भारतीय क्रिकेट टीम के बल्लेबाज हमेशा से ही विश्वस्तरीय के रहे हैं। किसी भी देश के खिलाफ भारतीय टीम का जब क्रिकेट मैच खेला जाता है तो विपक्षी गेंदबाजों और भारतीय बल्लेबाजों का मुकाबला माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह है भारतीय बल्लेबाज विश्व क्रिकेट में अपना ही खास मुकाम रखते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि भारतीय बल्लेबाज बड़े-बड़े रिकॉर्ड्स करने में माहिर माने जाते हैं।

भारतीय टीम का तेज पिच पर खेलने का पेंच बरकरार

लेकिन जब बात आती है भारतीय बल्लेबाजों की तेज गेंदबाजों की मददगार पिच पर खेलने की तो अचानक से ही भारतीय बल्लेबाजी क्रम बिखर जाता है। ये एक सबसे बड़ा सवाल है कि भारतीय बल्लेबाजों को तेज पिच पर आखिर क्या हो जाता है।

सपाट पिच पर खेलने वाले भारतीय बल्लेबाज तेज पिच पर कर जाते हैं सरेंडर

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ केपटाउन टेस्ट में मिली हार कोई पहली बार नहीं हुई है। इस तरह से भारतीय बल्लेबाजों का तेज पिचों पर सरेंडर शुरूआत से ही कायम हैं। इस दौरान पिच पर टिकने का माद्दा रखने वाले बल्लेबाज कई बल्लेबाज आए और गए, लेकिन किसी भी बल्लेबाज ने ऐसा नहीं दिखाया कि वो दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की जबरदस्त तेज और बाउंस पिच पर खेलने की हिम्मत दिखाए।

राहुल द्रविड़ ने अपनी समझदारी से तोड़ा था पेस का तिलिस्म

इन सबके बीच भारतीय टीम को एक चमक दिखी भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज रहे राहुल द्रविड़ में… ये तो सभी जानते ही हैं कि तेज पिचों पर गेंद जबरदस्त स्विंग होती है। इन स्विंग और उछाल भरी गेंदो में बड़ी समझदारी से खेलना होता है। ये काबिलियत राहुल द्रविड़ ने भली-भाति दिखाई।

राहुल द्रविड़ ने तेज और बाउंसी पिचों पर अपनी समझदारी भरी बल्लेबाजी से जबरदस्त सफलता भी हासिल की। राहुल द्रविड़ ने जिस तरह से तेज पिचों पर गेंद को सही पढ़कर छोड़ने की जो कला समझदारी दिखायी उससे तो द्रविड़ को एक परफेक्ट बल्लेबाज के रूप में बना दिया।

भारतीय बल्लेबाजों का तेज पिचों पर खौफ बरकरार

भारतीय बल्लेबाजों का तेज गेंदबाज की मददगार पिच पर खौफजदा होने का सबसे बड़ा कारण तो ये है कि वो गेंद को समझने से पहले ही भारत की सपाट और स्पिन पिचों की परिस्थितियों की तरह की खेलने की कोशिश करते हैं। भारत में बल्लेबाजी बहुत आसान है.

भारत की सपाट पिच पर गेंद बल्ले पर सही से आ जाती है और टर्निंग विकेट पर भी बल्ले पर गेंद देने में दिक्कत नहीं होती है। लेकिन जब यही बल्लेबाज को भारतीय पिच पर खेलने के आदी हो जाते हैं वो जब इन तेज और बाउंसी पिचों पर जाते हैं तो इनके पसीने छूट जाते हैं।

द्रविड़ जैसी समझदारी भारतीय बल्लेबाजों को कर सकती है मदद

भारतीय क्रिकेट टीम के मिस्टर परफेक्टनिस्ट राहुल द्रविड़ ने साल 2012 में अपने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लिया। इसके बाद से तो भारतीय बल्लेबाजी क्रम को राहुल द्रविड़ जैसे बल्लेबाज नहीं मिला है जो पिच की परिस्थिति के मुताबिक अपनी बल्लेबाजी को ढाल लेते हैं और समझदारी के साथ बल्लेबाजी करते हैं। भारतीय टीम को अब राहुल द्रविड़ जैसी समझदारी दिखानी होगी तो स्पिन के साथ तेज पिच पर उनते ही प्रभावशाली रहे हैं।



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