…..तो इस वजह से लिया धोनी ने क्रिकेट से सन्यास

भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने इस साल के शुरुआत में ही ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वार्डर-गवास्कर ट्राफी के तीसरे मैच में अचानक से सन्यास की घोषणा कर दी थी, इससे एक तरफ जहाँ पूरी टीम स्तब्ध थी, वही धोनी के प्रसंसक इस बात को हजम नहीं कर पा रहे थे, कि माही ने इतनी जल्दी क्रिकेट को अलविदा क्यों कहा, आज तक ये एक रहस्य बना हुआ था, लेकिन अब इस रहस्य से पर्दा उठ गया है.

भारतीय कप्तान धोनी के पूर्व कोच एमपी सिंह ने ज़ी न्‍यूज से बातचीत में कहा, कि धोनी ने टेस्ट क्रिकेट खेलते समय दर्द की बात उनसे बताई थी. वास्तव में धोनी को टेनिस एल्बो का डर बना हुआ था, धोनी को डर था, कि कही टेस्ट क्रिकेट की वजह से उनका वनडे और टी-20 करियर बर्बाद न हो जाए, इसलिए उन्होंने टेस्ट को अलविदा कहने का मन बनाया. धोनी ने कुल 90 टेस्ट मैच खेले.

गौरतलब है, कि इससे पहले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर सबसे अधिक चोट से परेशान थे, और टेनिस एल्बो उनमे से एक था, एक बार तेंदुलकर ने कहा था, कि जब मै टेनिस एल्बो से जूझ रहा था, तो एक बार तो मुझे लगा, कि मेरा करियर खत्म हो गया और अब मै दोबारा बल्ला नहीं उठा सकूंगा, उस समय मै बेटा अर्जुन का प्लास्टिक का बल्ला भी उठाने में अस्मर्थ था, जब मै पहली बार मैदान पर उतरा तो लोग 11-12 साल के बच्चे भी मेरा शॉट आसानी से रोक रहे थे. उस समय कई लोगो ने मेरी सहायता की जिससे मै मैदान पर दोबारा वापसी कर पाया.

धोनी को सचिन की ये बात अच्छे से याद थी, और वो चाहते थे, कि उनका वनडे और टी-20 करियर बर्बाद न हो इसलिए धोनी ने टेस्ट क्रिकेट को छोड़ना ही सही समझा और धोनी का ये फैसला आत्महित के साथ देशहित में भी है.

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