कप्तान और कोच की मीटिंग के बाद बीसीसीआई ने लिया घरेलू क्रिकेट में इस बदलाव का फैसला 1

भारतीय क्रिकेट कन्ट्रोल बोर्ड के बैनर तले खेली जाने वाली टी20 क्रिकेट लीग इंडियन प्रीमियर लीग की समाप्ति के बाद बीसीसीआई ने आगामी घरेलू सीजन को देखते हुए एक बड़ा कॉन्क्लेव आयोजित किया। बीसीसीआई के इस कॉन्क्लेव 2019 में बीसीसीआई ने घरेलू कप्तानों और कोच को भी शामिल किया।

बीसीसीआई कॉन्क्लेव 2019

बीसीसीआई के इस कॉन्क्लेव में पहली बार रणजी कप्तानों और कोच को शामिल कर उनसे घरेलू क्रिकेट में सुधार के लिए उठाए जाने वाले कदम के बारे में चर्चा की तो साथ ही कई फैसले भी लिए।

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शुक्रवार को बीसीसीआई की इस कॉन्क्लेव में कई तरह की बातों को लेकर चर्चा की गई जिसमें घरेलू क्रिकेट में भी डीआरएस को लागू करने से लेकर टॉस के बारे में भी चर्चा की।

घरेलू कप्तानों और प्रशिक्षकों ने दिए कई अहम सुझाव

बीसीसीआई के द्वारा आयोजित किए गए इस कॉन्क्लेव में पूरी तरह से घरेलू क्रिकेट को लेकर ही बात की गई जिसमें रणजी टीमों के कोच और कप्तानों ने टॉस की प्रणाली को खत्म करने के साथ ही डीआएस को लागू करने का सुझाव दिए।

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भारत के पिछले घरेलू यानि रणजी सीजन के दौरान कई बार खराब अपांयरिंग देखने को मिली जिसके बाद से ही उम्मीद की जा रही थी कि खराब अपांयरिंग को ध्यान में रखते हुए इसको लेकर चर्चा जरूर होगी। ऐसे में इंटरनेशननलल क्रिकेट के बाद रणजी सत्र में मैचों की संख्या बढ़ने के बाद कोच और कप्तानों ने डीआरएस लागू करने का सुझाव दिया।

डीआरएस लागू करने और टॉस प्रणाली को खत्म करने के मिले सुझाव

पिछले रणजी सीजन के सेमीफाइनल मुकाबले में सौराष्ट्र के बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा को कर्नाटक के खिलाफ  बल्ले का हिस्सा लगने के बाद भी विकेटकीपर कैच आउट नहीं दिया गया था। जिसके बाद पुजारा ने शतक लगाया और उनकी टीम ने जीत हासिल की।

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डीआरएस को घरेलू क्रिकेट में शुरू करने के साथ ही टॉस प्रणाली को खत्म करने का भी सुझाव दिया गया। जिसमें प्रस्ताव रखा गया कि मेजबान टीम को बल्लेबाजी या गेंदबाजी चुनने की आजादी दी जाए। साथ ही साथ घरेलू क्रिकेट में खेल स्तर पर सुधार, गेंद की क्वालिटी, धीमी ओवर गति जैसे मुद्दों पर भी बात हुई।

बीसीसीआई ने कोच और कप्तानों की जानी सुधार के लिए राय

बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष अनिरूद्ध चौधरी ने इस दौरान कहा कि

“भारतीय क्रिकेट का पूरा ढांचा घरेलू क्रिकेट खिलाड़ियों, कप्तानों, प्रशिक्षकों, सपोर्ट स्टाफ और रास्य संघो पर टिकाहुआ है। इन सभी का रोल उतना ही अहम हो जाता है जितना उन खिलाड़ियों का जो नेशनल टीम का प्रतिनिधित्व करते हैं। कॉन्क्लेव का मकदस खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों की बातों को सुनना था। हम उनके सुझावों की इज्जत करते हैं।”

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बीसीसीआई के कार्यवाहक अध्यक्ष सीके खन्ना ने कहा कि

“क्रिकेट अब पूरे देश में फैल गया है। ये हमारे लिए गर्व का पल हहै कि अब हमारे पास बीसीसीआई के घरेलू टूर्नामेंटों में प्रतिस्पर्धा करने वाली नॉर्थ ईस्ट की टीमें हैं जबकि मुंबई औरर कर्नाटक जैसी टीमों ने प्रमुख टूर्नामेंट में अपना दबदबा कायम रखा है, पिछले कुछ सीजन में विदर्भ ने चैंपियन के रूप में उभरने ने साबित कर दिया है कि अब हमारे पास एक बहुत प्रतिस्पर्धी घरेलू ढांचा है।”

 

 

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