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भारतीय ड्रेसिंग रूम की 9 घटनाएँ, जानिए बंद दरवाजे के सीक्रेट्स 

हमेशा हम अपने खिलाडियों को मैदान पर या मैदान के बाहर कई इवेंट्स में देखते ही हैं. उनके बारे में हमे मीडिया के ज़रिये भी पढ़ने सुनने को मिलता रहता है. लेकिन कुछ किस्से व् बाते ऐसी होती है जो खिलाडियों के बीच ड्रेसिंग रूम में घटी होती जिनके बारे में या तो किसी की बायोग्राफी के माध्यम से या फिर किसी ख़ास इंटरव्यू के ज़रिये हम रूबरू होते हैं.

आज हम ऐसे ही कुछ भारतीय खिलाडियों के ड्रेसिंग रूम के बंद दरवाजे के सीक्रेट्स लेकर आये हैं, आइये जानते है-

1. महेंद्र सिंह धोनी को अक्सर ड्रेसिंग रूम में तंग किया जाता था
अपने प्रारंभिक वर्षों में युवा धोनी को अक्सर अन्य खिलाड़ियों द्वारा ‘बिहारी’ कहा जाता था. युवराज सिंह इस नए खिलाडी यानि धोनी को ताना कसा करते थे कि चौके और छक्के जड़ना कोई बड़ी बात नहीं लेकिन एक मैच जीतने वाली पारी खेलना बड़ी बात है. और जब धोनी ने मैच जीतने वाली पारियां खेलना शुरू कर दिया तब युवी चिढ गए और कहा कि टेस्ट मैच में खिलाडी कि असली परख होती है. फिर एक दिन धोनी ने पूछ ही लिया “यह तो ठीक है लेकिन मुझे एक बात बताओ आप हमेशा क्यों इतना गुस्से में रहते हो.” और ये दोनों के लिए बहुत नाज़ुक पल था इसके बाद से वे महान दोस्त बन गए .

2. फारूख इंजीनियर – जीरो पर आउट
1971 में फारुख इंजीनियर और सुनील गावस्कर को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रेस्ट ऑफ़ द वर्ल्ड के लिए खेलने के लिए चुना गया. और इन दोनों को ही खेल की शुरुआत करनी थी. गावस्कर ने उसी वर्ष ही क्रिकेट में कदम रखा था और तभी उनका इस खेल के लिए चयन हो गया. एक सीनियर खिलाडी होने के नाते फारूख इंजीनियर ने ड्रेसिंग रूम में गावस्कर को कहा कि डक पर आउट मत हो जाना. लेकिन मजेदार बात ये है कि वह खुद(फारुख) पहले ही ओवर में आउट हो गए.

3. जब जॉन राइट ने सहवाग का कॉलर पकड़ लिया
यह घटना 2002 नेटवेस्ट ट्रॉफी के दौरान हुई. सहवाग उस वक़्त अपने करियर के चरम पर थे. लेकिन उसी समय में, वह अत्यंत सामान्य शॉट्स खेल कर आउट हो रहे थे. भारतीय कोच जॉन राइट इस से खुश नहीं थे. उन्होंने राहुल द्रविड़ से भी कहा कि “अगर ये एक और खराब शॉट खेल कर आउट हो जाता है, तो मैं वास्तव में उस पर क्रोधित हो जाऊंगा.” अगले मैच में फिर सहवाग ख़राब शॉट से आउट हो गये और जॉन ने अपनी बात को सच कर दिया, वे गए और सहवाग का कॉलर पकड़ लिया और जमकर बरसे. लेकिन सहवाग ने एक सच्चा खिलाडी होने के नाते इस बात को नहीं खींचा.

4. जब दाउद ने भारतीय ड्रेसिंग रूम में जाने का फैसला किया
1986 में जब भारत शारजाह दौरे पर था. भारत का मोस्ट वांटेड दाउद भारतीय ड्रेसिंग रूम में आया और खिलाड़ियों को एक शर्त पर कारों की पेशकश की. कि अगर वे अगले दिन मैच में पाकिस्तान टीम को हरा दे तो वह उन्हें यह तोहफा देगा. दिलीप वेंगसरकर ने एक संवाददाता सम्मेलन में इस बात का खुलासा किया था. दाऊद को भारतीय कप्तान कपिल देव ने कमरे से जाने के लिए कह दिया था.

 

 

5. सुधीर कुमार चौधरी को मिला विश्व कप
सुधीर कुमार चौधरी सचिन का बहुत बड़ा प्रशंसक है. भारत ने जब 2011 में विश्व कप जीता तब सचिन ने सुधीर को भारतीय ड्रेसिंग रूम में आकर समारोह में शामिल होने को कहा. और तब तेंदुलकर ने जहीर खान से विश्व कप लाने के लिए कहा इसके बाद सचिन ने सुधीर के साथ हाथ मिलाया, उसे गले लगाया और ट्रॉफी उठाने का मौका दिया.

6. कप्तान से एक शरारत
युवराज सिंह और हरभजन सिंह ने अप्रैल फूल डे पर कप्तान सौरव गांगुली से एक मज़ाक किया. दोनो क्रिकेटरों ने एक फर्जी खबर रिपोर्ट बनाई जिसमे ये लिखा था कि गांगुली ने यह बयान दिया है कि युवराज और हरभजन का रवैया सही नहीं था और ड्रेसिंग रूम में वे आतंक मचाते है. दोनों खिलाडियों ने उप कप्तान द्रविड़ की मौजूदगी में इस मामले पर सफाई के लिए गांगुली पर हमला बोल दिया. गांगुली जाहिर है इस पर चौंक गए थे क्योंकि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया था. और गांगुली ने दोनों को समझने की बहुत कोशिश की. लेकिन तभी द्रविड़ की हंसी के साथ इस शरारत से पर्दा उठ गया क्योंकि वह सब जानते थे.

7. सौरव ने युवी से किया मज़ाक
2001 नेटवेस्ट ट्रॉफी के दौरान इंग्लैंड के खिलाफ मैच से एक दिन पहले गांगुली ने युवराज से पूछा कि क्या कल तुम पारी की शुरुआत करोगे.?! एक नया खिलाडी होने के नाते युवी थोड़े हिचकिचाये लेकिन कप्तान को हाँ कह दिया. युवी इस बात को लेकर सारी रात सो नहीं पाये, सोचते रहे कि कैसे अंग्रेजी ज़मीन पर पारी खेलेंगे. अगले दिन जब भारतीय टीम बल्लेबाज़ी के लिए जाने वाले थे, तो युवी पैड बांध कर तैयार हो रहे थे ये सब देख दादा और सभी खिलाडी हंसने लगे. फिर दादा युवराज के पास गए और कहा मैं मजाक कर रहा था जब चार विकेट गिर जाये तब आना.

8. 2004 में मुल्तान में सचिन अपने शतक के बाद
2004 में , मुल्तान टेस्ट के दौरान मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर एक दोहरा शतक जड़ने में 6 रन दूर थे तब स्टैंड इन कप्तान राहुल द्रविड़ ने भारतीय पारी घोषित कर दी. तेंदुलकर चौंक गए थे और दुखी व् गुस्से में थे .टीम के साथियों में से कुछ ने सोचा कि अब सचिन ड्रेसिंग रूम में अपने गियर फेंकेंगे और एक तमाशा होगा. लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. सचिन घटना के बारे में किसी से एक शब्द भी नहीं कहा. सचिन केवल द्रविड़ पर चिल्लाये कि ” मुझे अकेला छोड़ दो “. बाद में जॉन राइट और सौरव गांगुली ने इस कड़वी घटना को लेकर सचिन से माफी मांगी.

9. जब सचिन ने किया टीम को मोटीवेट
यह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्व कप 2003 के फाइनल के दौरान हुआ. भारतीय टीम के सामने 359 का लक्ष्य रखा था. टीम घबराई हुई थी. हाफ टाइम के दौरान सचिन ने ड्रेसिंग रूम में सभी को इक्ठठा किया और कहा कि “क्या हम हर ओवर में एक चौका लगा सकते हैं…अगर ऐसा करते हैं तो 50 गेंदों में 200 रन बना सकते हैं और फिर इसके बाद बाकि बची 250 गेंदों से 160 की आवश्यकता होगी जोकि इतना मुश्किल नहीं होगा…” हालाँकि भारत यह मैच हार गया था लेकिन सचिन का प्रेरणा पाठ काबिले तारीफ था.

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