मनोज तिवारी ने बयां किया टीम से ड्रॉप किए जाने का दर्द

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धोनी ने मैन ऑफ़ द मैच बनने के बाद भी मुझे किया था टीम से बाहर पर आज तक नहीं पूछा वजह 

धोनी ने मैन ऑफ़ द मैच बनने के बाद भी मुझे किया था टीम से बाहर पर आज तक नहीं पूछा वजह

कोरोना वायरस के चलते इन दिनों हर कोई अपने-अपने घरों में कैद है. सभी क्रिकेटर्स फैंस से जुड़ने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं. इस बीच लंबे वक्त से टीम इंडिया से बाहर चल रहे बंगाल के क्रिकेटर मनोज तिवारी ने भी एक लाइव चैट में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने टीम इंडिया से बाहर किए जाने को लेकर अपना पक्ष रखा और साथ ही बताया कि आज तक उन्होंने इस बारे में महेंद्र सिंह धोनी से सवाल नहीं किया है.

मुझे 100 बनाने के बाद भी 14 मैचों में नहीं मिला खेलने का मौका

मनोज तिवारी

भारतीय क्रिकेट टीम में कई ऐसे खिलाड़ी रहे हैं जो टीम से अंदर-बाहर होते रहे, लेकिन उन्हें कभी भी टीम में नियमित स्थान प्राप्त नहीं हुआ. बंगाल के क्रिकेटर मनोज तिवारी भी ऐसे ही खिलाड़ियों में से एक रहे. तिवारी ने 2008 में डेब्यू किया था, मगर माही की कप्तानी में उन्हें अधिक खेलने का मौका नहीं मिल सका और 2015 के बाद से उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला. इस बारे में मनोज तिवारी ने कहा,

मैंने कभी नहीं सोचा था कि अपने देश के लिए 100 रन बनाने के बाद, मैन ऑफ द मैच लेने के बाद मैं अगले 14 मैचों तक अंतिम-11 में नहीं आऊंगा लेकिन इस बात का भी सम्मान करता हूं कि कप्तान, कोच और टीम प्रबंधन के भी अपने विचार होते हैं. एक खिलाड़ी के तौर पर हमें उनके फैसलों का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि हो सकता है कि उनकी अलग रणनीति हो.

सीनियर का सम्मान करते थे इसलिए सवाल नहीं किए

मनोज तिवारी ने आगे अपने टीम से निकाले जाने के बारे में बात करते हुए कहा,

मुझे उस समय मौका नहीं मिला या यूं कहें कि मुझे में माही के पास जाने की हिम्मत नहीं थी, क्योंकि हम अपने सीनियरों का इतना सम्मान करते थे कि हम उनसे सवाल करने से बचते थे. इसलिए मैंने अभी तक उनसे सवाल नहीं किया.

सुपरजाइंट्स में धोनी की कप्तानी में खेले मनोज

मनोज तिवारी

चेन्नई सुपर किंग्स को 2016-2017 में बैन झेलना पड़ा था. तब सीएसके के सभी खिलाड़ियों ने दूसरी फ्रैंचाइजियों का रुख किया था. उस दौरान सीएसके के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने 2016 में पुणे की कप्तानी भी की और 2017 में वह स्टीव स्मिथ की कप्तानी में खेला. उस दौरान पुणे की टीम में मनोज तिवारी भी थे. हालांकि मनोज ने अपने टीम से ड्रॉप किए जाने को लेकर सवाल पूछना तो चाहा लेकिन उन्होंने पूछा नहीं. इसपर मनोज ने कहा,

मैंने सोचा था कि बाद में कभी पूछूंगा.

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