...... तो क्या खत्म हो रहा हैं मुरली विजय का टेस्ट करियर? 1

इंग्लैंड के खिलाफ उनकी ही सरजमीं पर पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम को अपने रेगुलर टेस्ट सलामी बल्लेबाज मुरली विजय से बड़ी उम्मीदें थी। तमिलनाडू के मुरली विजय ने इससे पहले भारतीय टीम को कई मौकों पर स्विंग पिचों पर जबरदस्त बल्लेबाजी कर जीत दिलाने में खास भूमिका निभायी।

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मुरली विजय का इंग्लैंड दौरे पर दिखाय खराब प्रदर्शन

ऐसे में इंग्लैंड की स्विंग लेती तेज पिचों पर मुरली विजय से बड़ी आस थी लेकिन इस पांच मैचों की टेस्ट सीरीज में मुरली विजय पहले दो टेस्ट मैचों में बुरी तरह से नाकाम रहे। मुरली विजय जहां बर्मिंघम में खेले गए पहले टेस्ट मैच में 20 और 6 रन का ही स्कोर बना सके तो इस स्टार सलामी बल्लेबाज के लिए लॉर्ड्स में खेला गया दूसरे टेस्ट मैच और भी निराशाजनक रहा जहां वो दोनों ही पारियों में खाता तक नहीं खोल सके।

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आखिरी दो टेस्ट मैच से विजय को दिखाया बाहर का रास्ता, पृथ्वी को मिली जगह

पहले दो टेस्ट मैचों में भारत के लिए पिछले कुछ सालों से नियमित सलामी बल्लेबाज के रूप में खेलने वाले मुरली विजय 6.50 की औसत से 26 रन ही बना सके। इस प्रदर्शन को देखते हुए मुरली विजय को तीसरे टेस्ट मैच से बाहर कर दिया गया। और अब तो विजय को आखिरी दो मैचों के लिए चुनी गई टीम से ही बाहर का रास्ता दिखाकर युवा बल्लेबाज पृथ्वी शॉ को शामिल कर लिया गया है।

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क्या मुरली विजय करियर हुआ खत्म?

जिस तरह से सीरीज के बीच में ही भारत के लिए पिछले कुछ सालों से सलामी बल्लेबाज के रूप में सफलता की सीढ़ी चढ़ रहे मुरली विजय इंग्लैंड दौरे के बीच में ही बाहर किया गया है उससे आखिर चयनकर्ताओं ने क्या संकेत दिया है? क्या इसे मुरली विजय के करियर को ही खत्म मान लिया जाए। क्या मुरली विजय के लिए दो टेस्ट की नाकामी से भारतीय टीम के दरवाजे बंद हो चुके हैं?

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मुरली विजय को बाहर करने के पीछे क्या हो सकती है चयनकर्ताओं की मंशा?

अब ये सवाल हर किसी के जेहन में आ रहा है। क्योंकि मुरली विजय के स्थान पर शामिल किए जाने वाले युवा बल्लेबाज पृथ्वी शॉ ने जब से प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कदम रखा है जोरदार प्रदर्शन कर रहे हैं। पृथ्वी शॉ ने अपने छोटे से प्रथम श्रेणी क्रिकेट में जबरदस्त तरीके से प्रभावित किया है। तो वहीं अब मुरली विजय अपनी 35 साल की उम्र तक पहुंचने जा रहे हैं ऐसे में कही ना कहीं चयनकर्ता के मन में विजय को धीरे-धीरे रास्ते से हटाकर पृथ्वी को सलामी बल्लेबाज की भूमिका देने की रणनीति हो सकती है।

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