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#FLASHBACK आज ही के दिन मिली थी 2011 विश्वकप की सबसे बड़ी जीत, जिसका जश्न फाइनल से ज्यादा मनाया गया था 

#FLASHBACK आज ही के दिन मिली थी 2011 विश्वकप की सबसे बड़ी जीत, जिसका जश्न फाइनल से ज्यादा मनाया गया था

30 मार्च, 2011 दिन बुधवार शायद ही किसी को याद हो, कि क्या हुआ था इस दिन. कुछ याद आया या नहीं….. चलिए हम आपको याद दिला देते हैं. भारतीय क्रिकेट के इतिहास में ऐसा करने वाली पहली टीम बनी तमिलनाडु, दिनेश कार्तिक ने निभाई अहम भूमिका

दरअसल यह वही दिन था, जब भारतीय टीम ने मोहाली के आइएस बिंद्रा, स्टेडियम में अपने कट्टर प्रतिद्वंदी पाकिस्तान को वनडे विश्व कप के सेमीफाइनल मुकाबलें में करारी मात दी थी. जी हाँ ! आज से ठीक 6 साल पहले भारतीय टीम ने पाकिस्तान को सेमीफाइनल में हरा विश्व कप के फाइनल में जगह बनाई थी.

यह मुकाबला बेहद ही रोमांचक और साँसे रोक देने वाला मुकाबला मोहाली के पीसीए, स्टेडियम में खेला गया था. जहाँ मेजबान भारतीय टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी का निर्णय किया था.

भारतीय टीम ने पहले खेलते हुए अपने 50 ओवर के खेल में 9 विकेट के नुकसान पर 260 रनों का स्कोर बनाया था. भारतीय टीम के लिए सलामी बल्लेबाज़ सचिन तेंदुलकर (85) और वीरेंद्र सहवाग (38) ने पहले विकेट के लिए ताबड़तोड़ 48 रन जोड़े थे. अपने आक्रामक अंदाज़ के लिए मशहुर वीरेंद्र सहवाग ने मैच के दूसरे ही ओवर में उमर गुल के एक ओवर में 5 चौके मार कर सेमीफाइनल जैसे बड़े मैच का आगाज किया थाक्रिकेट अपसेट- महान सचिन तेंदुलकर 2007 में इस निराशाजनक मैच के बाद बना चूके थे संन्यास का मन

टीम के लिए यूँ, तो सभी खिलाड़ियों ने छोटा छोटा योगदान दिया था, लेकिन मास्टर ब्लास्टर के 85 और अंत में मध्यक्रम के बल्लेबाज़ सुरेश रैना की नाबाद (36) रनों की पारी टीम इंडिया के लिए बहुत काम आई.

पूरे विश्व कप में अपना जौहर दिखाने वाले युवराज सिंह इस बड़े मुकाबलें में वहाब रियाज की पहली ही गेंद पर बिना खाता खोले क्लीन बोल्ड हो गये थे.

पाकिस्तान के लिए वहाब रियाज ने सबसे ज्यादा 5 विकेट हासिल किये थे, जबकि सईद अजमल के खाते में भी दो विकेट गयी थी.

261 रनों का लक्ष्य पाकिस्तान की टीम के लिए इतने हाई प्रेशर गेम में आसान नहीं था. भारतीय टीम के सभी गेंदबाजों ने मैच में अपनी शानदार सटीक लाइन लेंग्थ से पाकिस्तान की टीम के एक भी बल्लेबाज़ को विकेट पर टिकने नहीं दिया. आज ही के दिन ने वीरेंद्र सहवाग को बना दिया था मुल्तान का सुल्तान, खुद वीरू ने इस अंदाज़ में दिलाया यह सुनहरा पल याद

पाकिस्तान की पूरी टीम 49.5 ओवर में ही ऑल आउट हो गयी और मात्र 231 रन ही बना सकी. भारतीय टीम ने यह मुकाबला 29 रनों से जीतकर अपने नाम किया. पाकिस्तान के लिए मिस्बाह उल हक ने सबसे ज्यादा 56 रनों का योगदान दिया. भारतीय टीम के लिए ज़हीर खान, आशीष नेहरा, मुनाफ पटेल, हरभजन सिंह और युवराज सिंह सभी ने दो दो विकेट हासिल किये.

बल्ले से नाकाम रहे युवराज सिंह ने गेंद से किसी को निराश नहीं किया और असद शफीक और यूनिस खान को एक के बाद एक दो ओवर में आउट किया.

भारतीय टीम ने एक बेहतरीन जीत दर्ज कर 2011 एकदिवसीय विश्व कप के फाइनल मैच में जगह बनाई. मैच में शानदार खेल दिखाने वाले सचिन तेंदुलकर को ”मैन ऑफ़ द मैच” का ख़िताब दिया गया. महिला दिवस पर मौके पर सहवाग, सचिन और युवराज समेत सभी ने किया देश की बेटियों को सलाम

यह मुकाबला तमाम भारतवासियों और सच्चे खेल प्रेमियों के जहन में आज भी ताजा हैं.

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