…..तो भारतीय टीम में राजनीती ने ले ली है जगह कोहली के करीबियों की धोनी की टीम में नो एंट्री

vinay mani tripathi / 03 October 2015

भारतीय टीम  के सीमित ओवरों के कप्‍तान महेंद्र सिंह धोनी अपनी अलग सोच के लिए मशहूर है, उन्‍हें मैदान में कुछ न कुछ नया प्रयोग करते हुए देखा जा सकता है, भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच पहले टी-20 मैच में भी कुछ अलग ही देखने को मिला. लेकिन ये कारगार साबित नहीं हुआ और इसकी वजह से धोनी की चारो तरफ काफी आलोचना हो रही है.

धोनी के इस प्रयोग से अब ऐसा प्रतीत होने लगा है, कि भारतीय टीम दो गुटों में बंटती जा रही है, एक धोनी एंड ग्रुप तो दूसरा विराट एंड कम्पनी, पहले टी-20 मैच में धोनी ने फॉर्म में चल रहे अजिंक्‍य रहाणे, हरभजन सिंह, अमित मिश्रा और स्‍टुअर्ट बिन्‍नी को मौका नहीं दिया, क्यूंकि यह सभी खिलाड़ी विराट कोहली के करीबी हैं. मगर धोनी की पसंद वो नहीं जो विराट की है. नतीजतन भारत को पहले टी-20 में दक्षिण अफ्रीका के हाथों तीन विकेट की करारी शिकस्‍त झेलना पड़ी.

धोनी के इस फैसले से काफी लोगो को हैरानी हुई होगी, लेकिन यही उनका अंदाज है, हालांकि कहा यह भी जा रहा है कि टीम इंडिया के अंदर हो रही राजनीति की वजह से रहाणे और हरभजन सिंह को मौका नहीं दिया गया, गौरतलब है, कि रहाणे जबरदस्त फॉर्म में हैं. हाल ही में हुए श्रीलंका दौरे पर रहाणे ने दो शतक लगाए थे. उससे पहले उन्होनें जिम्बाब्वे दौरे पर टीम का नेतृत्व भी किया था.

 

बांग्‍लादेश दौरे पर जब टीम इंडिया बांग्‍लादेश से वन-डे सीरीज हारी थी तब धोनी ने रहाणे के बारे में कहा था कि वो स्‍ट्राइक रोटेट करने में समय लेते हैं, धोनी के इस बयान पर बाद में रहाणे ने कहा था- धोनी भाई ने मुझे फीडबैक दिया है और मैं इसे सकारात्मक रूप में लूंगा और उससे आगे बढने की कोशिश करूंगा.”

विराट कोहली की टीम में जगह पाने वाले हरभजन सिंह धोनी की टीम में कहीं न कहीं फिट नहीं बैठते हैं, यही कारण है कि धोनी ने हरभजन को वो तवज्जो नहीं दिया है जो विराट की टीम में उन्हें मिलता है.

हालांकि टीम के डायरेक्टर रवि शास्त्री का कहना है कि धोनी ने मैच के लिए अपनी बेस्ट टीम उतारी है और टीम में किसी तरह की राजनीति नहीं हो रही है. लेकिन इन सब बातो की तरफ ध्यान दे तो ये साफ़ है, कि भारतीय टीम में राजनीती ने अपनी पैठ बना ली है, और इसी वजह से टीम बांग्लादेश जैसी छोटी टीम से भी हार गयी थी, अगर ऐसा ही चलता रहा तो जल्द ही विश्व क्रिकेट से भारत का नामोनिशान मिट जायेगा, और भारत भी वेस्टइंडीज की तरह गुमनाम हो जायेगी.

 

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