बीसीसीआई

पिछले करीब 3 महीनों से पूरा विश्व कोरोना वायरस से बुरी तरह से जूझ रहा है। कोरोना वायरस वैसे तो दिसंबर से ही अपनी दस्तक दे चुका था लेकिन फरवरी से ये वायरस पूरे विश्व भर में धीरे-धीरे फैल गया, जिसके बाद दुनिया के तमाम देश इस वायरस की चपेट में हैं। कोरोना वायरस का एक बड़ा प्रभाव क्रिकेट पर भी देखने को मिल रहा है।

कोरोना वायरस के कारण सभी देशों के क्रिकेट बोर्ड को बड़ा नुकसान

इन दिनों तो क्रिकेट की गतिविधियां पूरी तरह से ठप्प पड़ी हैं। इसी कारण से सभी देशों के क्रिकेट बोर्ड की कमाई पूरी तरह से रुकी हुई है। क्रिकेट से सभी देशों के साथ ही भारतीय क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई को भी खूब कमाई होती हैं।

कोरोना वायरस

लेकिन कोरोना के कहर के आगे किसी की एक नहीं चल रही है और दुनिया के तमाम बड़े-छोटे क्रिकेट बोर्ड के सामने वित्तीय संकट खड़ा हो गया है। जिसका बड़ा नुकसान बीसीसीआई को भी हो रहा है। बीसीसीआई को हाल के दिनों में कोई क्रिकेट ना होने से राजस्व का खासा नुकसान हुआ है।

बीसीसीआई को भी बड़ा नुकसान, बीसीसीआई अब भरपायी के लिए करेगी ये काम

आईपीएल नहीं होने की स्थिति में बीसीसीआई को करीब 4 हजार करोड़ का नुकसान होगा तो साथ ही अन्य सीरीज के भी रद्द होने का घाटा साफ तौर पर देखा जा सकता है। अब बीसीसीआई इस घाटे की भरपायी के लिए अलग काम करने जा रहा है जिसमें वो अब आईसीसी के टूर्नामेंट्स से ज्यादा द्विपक्षीय सीरीज खेलने का विचार कर रही है।

कोरोना वायरस से हुए नुकसान की भरपायी के लिए बीसीसीआई नहीं खेलेगी आईसीसी टूर्नामेंट! 1

बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष ने इस बात का इशारा किया है कि अब भारतीय टीम के लिए वो कोरोना वायरस के खत्म होने के बाद ज्यादातर द्विपक्षीय सीरीज का ही आयोजन करने की कोशिश करेंगे जिसमें ज्यादा कमाई होती है।

द्विपक्षीय सीरीज से है भरपायी करने की कोशिश

अरुण कुमार धूमल ने कहा कि “हम इस वायरस के कारण जो भी द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेल पा रहे हैं, उससे हमें नुकसान हो रहा है। अगर हम आईपीएल का आयोजन नहीं करवा पाते हैं, तो इससे 4 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा।

कोरोना वायरस से हुए नुकसान की भरपायी के लिए बीसीसीआई नहीं खेलेगी आईसीसी टूर्नामेंट! 2

अरुण कुमार ने आगे कहा कि

बीसीसीआई की प्राथमिकता क्रिकेटर्स की सुरक्षा और उनका स्वास्थ्य है। अगर कोई विंडो मिलती है तो हम आईपीएल का आयोजन करना पसंद करेंगे। पहले से ही आईसीसी का आठ साल का फ्यूचर टूर प्रोग्राम बना हुआ है। जो 2023 तक का है। इस महामारी के कारण इस समय सभी क्रिकेट बोर्ड संघर्ष कर रहे हैं। हर किसी के लिए जरूरी है कि वो इस समय बैठे और क्रिकेट को वापस लाने और वापसी की रणनीति बनाए। क्योंकि सभी बोर्ड नुकसान से जूझ रहे हैं और इससे हर कोई प्रभावित है। एक बार क्रिकेट शुरू हो जाए तो हम सभी बोर्ड से बात करेंगे। एक-दूसरे की मदद करेंगे और विश्व क्रिकेट को जीवित करेंगे।

आगे धूमल ने कहा कि

लगभग सभी बोर्ड वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं। ऐसे में निकट भविष्य में आईसीसी टूर्नामेंट्स में हिस्सा लेने के बजाय द्विपक्षीय सीरीज खेलने का विचार किया जाएगा। इससे आसानी से कोई भी क्रिकेट बोर्ड ज्यादा कमाई कर सकता है। अगर व्यक्तिगत क्रिकेट बोर्ड वित्तीय संकट से जूझेगा तो आईसीसी भी इससे प्रभावित होगा। ऐसा नहीं है कि आईसीसी अपने दम पर सभी क्रिकेट बोर्ड चलाता है और उनकी जरूरत पूरी करता है। अगर हम सभी हैं तो एक-दूसरे की मदद कर पाएंगे।”