पेरियास्वामी ने हालातों से लड़कर क्रिकेट मैदान पर मचायातहलका

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पिता बेचते हैं चाय और माँ चराती है पशु, एक आँख से खेला क्रिकेट अब दिनेश कार्तिक की टीम को जीता बटोरी सुर्खियां 

पिता बेचते हैं चाय और माँ चराती है पशु, एक आँख से खेला क्रिकेट अब दिनेश कार्तिक की टीम को जीता बटोरी सुर्खियां

भारत में क्रिकेट न केवल एक खेल बल्कि लोगों की भावनाओं से भी जुड़ा हुआ है. टीम इंडिया में कई ऐसे खिलाड़ी रहे हैं जिनके पास शुरुआत में पैसों की तंगी थी लेकिन उन्होंने अपने टैलेंट की बदौलत दौलत-शौहरत हासिल की. इसी तरह अब सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में तमिलनाडु की टीम में गेंदबाज पेरियास्वामी ने कठिन परिस्थितियों से लड़कर क्रिकेट के मैदान पर सुर्खियां बटोरी हैं.

तमिलनाडु की जीत के हीरो रहे पेरियास्वामी

तमिलनाडु क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज जी पेरियास्वामी और टी नटराजन ने 3-3 विकेट्स लेकर टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई. अपने पहले मैच में ही पेरियास्वामी ने सबको अपनी गेंदबाजी की मुरीद बना लिया.

इस मैच में नटराजन ने 25 रन देकर 3 विकेट लिए तो वहीं जी पेरियास्‍वामी ने 36 रन देकर 3 विकेट झटक कर कर्नाटक की कमर तोड़ दी. इस प्रदर्शन के बाद चारों तरह पेरियास्वामी की बात हो रही है. आपको याद होगा कुछ वक्त पहले खत्म हुई तमिलनाडु प्रीमियर लीग में भी इस खिलाड़ी ने अपनी गेंदबाजी से सुर्खियां बटोरी थी.

आपको बता दें, पेरियास्‍वामी ने फाइनल में 5 और टूर्नामेंट में सबसे ज्‍यादा 21 विकेट चटकाए थे. यह इस टूर्नामेंट के इतिहास में किसी भी गेंदबाज का सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन है.

मुश्किल भरी रही पेरियास्वामी की जिंदगी

पेरियास्वामी

हौसलों में जज्बा हो तो इंसान की तरक्की निश्चित होती है. इस बात को साबित करते हुए जी पेरियास्वामी की आज चारों तरफ वाहवाही हो रही है. मगर 7 साल की उम्र में पेरियास्वामी को चिकन पॉक्‍स हो गया था. बीमारी इतनी गंभीर थी जिसके चलते उनकी दायीं आंख की रोशनी चली गई थी.

इसके बाद स्‍कूल में बच्‍चे उन्‍हें परेशान करते थे. जिसके चलते 7वीं के बाद उन्‍हें स्‍कूल छोड़ना पड़ा. पेरियास्‍वामी के पिता गणेशन चाय की दुकान चलाते हैं और मां गंधमणि पालतू पशु चराती हैं. परिवार की आर्थिक समस्या को देखते हुए क्रिकेटर ने वेल्‍डर के रूप में काम किया.

लेकिन पेरियास्वामी के टैलेंट को देखते हुए तमिलनाडु क्रिकेट टीम में उनके साथ खेल रहे टी नटराजन ने करियर बनाने में मदद की. जी हाँ, इस लीग में वह नटराजन के जूते पहनकर ही खेले थे.

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