गौतम गंभीर को तैयार करने वाले इस व्यक्ति ने चैम्पियंस ट्रॉफी में न चुने जाने पर दिया बड़ा बयान 1

एलबी शास्त्री अकादमी बहुत ही व्यस्त जगहों में से एक हैं। यहां खिलाड़ियों को नेट पर अभ्यास करते हुए आराम से देखा जा सकता है। यहां खिलाड़ी खुद को कड़ी मेहनत करके तैयार करते हैं और इन खिलाड़ियों को तैयार करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका कोच की होती है। यहां के कोच संजय भारद्वाज हैं। बौतर कोच संजय बहुत ही नेक इंसान हैं। बड़ी बात यह है कि ये कभी भी अपने काम से कोताही नहीं बरतते हैं।  विडियो- कोरी एंडरसन मैदान में बने सुपरमैन, गुजरात के मालिक से लेकर ज़हीर खान भी रह गए दंग

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एसबी शास्त्री अकादमी देश की प्रतिष्ठित अकादमियों में से एक हैं। इस अकादमी ने कई बेहतरीन खिलाड़ी तैयार किये हैं, जो भारतीय टीम की तरफ से खेल चुके हैं और खेल रहे हैं। भारत के बेहतरीन बल्लेबाजों में एक गौतम गंभीर भी इसी अकादमी से निकले हैं। गौतम के अलावा अमित मिश्रा और उनमुक्त चंद भी यहीं से सीखकर निकले हैं। आईपीएल में दमदार प्रदर्शन कर रहे नीतीश राणा भी यहीं से निकले हैं।

संजय भारद्वाज गौतम गंभीर के भी कोच रह चुके हैं और बाकि खिलाड़ियों को भी तैयार कर चुके हैं। इन खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर स्पोर्टज़विकी ने संजय भारद्वाज से बात की है। इस बातचीत का एक अंश यहां हैं –

1.क्या आप उम्मीद करते हैं कि गौतम गंभीर को चैम्पियंस ट्रॉफी के लिए भारतीय टीम में शामिल किया जायेगा ?

संजय – गौतम गंभीर के हालिया प्रदर्शन को देखकर मैं उम्मीद करता हूं कि उन्हें चैम्पियंस ट्रॉफी के लिए टीम में शामिल करना चाहिए।

2. क्या यह आपके लिए निराशाजनक रहा है कि गौतम गंभीर को मौका नहीं दिया गया ?

संजय – मैं इसे निराशाजनक नहीं कहूंगा। क्यों कि एक खिलाड़ी का काम बेहतर प्रदर्शन करना होता है, न की टीम में चयन के बारे में सोचना होता है। इस बात का ज्यादा महत्व नहीं है कि वो कहां खेल रहे हैं। उनका बेहतर प्रदर्शन ही सर्वोपरी है।

3. भारतीय टीम की ओपनिंग के लिए शिखर धवन और गौतम गंभीर में से ही किसी को चुना जायेगा। इन दोनों के बीच खुला मुकाबला है। आपके मुताबिक किसे चुनना चाहिए ?

संजय – टीम का चयन करना चयन कमेटी का काम होता है। लिहाजा खिलाड़ियों के प्रदर्शन को देखकर वही इस बात को तय करते हैं। इस हिसाब से धवन, गंभीर से ज्यादा बेहतर हैं।

4. पिछले साल शिखर के चोटिल होने के बाद ही गंभीर को मौका मिला था, तो क्या आपको लगता है कि आगे गंभीर को मौका मिल सकता है?

गौतम गंभीर को तैयार करने वाले इस व्यक्ति ने चैम्पियंस ट्रॉफी में न चुने जाने पर दिया बड़ा बयान 2

संजय – फिलहाल चयन कमेटी की नजर 2019 के विश्वकप पर होगी। लिहाजा काफी हद तक संभव है कि गंभीर को मौका मिले।

5. कोलकाता नाइट राइडर्स गौतम गंभीर की कप्तानी में अच्छा प्रदर्शन कर रही है, क्या आपको लगता है केकेआर तीसरी बार आईपीएल की विजेता बनेगी ?

संजय – बिल्कुल, यह टीम अच्छा प्रदर्श कर रही है। मैं उम्मीद करता हूं कि इस बार कोलकाता आईपीएल जीत सकती है।

6. हम सब ने पिछले साल दलीप ट्रॉफी के दौरान गौतम गंभीर को अलग रुख में खेलते हुए देखा था, लेकिन जल्दी ही वो अपने मूल प्रदर्शन पर लौट आये थे। इसमें आपकी कोई भूमिका रही थी ?

संजय – उस दौरान गौतम की बल्लेबाजी में काफी बदलाव आया था। इस तरह से खेलना उनका निजी निर्णय था।

7. आईपीएल में खेलने से पहले नीतीश राणा का घरेलू मैचों का सत्र खराब रहा था। यहां तक की विजय हजारे ट्रॉफी में भी नहीं खेल पाये थे। लिहाजा उनके आईपीएल में खेलने से पहले आपकी क्या सलाहा थी ?

संजय – नीतीश राणा उन खिलाड़ियों में से हैं जो हमेशा बेहतर प्रदर्शन करने का प्रयास करते हैं। यह सच है कि उन्हें विजय हजारे ट्रॉफी में खेलने का मौका नहीं मिला था। उनके आईपीएल में खेलने से पहले मेरी सलाह थी कि वो पिछली बातों को छोड़कर अपने प्रदर्शन पर ध्यान दें।

8. क्या नीतीश इंडिया ए की टीम में शामिल हो सकते हैं, जो कि अगले महीने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेलने वाली है?

संजय – मुझे लगता है चयनकर्ता उनके बेतहर प्रदर्शन को देखकर निश्चिततौर पर टीम में शामिल करेंगे। मुझे उम्मीद है कि उनका चयन किया जायेगा।

9. अमित मिश्रा ने 2003 में भारतीय टीम की ओर पदार्पण किया था। इसके बाद उन्होंने 36 वनडे और 22 टेस्ट मैच ही खेले हैं। उनको ज्यादा मौका न मिल पाने के पीछे् क्या वजह हो सकती है?

संजय – भारतीय टीम के में जगह पाने के लिए खिलाड़ियों में होड़ मची रहती है। लेकिन अमित एक श्रेष्ठ गेंदबाज हैं। अनिल कुंबले के जाने के बाद उन्होंने कई बार भारतीय टीम के शानदार प्रदर्शन किया है।   अनुराग ठाकुर और अजय शिर्के ने भारतीय क्रिकेट को अपनी ज़ागीर बना लिया था : बिशन सिंह बेदी

10. उनके टीम में न होने पर आपकी तरफ से उनके लिए क्या संदेश है?

संजय – मैं खिलाड़ियों को बचपन से ही तैयार करने में जुट जाता हूं। इसके बाद अंडर 16 और अंडर 19 टीम में चयन का प्रयास करवाता हूं। यहां तक पहुंचने के बाद खिलाड़ियों को उनके लक्ष्य के बारे में बताता हूं। उनका लक्ष्य हमेशा बेहतर प्रदर्शन करना ही होता है।