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महेंद्र सिंह धोनी नहीं रहे अच्छे फिनिशर, इन 3 मौकों पर आसान से रनों का भी नहीं कर पाए पीछा

महेंद्र सिंह धोनी
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भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे सफल कप्तान महेंद्र सिंह धोनी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपर-बल्लेबाजों में गिने जाते हैं.  2011 में विश्व कप के फाइनल मैच में श्रीलंका के खिलाफ जिस तरह धोनी ने शानदार तरीके से रन चेज किए थे, वह वाकई काबिल-ए-तारीफ रहा. इसके बाद तो धोनी को शानदार चेजिंग करते देखा गया. लेकिन पिछले कुछ वक्त में धोनी के प्रदर्शन में काफी गिरावट आई है.

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विश्व कप 2019 के सेमीफाइनल मैच में सेमीफाइनल में 50 रन पर धोनी का रन आउट होना टीम इंडिया के लिए काफी नुक्सानदेह था. इससे पहले भी धोनी ने पिछले कुछ वक्त में मैच को आखिरी ओवर तक तो पहुंचाया है, लेकिन पहले की तरह जीत दर्ज करने में नाकामयाब रहे हैं. आइए आपको कुछ ऐसे मौके याद दिलाते हैं जहां धोनी नहीं निभा पाए अच्छे फिनिशर का किरदार…

         इन मौकों पर फेल हुई धोनी की फिनिशिंग क्षमता

1- भारत बनाम साउथ अफ्रीका (2015)

धोनी

अपने बड़े-बड़े छक्कों और चीते की रफ्तार से एक रन को दो में बदलने वाले महेंद्र सिंह धोनी की बल्लेबाजी में अब पहले जैसे फिनिशर वाली बात नहीं रही है. साउथ अफ्रीका की टीम जब 2015 में वनडे सीरीज खेलने भारत दौरे पर आई थी, तो सीरीज के पहले मैच में धोनी को असफलता हाथ लगी थी.

इस मैच में साउथ अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 304 रनों का लक्ष्य खड़ा किया था. जवाब में टीम इंडिया के रोहित शर्मा ने 150, अजिंक्य रहाणे ने 60 रन की अहम फारी खेली. मैच के आखिरी ओवर में टीम इंडिया को मात्र 11 रनों की जरुरत थी और मैदान पर मौजूद थे अनहोनी को होनी करने वाले एमएस धोनी. उनके सामने गेंदबाजी कर रहे थे युवा तेज गेंदबाज कगिसो रबाडा.

अनुभवहीन गेंदबाज रबाडा की पहली 2 गेंदों पर धोनी ने तीन रन बनाए. अब आखिरी तीन गेंद पर सात रन की जरूरत थी तभी धोनी ने छक्का लगाने की कोशिश की लेकिन बॉल फील्डर के हाथ में जा गिरी और वह आउट हो गए. इसके चलते साउथ अफ्रीका की टीम 5 रन से मैच जीत गई थी.

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