इस दशक में क्रिकेट के खेल में हुए कई बड़े बदलाव, फ्री हिट

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सुपर ओवर से लेकर रनर की छुट्टी तक इस दशक बदले हैं क्रिकेट के ये नियम 

सुपर ओवर से लेकर रनर की छुट्टी तक इस दशक बदले हैं क्रिकेट के ये नियम

क्रिकेट के लिए ये दशक बहुत अच्छा रहा है. इस दशक के दौरान कई बड़े नियमों में बदलाव किये गये हैं. जिसके कारण अब क्रिकेट का स्वरुप पहले से बदल गया है. इस दशक के दौरान आये हुए बदलाव ने क्रिकेट को नए स्तर पर पहुंचा दिया है. जिसके कारण अब क्रिकेट पहले से भी बेहतर नियमो के साथ खेला जा रहा है.

1.फ्री हिट

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पहले सिर्फ पैर की नोबॉल पर ही फ्री हिट मिलता था लेकिन 2015 में इस नियम में बड़ा बदलाव किया गया. उसके बाद से सभी नो बॉल पर फ्री हिट मिलेगा. फिर चाहे हो पैर की नो बॉल हो या 30 गज के बाहर ज्यादा फील्डर होने से मिला हो. फ्री हिट में कोई भी खिलाड़ी मात्र रन आउट ही होता है. अन्य किसी भी तरह से आउट नहीं हो सकता है. इस बदलाव के कारण अब बल्लेबाजो को मदद मिली है. जबकि गेंदबाजो के लिए नियम कड़े हो गये हैं.

2.डे-नाईट टेस्ट

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टेस्ट क्रिकेट में दर्शको की रूचि ना देखने के बाद आईसीसी ने इस फ़ॉर्मेट को बचाने के लिए डे-नाईट टेस्ट मैच का फार्मूला निकाला है. इस टेस्ट मैच को फ्लड लाइट में खेला जाता है. जिसके कारण गेंद दिखे इससे लिए लाल गेंद की जगह पिंक बॉल का प्रयोग किया है. पहला पिंक बॉल टेस्ट 27 नवंबर 2015 से ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया था. इसे 2012 में आईसीसी ने लागु किया था. भारतीय टीम ने हाल में ही कोलकाता के मैदान पर बांग्लादेश के खिलाफ पिंक बॉल टेस्ट खेला था.

3.दो नयी गेंद

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ये बदलाव 2011 में लाया गया था. जिसके कारण एकदिवसीय फ़ॉर्मेट में दोनों छोर से अलग गेंद का प्रयोग होगा. इस नियम को लाने की वजह थी. गेंदबाजो को ज्यादा मदद मिल सके और बल्लेबाज और गेंदबाज दोनों के लिए खेल समान हो जाये. लेकिन इसका फायदा बल्लेबाजो को ही मिला. अब तो एकदिवसीय फ़ॉर्मेट से रिवर्स स्विंग की कला ही गायब हो गया है. जिससे बल्लेबाजो के लिए रन बनाना और आसान हो गया है.

4.करीबी फील्डर का नियम खत्म

2015 के पहले पॉवरप्ले के दौरान बल्लेबाज के करीब में फील्डर लगाना जरुरी था लेकिन अब ये नियम खत्म हो गया है. अब फील्डिंग कर रहा कप्तान 30 गज के दायरे में जहाँ चाहे अपना फील्डर लगा सकता है. इस नियम के कारण फील्डिंग करने वाली टीम के साथ गेंदबाजो को भी मदद मिली है.

5.सुपर ओवर

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इंग्लैंड में खेले गये विश्व कप के फ़ाइनल में न्यूजीलैंड की टीम को इस लिए हार मिली क्योंकि उन्होंने मैच में ज्यादा बाउंड्री लगाई थी. मैच पहला टाई रहा उसके बाद सुपर ओवर में भी बराबर रन ही बने. लेकिन उसके बाद मैच में ज्यादा बाउंड्री मारने के कारण इंग्लैंड की टीम ने खिताब अपने नाम कर लिया. जिसके बाद से बहुत बवाल हुआ था. अब आईसीसी ने नियमों में बदलाव करते हुए घोषित किया है. जब तक एक टीम के बनाये हुए ज्यादा नहीं हो जाते तब तक सुपर ओवर खेला जाता रहेगा.

6.कन्कशन रिप्लेसमेंट

विश्व क्रिकेट में पिछले कुछ सालो में बल्लेबाजो के सिर में गेंद लगने के कई वाकये हुए हैं. जिसके बाद बल्लेबाज आगे खेलने की स्थिति में नहीं होता है. इसी को ध्यान में रखकर आईसीसी ने कन्कशन रिप्लेसमेंट का नियम बनाया है. जिसके अनुसार यदि मैच में किसी भी खिलाड़ी के सिर में चोट लगती है और उसके बाद वो आगे बल्लेबाजी नहीं कर सकता है तो उसकी जगह रिप्लेसमेंट में आया खिलाड़ी खेल सकता है. एशेज सीरीज के दौरान स्टीव स्मिथ के चोटिल होने पर मार्नस लाबूशेन उनका विकल्प बनकर खेले थे.

7.रनर का ना मिलना

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अंतर्राष्ट्रीय स्तर अब किसी भी खिलाड़ी को यदि पैर में चोट लगती है या मांसपेशियों में खिंचाव आता है तो उसे रनर की सुविधा नहीं मिलेगी. ये नियम 2011 में आया था. चोटिल खिलाड़ी मैदान से बाहर चला जाये या उसी अवस्था में खेलता रहे. पहले इस तरह से चोटिल होने पर रनर मिलने की सुविधा होती थी.

8.फील्डर के हेलमेट पर गेंद लगने पर भी मिलेगा आउट

आईसीसी ने इसके साथ एक बड़ा नियम भी बदला है. पहले फील्डर के हेलमेट पर गेंद लगने के बाद वो गेंद डेड हो जाती थी. यदि उसके बाद वो खिलाड़ी कैच हो जाये या रन आउट हो जाये तो नहीं माना जाता था. लेकिन अब ऐसा नहीं है, फील्डर के हेलमेट पर गेंद लगने के बाद यदि कैच ले लिया जाता था तो भी बल्लेबाज आउट ही माना जायेगा.

9.बल्ले का साइज़ निर्धारित

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लगातार तेजी से बन रहे रन और किनारा लेकर भी चौका जाने की स्थिति को देखकर अब आईसीसी ने बल्ले का साइज़ भी निर्धारित कर दिया है. जिसके तहत बल्ले के लंबाई और चौड़ाई पहले जैसी ही है, लेकिन किनारों की मोटाई निर्धारित कर दिया गया है. अब किनारों की मोटाई 40 सेमी और बल्ले के बीच की मोटाई 60 सेमी तक ही हो सकती है. अंपायर को शक होने पर वो बल्ले को चेक कर सकता है. उसके लिए अंपायर के पास यंत्र मौजूद होंगे.

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