बीसीसीआई के ही कुछ अधिकारी, बोलें- द्रविड़ को नहीं मिलना चाहिए 'द्रोणाचार्य अवार्ड'

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राहुल द्रविड़ को नहीं मिलेगा द्रोणाचार्य अवार्ड, बीसीसीआई के कई दिग्गजो ने जताई आपत्ति 

राहुल द्रविड़ को नहीं मिलेगा द्रोणाचार्य अवार्ड, बीसीसीआई के कई दिग्गजो ने जताई आपत्ति

‘द वाल’ के नाम से विश्वक्रिकेट में मशहूर राहुल द्रविड़ का नाम बीसीसीआई ने खेल मंत्रालय को द्रोणाचार्य अवार्ड के लिए भेजा था जिसकों लेकर कुछ अधिकारियों ने आपत्ति जताई है. अधिकारियों का कहना है कि इस तरह से उन गुरूओं को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता जिन्होंने अपना पूरा जीवन खिलाड़ियों को तैयार करने में दिया है. हालांकि उन्होंने द्रविड़ के अंडर—19 या इंडिया—ए टीम के कोच के तौर पर किए योगदान से इंकार नहीं किया.
राहुल द्रविड़ को नहीं मिलेगा द्रोणाचार्य अवार्ड, बीसीसीआई के कई दिग्गजो ने जताई आपत्ति 1अधिकारी मानते हैं कि ये अवार्ड द्रविड़ के बजाय हार्दिक पाण्ड्या, जसप्रीत बुमराह, ऋषभ पंत, कुलदीप यादव और यजुवेन्द्र चहल जैसे खिलाड़ियों को बचपन में क्रिकेट खेलना सिखाने वाले कोच को मिलना चाहिए. मीडिया से बात करते हुए बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा,

“भारतीय क्रिकेट में द्रविड़ का योगदान अतुलनीय है. लेकिन उन्हें द्रोणाचार्य अवार्ड देना उन सभी कोच के साथ अन्याय है जो बचपन में इन बच्चों को चुनते हैं, उन्हें क्रिकेट खेलना सिखाते हैं और घंटों मैदान पर उनकी स्किल्स को सुधारने में खर्च करते हैं. उन कोच की मेहनत ने ही उन्हें चैम्पियन खिलाड़ी बनाया है.”

उन्होंने यह भी कहा कि द्रविड़ के टीम के कोच होने से निश्चित रूप से भारतीय क्रिकेट को बड़ा फायदा मिल रहा है. भारत की बैटिंग लाइन को विश्व की सबसे बेहतरीन लाइन बना देने में उनका बड़ा योगदान है, लेकिन महज तीन साल के कोचिंग करियर के कारण द्रविड़ को ये सम्मान देना सालों से मेहनत कर रहे कोचों के साथ अन्याय है. इससे गलत परंपरा की नींव पड़ेगी.

राहुल द्रविड़ को नहीं मिलेगा द्रोणाचार्य अवार्ड, बीसीसीआई के कई दिग्गजो ने जताई आपत्ति 2

उन्होंने कहा कि ‘बीसीसीआई ने हमेशा ही द्रविड़ के अभूतपूर्व योगदान को सराहा है और उसकी प्रशंसा की है. वह लंबे वक्त तक भारतीय बैटिंग लाइन की जान रहे हैं.

उन्होंने भारतीय क्रिकेट को उसके उस दौर तक पहुंचाया है, जहां वह आज है। उन्होंने सचिन, सौरव गांगुली, वीरेंदर सहवाग, अनिल कुंबले, जहीर खान जैसे दिग्गजों के सा​थ बेहतरीन क्रिकेट पारियां देश के लिए खेली हैं.

उस गौरव के लिए भारत सरकार को उनको अर्जुन अवार्ड, पदमश्री, खेल रत्न और भारत रत्न जैसे सम्मान देने चाहिए. लेकिन जब हम द्रोणाचार्य अवार्ड की बात करते हैं तो फिर चाहें वो महान खिलाड़ी ही क्यों न हो, उसका योगदान एक कोच के तौर पर ही आंका जाना चाहिए. न कि मार्गदर्शक और टीम कोच के तौर पर उसे ये सम्मान दिया जाना चाहिए.

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