डे-नाइट टेस्ट के अलावा कई चीजों पर देना होगा ध्यान: द्रविड़

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राहुल द्रविड़ ने बताया डे-नाइट टेस्ट को सफल बनाने के लिए करना होगा ये काम 

राहुल द्रविड़ ने बताया डे-नाइट टेस्ट को सफल बनाने के लिए करना होगा ये काम

22 नवंबर को भारतीय क्रिकेट इतिहास में नया अध्याय लिखा जाने वाला है. भारत में पहली बार डे-नाइट टेस्ट मैच खेला जाएगा. पिंक बॉल क्रिकेट को लकर खिलाड़ी सहित दर्शक भी खासा उत्साहित हैं. बांग्लादेश और टीम इंडिया लगातार प्रैक्टिस कर परिस्थितियों को समझने का प्रयास कर रही है. दिग्गज खिलाड़ी इस ऐतिहासिक मैच पर अपनी टिप्पणी कर रहे हैं.

डे-नाइट मैच में ओस को करना होगा कंट्रोल

डे-नाइट

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए दूसरे के बाद सबसे अधिक रन बनाने वाले राहुल द्रविड़ ने डे नाइट टेस्ट के बारे में बात करते हुए कहा,

“यह न केवल टेस्ट क्रिकेट को पूर्नजीवित करने का हल है, लेकिन यह उन चीजों में से एक है, जिसे हमें करने की जरूरत है. अगर हम केवल ओस को कंट्रोल करने में सक्षम होते हैं तो भारत में दिन-रात टेस्ट वार्षिक कार्यक्रम बन सकता है. जब गेंद गीला होगा और गेंदबाजी मुश्किल हो जाएगी क्योंकि गेंद स्विंग नहीं होगी.”

बेसिक चीजों पर देना होगा ध्यान

सीमित ओवर फॉर्मेट के आने के बाद टेस्ट क्रिकेट में लोगों की दिलचस्पी कम होती जा रही है. साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट मैचों में स्टैंड्स खाली नजर आ रहे थे. लेकिन डे-नाइट टेस्ट को देखने के लिए भीड़ उमडे़गी.

सौरव गांगुली ने खुद एक इंटरव्यू में बताया कि इस मैच को देखने के लिए 65000 हजार लोग आने वाले हैं. लेकिन अब द्रविड़ ने डे नाइट के अलावा भी कई चीजों पर ध्यान देने के लिए बताया. द्रविड़ ने कहा,

डे-नाइट टेस्ट के इसके अलावा भी कई अन्य चीजें है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है ताकि दर्शकों को स्टेडियम की ओर आकर्षित किया जा सके. जैसे टॉयलेट, सीट और कार पार्किंग, ऐसी बेसिक चीजें हैं, जिसपर ध्यान देने की जरूरत है”

अब टीवी में घर पर ही मैच देख लेते हैं दर्शक

राहुल द्रविड़ ने बताया डे-नाइट टेस्ट को सफल बनाने के लिए करना होगा ये काम 1

राहुल द्रविड का कहना है कि पहले की बात करें तो अधिक से अधिक लोग मैदान पर क्रिकेट देखने पहुंचते थे. लेकिन टैक्नोलॉजी के आने और अच्छी-अच्छी टीवी के आने के बाद से लोग घर पर ही मैच देखने का मजा उठा लेते हैं. इसपर उन्होंने कहा,

“जब हम कहते हैं कि 2001 में ईडन गार्डन्स में 100000 लोग थे, तो हम इसे याद नहीं कर रहे हैं. उस समय, कोई एचडी टेलीविजन नहीं था जो आपको घर पर बेहतर अनुभव की गारंटी दे सकता था, मोबाइल पर कोई क्रिकेट नहीं था. और यदि आप देखना चाहते थे तो आपको मैदान में आना पड़ता था.”

“इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट क्रिकेट अच्छी स्थिति में है. लेकिन वहां ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके पास टेस्ट क्रिकेट कैलेंडर है और हमारे पास नहीं है”

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