विश्वकप 2015: वो 6 बाते जो हमे न्यूज़ीलैंड और साउथ अफ्रीका से भारत को सीखनी चाहिये

SAGAR MHATRE / 25 March 2015

हम यह जरूर कह सकते है, कि दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड में खेला गया विश्वकप का पहला सेमीफाइनल इस विश्वकप का सबसें बहतरीन मैच था. यें एक शानदार मैच था, और आखिरी समय तक सांसें रोक दी थी. सिर्फ़ खिलाडी ही नहीं, बल्कि दर्शक भी काफि परेशानी में थें, आखिर में न्यूजीलैंड नें इस रोमांचक मैच में जीत हासिल की. अब न्यूजीलैंड 29 तारिख को मेलबर्न में फाइनल खेलेगी, अब हम दिखा रहें है, कुछ ऐसी चीजें जो क्रिकेट दर्शकों को सुननी चाहिए.
1.सहीं टिम चुनना:
क्रिकेट ऐसा खेल है, जहा जो खिलाडी अच्छे फाँर्म में है उन्हें चुनना चाहिए ना कि जिनका नाम हो. यहीं पर अफ्रिका नें कल दो गलतीया की, अँबाट जो अच्छे फाँर्म में थें उनका हटा कर फिलँडर को लिया, इस का फायदा मैकुलम नें उठाया. और दुसरी गलती आँकलँड जैसी छोटे मैदान पें पांचवा गेंदबाज नहीं खिलाया, जो अफ्रिका को बहुत मंहगा पडा.
2.डकवर्थ लुईज:
इस नियम नें अफ्रिका को 1992 और 2003 में झटका दिया था और आज भी वैसा ही हुआ. जब बारिश शुरू हुई तब अफ्रिका का स्कोर 38 ओवर में 216/3 था, और तब ऐसे लगा था कि अफ्रिका 350 रन बनाऐगी. लेकिन डकवर्थ लुईस की वजह सें न्यूजीलैंड को काफी फायदा हुआ और उनको 43 ओवर में 298 का टारगेट मिला, जो उनके लिए आसान था.
3.आक्रमक कप्तानी:
दोनो कप्तानो नें कल कें मैच में कमाल की आक्रमक कप्तानी की, और एक पल भी अपनें हाथो सें मैच नहीं गवानें दिया. मैकुलम नें काफी आक्रमक कप्तानी की और पांच-पांच स्लिप लगायी थी. डिविलियर्स नें भी कमाल की आक्रमकता दिखाई.
4.टिम की तरह खेलना:
न्यूजीलैंड एक टिम की तरह खेली, और उनकें सारें खिलाडियों नें शानदार योगदान दिया, इस में अफ्रिकन टीम थोडी पिछे रहीं.
5.स्पिनरों का योगदान:
ताहिर नें अपनी भूमिका शानदार तरिके सें निभाई, और रन रेट को संभाले हुए रखा. वही रोल वेटोरी नें भी न्यूजीलैंड के लिए निभाया.
6.चोक नहीं किया:
दोनो टीमो पर चोक करने का दबाव था लेकिन न्यूजीलैंड नें अपना चोकर टैग हटाया और अफ्रिका को एक बार फिर हार झेलनी पडी. दोनो टीमो नें शानदार खेल दिखाया और खेल भावना कें साथ दोनो टीमें खेली.

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