तिलकरत्ने दिलशान ने सन्यास के साथ ही कप्तान एंजलो मैथ्यूज कों लेकर दिया विवादित बयान

Ritesh Jaiswal / 29 August 2016

श्रीलंका के सलामी बल्लेबाज तिलकरत्ने दिलशान ने वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले लिया है। दिलशान का कहना है कि उनके लिए आने वाले एक-दो साल खेलना कोई बड़ी बात नहीं है। इन्‍होंने 11 दिसंबर 1999 को जिम्बाब्वे के खिलाफ अपने वनडे करियर का आगाज किया था। दिलशान ने 329 वनडे मैचों में 10248 रन ठोंके हैं। वनडे क्रिकेट में 10000 से ज्यादा रन बनाने वाले दिलशान महज चौथे श्रीलंकाई बल्लेबाज हैं।

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दिलस्कूप दिलशान  हमेशा अपने नए तरीके के स्ट्रोक्स इजाद करने के लिए जाने जाएंगे। दिलशान का ‘दिलस्कूप’ उनका बेहद खास शॉट है, जिसमें वह फ्रंटफुट पर आकर बल्ले का फेस अपनी तरफ घुमाकर गेंद को विकेटकीपर के ऊपर से उछाल देते हैं। दिलशान एक अच्छे आलराउंडर के तौर पर भी जाने जाते हैं। ऑफ स्पिनर दिलशान ने वनडे क्रिकेट में 106 विकेट लिये।

आस्ट्रेलिया के खिलाफ जारी वनडे सीरीज का तीसरा मैच दिलशान के करियर का आखिरी वनडे इंटरनेशनल। मैच से पहले सीरीज 1-1 की बराबरी पर थी। लेकिन बीते रविवार को दांबुला में श्रीलंका और आस्ट्रेलिया के बीच खेले गये तीसरे मैच में श्री लंका हार गयी। इसके साथ ही दिलशान की विदाई हो गयी।

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उन्होंने 2013 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। वहीं कोलंबो में नौ सितंबर को आस्ट्रेलिया के खिलाफ ही खेला जाने वाला टी-20 मैच उनके करियर का आखिरी टी-20 इंटरनेशनल मैच होगा।

खबर है कि कप्तान एंजलो मैथ्यूज और चयनकर्ता 2019 वर्ल्ड कप के लिए टीम तैयार करना चाहते हैं। इसीलिए दिलशान पर संन्यास लेने का दबाव डाला गया। आस्ट्रेलिया के खिलाफ मौजूदा सीरीज में पहले दोनों मैचों में वह अच्छा स्कोर करने में नाकाम रहे। दिलशान का कहना है विश्‍व कप के लिए किसी नए खिलाड़ी को कम समय देना गलत होगा। मैं स्‍वार्थी होकर खेल और टीम को कमजोर नहीं होने दुंगा। जो भी नया खिलाड़ी मेरी जगह ले, उसे पूरा समय मिलना चाहिए। जिससे उसके प्रदर्शन में कोई कमी न रहे।

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cricbuzz.com के अनुसार दिलशान ने कहा कि,

“एंजलो मैथ्यूज को एक साल से चोट लगी हुई थी जिसकी वजह से वह बोलिंग के लिए उपलब्ध नहीं थे. यह शायद मेरी बदकिस्मती थी, क्यूंकि जैसे ही मैंने कप्तानी से इस्तीफा दिया और हम ऑस्ट्रेलिया गए एक हफ्ते के बाद और उस एक हफ्ते में मैथ्यूज ने गेंदबाज़ी शुरू कर दी यह शायद महिला जयवर्धने की खुशकिस्मती थी.”

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