आशीष नेहरा ने दिया बड़ा बयान, कहा उम्र के हिसाब से पंत हैं धोनी से ज्यादा प्रतिभाशाली 1
Credit: cricket Trolls

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज और दिग्गज कप्तान रहे महेंद्र सिंह धोनी ने पिछले सप्ताह शनिवार को इंटरनेशनल करियर को हमेशा के लिए बाय-बाय कह दिया। महेंद्र सिंह धोनी के इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास की घोषणा करने के साथ ही अब भारतीय टीम में युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत के लिए पूर्ण रूप से रास्ता खुल गया है।

आशीष नेहरा पंत को मानते हैं जवानी के धोनी से ज्यादा प्रतिभाशाली

वैसे तो ऋषभ पंत पिछले कुछ साल से टीम के साथ बने हुए हैं और टीम में तीनों ही फॉर्मेट में अपनी जगह बना ली है। इसी कारण से महेंद्र सिंह धोनी के उत्तराधिकारी के रूप में पंत को देखा जा रहा है।

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महेंद्र सिंह धोनी के संन्यास के बाद उनकी जमकर तारीफ हो रही है. जिसमें भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज आशीष नेहरा ने भी जमकर तारीफ तो की लेकिन साथ ही ऋषभ पंत को फिलहाल धोनी की जवान उम्र से ज्यादा प्रतिभाशाली करार दिया है।

ऋषभ पंत में प्रतिभा की नहीं है कोई कमी

आशीष नेहरा का मानना है कि धोनी की जवानी में वो जितनी प्रतिभाशाली थे उससे ज्यादा फिलहाल ऋषभ पंत में काबिलियत दिखायी देती है। नेहरा ने कहा

धोनी का सबसे बड़ा कौशल अविश्वसनीय रूप से मजबूत उनका दिमाग था। जिसकी वजह से आज वो ऐसे बने हैं। अगर आप मुझसे पूछेंगे तो मैंने ऋषभ पंत को सोनेट(टूर्नामेंट) में देखा है जब वो 14 साल के चुलबुले बच्चे थे। मुझ पर भरोसा करिए कि 22 साल के पंत में उस धोनी से ज्यादा स्वाभाविक प्रतिभा  थी जिन्होंने साल 2004 में 23 साल के पहली बार भारत के लिए खेले थे।”

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भारत के इस पूर्व तेज गेंदबाज ने आगे कहा कि

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“मैंने धोनी के बारे में सुना है कि वो खिलाड़ियों की पहुंच से दूर रहते हैं जो बिल्कुल गलत है। उनके मन में सभी वरिष्ठ खिलाड़ियों के लिए बहुत सम्मान था। मैं ये विश्वास दिला सकता हूं कि उन्होंने दिमाग पढने वाली क्षमताओं के कारण बदलाव के दौर में टीम को बहुत अच्छी तरह से संभाला था। उन्होंने सबको सम्मान दिया और इसलिए उन्हें सम्मान मिला। ऐसा कभी नहीं हुआ कि उन्होंने किसी खिलाड़ी को उसके बारे में स्थिति से स्पष्ट रूप से अवगत नहीं कराया कि उनके दिमाग में क्या चल रहा है।”

धोनी अपनी भावनाओं पर नियंत्रण करने के कारण थे बेहतर

आशीष नेहरा ने कहा

“वो बेहतर क्यों हैं क्योंकि धोनी से बेहतर भावनाओं पर कोई नियंत्रित नहीं कर सकता था। आपको क्या लगता है कि वो कभी भी आहत, अपमानित या क्रोधित नहीं हुए? लेकिन वो इसे छुपाना जानते थे। ये उनका दूसरा स्वभाव है। उनमें दूसरे के दिमाग को पढ़ने  की शानदार क्षमता है जिसके कारण वो सबसे अच्छे व्यक्ति प्रबंधकों में से एक बने।”

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उन्होंने 2009 और 2011 के बीच टीम में मेरी वापसी को शानदार तरीके से संभाला था उन्होंने मुझसे पावरप्ले में ज्यादा ओवर डलवाये और तीन या चार स्पेल में मुझसे गेंदबाजी करवायी। जिस मैच में जहां आप 325 रन के लक्ष्य का बचाव कर रहे होते थे वो कहते थे ‘अगर आप ने 70 रन भी दे दिए तो भी चिंता की कोई बात नहीं थी। जब तक आपको विकेट मिलते हैं मैं आपके साथ खड़ा हूं।’ उन्होंने ये सुनिश्चित किया कि उस समय के चयनकर्ता टीम में खिलाड़ियों को ज्यादा अंदर-बाहर नहीं करें।”

आसानी से पढ़ लेते थे गेंदबाजों का दिमाग

नेहरा ने आखिर में कहा कि

“धोनी आखिरी ओवरों में गेंदबाजी करवाने को लेकर काफी स्पष्ट थे। दिमाग पढ़ने के मामले में आप धोनी को पछाड़ नहीं सकते। अगर उन्हें पता रहता था कि किसी खिलाड़ी में सीमित क्षमताएं हैं तो वो उसे बिना निराश किए या बिना गुस्सा दिखाएं उसका बेहतरीन उपयोग करते थे। वो टी20 क्रिकेट में अपने गेंदबाजों को जानते थे।”

आशीष नेहरा

“इंटरनेशनल क्रिकेट में मेरे अंतिम चरण के दौरान वो मुझे पावर प्ले में तीन ओवर करवाते थे जबकि दूसरी ओर तीन अलग-अलग गेंदबाज ओवर डालते थे। सभी संसाधनों से उपयोग लेना उनकी ताकत थी और सुरेश रैना, रवीन्द्र जडेजा जैसे शीर्ष इंटरनेशनल खिलाड़ी बनाना उनके सबसे बड़े योगदान में से एक रहा है।”