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लाहली का शतक था मेरे जीवन का टर्निंग पोइंट : प्रियंक पंचाल 

लाहली का शतक था मेरे जीवन का टर्निंग पोइंट : प्रियंक पंचाल

क्रिकेट एक ऐसा खेल है जहाँ पर किसी भी खिलाड़ी के लिए उतार चढ़ाव लगा रहता है. कभी कोई चोटिल होकर बाहर होता है, तो कभी कोई बीमारी के कारण बाहर होता है और उससे खेल में प्रभाव पड़ता है. कुछ इसी तरह का करियर रहा है, प्रियंक पंचाल का.

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गुजरात के सलामी बल्लेबाज प्रियंक उन खिलाड़ियों में से एक है, जो असफलता के दरवाजों को पार कर हर परिस्थिति में खेलने के लिए सहज रहे हैं और गुजरात के लिए काफी अच्छा खेल दिखाया है. लेकिन उनको अभी तक उनकी प्रतिभा के मुताबिक प्रसिद्धी और सफलता नही मिल पाई है.

रणजी ट्राफी के सत्र 2016-2017 में प्रियंक पंचाल ने गजब का प्रदर्शन किया है. उन्होंने पंजाब के विरुद्ध तिहरा शतक लगाया और अपनी प्रतिभा को दिखाया. इसी सत्र में पंचाल ने तमिलनाडु के खिलाफ अपना चौथा शतक लगाया.

अपने प्रदर्शन के बारे में प्रियंक ने कहा,

“गुजरात के लिए खेलते हुए मैंने इस सत्र में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 1000 रन बनाये जो मेरे लिए काफी बड़ी बात रही और इससे मैं काफी खुश हूँ. मेरे इस प्रदर्शन के लिए मुझे जो पुरस्कार मिला है उससे मैं संतुष्ट हूँ और आगे भी मैं इसी तरह खेलना चाहता हूँ.”

पंचाल ने आगे कहा,

“मैं अपने ऑफ़ साइड के खेल पर ज्यादा ध्यान दे रहा हूँ क्योंकि 90 फीसदी गेंदबाज अपनी गेंद वही रखते हैं. मैं गेंद को छोड़ने की कोशिश कर रहा हूँ और इस चीज का अभ्यास कर रहा हूँ, कि कौन से गेंद को डिफेंड करना है. इस चीज पर मैं पिछले तीन साल से काम कर रहा हूँ और जिसके लिए कोच ने मेरी काफी मदद की है.”

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प्रियंक पंचाल अभी 26 साल के हैं और उन्हें भारतीय टीम में जगह नहीं मिली है. प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उन्होंने अब तक 49 मैच खेले हैं और 3145  रन बनाये हैं उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 314* है.

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