवसर
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बीसीसीआई लगातार महिला क्रिकेट में सुधार की बात करता आया हैं, लेकिन अब भी भारतीय घरेलू सर्किट में खेला जाने वाले क्रिकेट की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय स्तर के बीच का अंतर बहुत बड़ा है. अगर कोई टी-20 लीग भारत में आयोजित होता है, तो इससे दुनियाभर की सर्वश्रेष्ठ महिला क्रिकेटरों के साथ भारत की महिला खिलाडियों को खेलने का मौका मिलेगा.

दिप्ती शर्मा या राजेश्वरी गायकवाड़ जैसे भारतीय होनहार खिलाडियों को मेग लैनिंग और सारा टेलर जैसे सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ काफ़ी फ़ायदा हो सकता हैं. यह अक्सर कहा जाता है, कि सबसे अच्छा बनने के लिए, आपको सर्वश्रेष्ठ के खिलाफ खेलना होगा.

आईपीएल से पुरुष क्रिकेट को काफ़ी फ़ायदा हुआ है. मुंबई इंडियंस टीम में जसप्रीत बुमराह जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी ने दिग्गज लसिथ मलिंगा से काफ़ी कुछ सिखा हैं. भारतीय महिला क्रिकेट अभी बहुत ही अनवरत अवस्था में है और उन्हें सही रणनीति के तहत चलाने की जरुरत है ताकि वे अपना निरंतर विकास जारी रख सकें.

2) सभी खिलाड़ियों की बिग-हिटिंग क्षमता में सुधार
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हरमनप्रीत कौर ने ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध सेमी-फाइनल अपनी बल्लेबाज़ी से बताया है, कि आखिर क्यूँ उन्हें विश्व की सबसे आक्रामक बल्लेबाजों में अंका जाता हैं. तथ्य यह भी है, कि कुछ महीने पहले महिला बिग बैश खेलने से कौर की बल्लेबाज़ी में आक्रमकता बड़ी हैं.

दुनियाभर में टी-20 लीग में खेलना एक खिलाड़ी की आक्रामक प्रवृत्ति को जागृत करता है और यह एक ऐसा क्षेत्र है, जहाँ भारतीय महिला क्रिकेटरों ने पिछले कुछ वर्षों में बेहद विकास किया है. यदि हम चाहते है, कि पूनम राउत और सुषमा वर्मा जैसे युवा खिलाड़ी अपनी इसी तरह की क्षमता कायम रखे, तो उन्हें टी-ट्वेंटी क्रिकेट से काफ़ी मदद मिल सकती हैं.

इसके अलावा, अगर वे एलीस पेरी और कैथरीन ब्रंट के खिलाफ नियमित रूप से ऐसा करने में सक्षम होते हैं, तो ये उन्हें दुनिया के सर्वश्रेठ खिलाड़ियों की सूची में शामिल करती हैं. अगला विश्वकप 2021 में न्यूज़ीलैण्ड में खेला जाएगा, यहाँ की बाउंड्री इंग्लैंड के मुक़ाबले छोटी होती है, ऐसे में टी-ट्वेंटी क्रिकेट से भारतीय खिलाड़ी आसानी बड़े शॉट लगाने में सक्षम होगी.

1) टी-20 क्रिकेट विश्वकप 2018 की तैयारी
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अगला महिला टी-ट्वेंटी विश्वकप नवम्बर-दिसम्बर 2018 में वेस्टइंडीज में खेला जाएगा. टी-ट्वेंटी विश्वकप में अब सिर्फ एक वर्ष से कुछ ही ज्यादा समय बाकि है, ऐसे में हमे इस विशेष प्रारूप में खुद को तैयार करना शुरू करना होगा.

भारत की टी-ट्वेंटी कप्तान हरमनप्रीत कौर के पास बड़े शॉट खेलने की क्षमता है, जोकि उनकी सबसे बड़ी ताकत भी हैं. दीप्ति शर्मा और पूनम राउत कैसी युवा खिलाडियों को टी-ट्वेंटी क्रिकेट में अपनी काबिलियत दिखाने के लिए एक बड़ा मंच मिलना चाहिए.

टी-20 एक पूरी तरह से अलग प्रारूप है और गुणवत्ता वाले विपक्षी खिलाड़ियों के खिलाफ़ भारतीय खिलाड़ियों को कुछ आवश्यक अभ्यास मिलेंगा. इससे महिला क्रिकेट को  कुछ और घरेलू प्रतिभा का पता लगाना भी मदद मिलेगी. भारतीय महिला क्रिकेट अब अपने उच्चतम स्तर पर है, और ऐसी लीग से उन्हें बहुत फायदा होगा.

तेज गेंदबाज़ झूलन गोस्वामी और मिताली राज अब अपने करियर के अंतिम चरण में हैं, ऐसे में महिला आईपीएल से इन खिलाड़ियों के प्रतिस्थापन आसानी से मिल सकता हैं.

I am Gautam Kumar a Cricket Adict, Always Willing to Write Cricket Article. Virat and Rohit are My Favourite Indian Player.