गोल गप्पे बेचकर क्रिकेट सिखने वाले ने मचाई धूम

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अर्जुन फ्लॉप लेकिन गोलगप्पे बेच क्रिकेट सीखने वाले ने शतकीय पारी खेल मचाई धूम 

अर्जुन फ्लॉप लेकिन गोलगप्पे बेच क्रिकेट सीखने वाले ने शतकीय पारी खेल मचाई धूम

भारत की अंडर-19 टीम ने हाल में ही अपना श्रीलंका दौरा पूरा किया है. बता दें, कि इस दौरे में भारत ने दो मैचों की टेस्ट सीरीज 2-0 से जीती वहीं वनडे सीरीज को भी 3-2 से अपने नाम किया.

शुक्रवार को खेले गए सीरीज के आखिरी वनडे मैच में भारत अंडर-19 टीम के ओपनर बल्लेबाज यशस्वी जयसवाल ने 128 गेंदों पर 114 रन की शानदार पारी खेल भारतीय टीम को जीत दिलाई है. उन्होंने अपनी पारी में 8 चौके व 3 छक्के लगाये थे. वही दूसरी तरफ अर्जुन तेंदुलकर इस दौरे में फ्लॉप साबित हुए थे.

गोल गप्पे बेच सीखा क्रिकेट 

बता दें, कि वैसे तो यशस्वी उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के है. लेकिन क्रिकेटर बनने के लिए वह मुंबई पहुँच गए.  मुंबई में उन्होंने एक डेयरी शॉप पर नौकरी भी की है और दशहरा मेले के दौरान उन्होंने आजाद मैदान पर गोल-गप्पे भी बेचे है. उन्होंने अपने इन कामो के साथ-साथ क्रिकेट भी सीखा.

सचिन ने गिफ्ट किया था बैट

यशस्वी को एक क्रिकेटर बनने के लिए काफी संघर्ष कर चुके है उनके क्रिकेटर बनने की कहानी बहुत प्रेरणादायक है. वह अपनी आजीविका चलाने के लिए नौकरी भी करते थे.

बता दें, कि सचिन के बेटे अर्जुन तेंदुलकर और यशस्वी जयसवाल ने एक साथ काफी क्रिकेट खेला हुआ है, जब यशस्वी श्रीलंका दौरे के लिए निकले तो खुद क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने अपना बल्ला उन्हें गिफ्ट के तौर पर दिया था.

गॉर्ड के साथ टेंट में भी रहे है तीन साल 

यशस्वी जयसवाल को तीन साल तक मुस्लिम यूनाइटेड क्लब के गॉर्ड के साथ टेंट में भी रहना पड़ा है. दरअसल, वैसे तो उनके चाचा मुंबई में रहते थे, लेकिन चाचा की भी आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने के कारण उन्हें अपना पेट पालने व क्रिकेट सिखने के लिए कुछ ना कुछ करता रहना पड़ता था. वह अपने घर भदोही एक क्रिकेटर ही बनकर लौटना चाहते थे. वह 11 साल की उम्र से ही अपने घर-परिवार से दूर मुंबई चले गए थे. उनके बड़े भाई ने भी उनका क्रिकेटर बनने पर बहुत सहयोग किया है.

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