मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करेगा डीडीसीए : सी. के. खन्ना

ians / 12 July 2016

नई दिल्ली, 12 जुलाई (आईएएनएस)| दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के उपाध्यक्ष सी. के. खन्ना ने मंगलवार को कहा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप डीडीसीए अपनी अगली कार्यकारी बैठक में नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और मुख्य परिचालन अधिकारी (सीएफओ) की नियुक्ति करेगा। ज्ञात हो कि न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) मुकुल मुद्गल ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष डीडीसीए की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी रिपोर्ट पेश कर दी।

खन्ना ने यहां जल्दीबाजी में बुलाई गई संवाददाता सम्मेलन में कहा, “शनिवार को हमने एक बैठक की थी, जिसमें अगली बैठक में नया सीईओ नियुक्त किए जाने का निर्णय लिया गया।”

न्यायमूर्ति मुद्गल ने खन्ना सहित डीडीसीए में हितों के टकराव के मामलों का उल्लेख किया है।

उनकी रिपोर्ट में कहा गया है, “सी. के. खन्ना ऐसे ही व्यक्ति हैं जिनके निहित क्रियाकलापों ने डीडीसीए की गरिमा को धूमिल किया है। वह डीडीसीए के सहायक कर्मचारियों पर अप्रत्यक्ष रूप से नियंत्रण रखते हैं।”

मंगलवार को डीडीसीए का एक धड़ा अपनी बात रखने के लिए सामने आया और दावा किया कि न्यायमूर्ति मुद्गल को डीडीसीए के ही कुछ लोगों ने ‘दिग्भ्रमित’ किया है।

न्यायमूर्ति मुद्गल की रिपोर्ट में कहा गया है कि डीडीसीए के सचिव अनिल खन्ना और संरक्षक रवि खन्ना, सी. के. खन्ना के भाई हैं जबकि संयुक्त सचिव विवेक गुप्ता उनके रिश्तेदार हैं।

इस संबंध में अपने बचाव में सी. के. खन्ना ने कहा कि बीसीसीआई के हितों के टकराव संबंधी नियम में कहीं नहीं कहा गया है कि दो भाई किसी एक संस्था में साथ-साथ काम नहीं कर सकते।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, “मैंने बीसीसीआई के सारे दिशा-निर्देश पढ़े हैं और मुझे अपने खिलाफ हितों के टकराव का कोई मामला नहीं दिखाई देता। वे सभी चुन कर आए हैं। जहां तक जिम्मेदारियों की बात है तो न्यायमूर्ति मुद्गल ने मुझे किसी भी समिति में शीर्ष पर नहीं रखा है।”

खेल समिति के संयोजक विनोद तिहारा ने भी सी. के. खन्ना का समर्थन किया।

तिहारा ने कहा, “न्यायमूर्ति मुद्गल ने खेल समिति पर कड़ी प्रतिक्रियाएं दी हैं। मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि उन्हें कुछ लोगों ने भ्रमित किया है। हमारे साथ एक बार भी बैठक करने की बजाय उन्होंने ऐसे लोगों से बातचीत की जो चुनाव में हार चुके हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “जहां तक सी. के. खन्ना के हितों के टकराव की स्थिति में आने की बात है तो मुद्गल समिति की कोर टीम में मौजूद सिद्धार्थ वर्मा और भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा दोनों ही डीडीसीए के निदेशकों में शामिल हैं। तब तो यह भी हितों का टकराव हुआ।”

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