संजय मांजरेकर को हर्षा भोगले ने ऐसे दिया था करारा जवाब

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जब 14 से पहले हर्षा भोगले ने दिया अपने अपमान का मुहंतोड़ जवाब, अब संजय मांजरेकर विवाद के बाद वायरल हुई वीडियो 

जब 14 से पहले हर्षा भोगले ने दिया अपने अपमान का मुहंतोड़ जवाब, अब संजय मांजरेकर विवाद के बाद वायरल हुई वीडियो

भारत और बांग्लादेश के बीच कोलकाता के ऐतिहासिक मैदान ईडन गार्डन्स में पहला डे-नाइट टेस्ट मैच खेला गया। भारतीय क्रिकेट इतिहास के पहले पिंक बॉल टेस्ट मैच में भारत ने बांग्लादेश को हराकर फैंस को खुश तो कर दिया लेकिन इस मैच में पिंक बॉल ने दो दिग्गजों के बीच दरार डाल दी।

पिंक बॉल को लेकर हर्षा-मांजरेकर में बहस

जी हां… कोलकाता में खेले गए पिंक बॉल टेस्ट मैच को लेकर दो खिलाड़ियों नहीं बल्कि भारत के दो मशहूर कमेंटेटरों के बीच विवाद को जन्म दे दिया है जहां भारतीय क्रिकेट की आवाज कहे जाने वाले हर्षा भोगले का संजय मांजरेकर ने अपमान किया है।

जब 14 से पहले हर्षा भोगले ने दिया अपने अपमान का मुहंतोड़ जवाब, अब संजय मांजरेकर विवाद के बाद वायरल हुई वीडियो 1

भारत के इन दो सबसे बड़े और बेहतरीन कमेंटेटरों के बीच पिंक बॉल की विजिबलिटी को लेकर जबरदस्त बहस हो गई जहां संजय मांजरेकर ने हर्षा भोगले को कड़े शब्द कह डाले।

हर्षा भोगले के क्रिकेट नहीं खेलने को मांजरेकर ने किया था टारगेट

दरअसल भारत और बांग्लादेश के बीच जब दूसरा टेस्ट मैच खेला जा रहा था इसी दौरान कमेंट्री करते हुए हर्षा भोगले ने पिंक बॉल के सही से दिखने पर सवाल उठाया। जिस पर संजय मांजरेकर ने इसे मानने से इनकार करते हुए ये कह डाला कि जिसने क्रिकेट खेली हो उसे पता चलता है।

जब 14 से पहले हर्षा भोगले ने दिया अपने अपमान का मुहंतोड़ जवाब, अब संजय मांजरेकर विवाद के बाद वायरल हुई वीडियो 2

यानि साफ है कि संजय मांजरेकर ने यहां खुद के भारत के लिए खेलने और हर्षा भोगले के कभी भी क्रिकेट ना खेलने को टारगेट करते हुए हर्षा का अपमान किया। वैसे इस पर हर्षा भोगले ने तो अभी कोई जवाब नहीं दिया।

14 साल पहले ही हर्षा ने दे दिया था इसका करारा जवाब

लेकिन 14 साल पहले अहमदाबाद में साल 2005 में हुए एक सेमिनार के दौरान ही इस तरह की बातों का जवाब दे डाला था। तब हर्षा भोगले ने कहा था कि “एक सवाल जिसने भारतीय क्रिकेट में व्यक्ति को बढ़ने से रोका है और बेहतर क्रिकेटरों में ये पूछा जाता है कि आप कितना क्रिकेट खेले हैं। तो हर कोई, भले ही आप एक सर्जन या वकील हो। आपको हमेशा सिर्फ इस बात से आंका जाता है कि आप कितना क्रिकेट खेले हैं।”

इससे पहले, ये मुझे बहुत परेशान करता था और थोड़ी देर के बाद मैंने खुस से कहा, किसी को भी जो कहना है कहे कि आप कितना क्रिकेट खेले हो, मेरा मानना है कि दुनिया में केवल यही मायने रखता है मुझे यहां कितना अच्छा मौका मिला है।”

मैं शुरू से ही इस पेशे में सफल रहा क्योंकि मैं ये करने के लिए तैयार था और बहुत सारे लोग नहीं थे क्योंकि वो क्रिकेटर्स थे।”

ये तो धारावाहिकों और फिल्मों में बिट एक्ट्रेस की तरह है जिन्हें सितारों के होने के इस ढोंग पर आगे बढ़ना है और वास्तव में वे सितारे बनना बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। और थोड़ा ऐसा है कि क्रिकेटर्स के साथ भी उन्हें क्रिकेटरों के रूप में देखा जा सकता है। इसलिए इसने मुझे बहुत मदद की।”

मेरे पहले तीन-चार साल पूरी तरह से भारतीय क्रिकेट के अहंकार के कारण थे। इसलि मैं उम्मीद करता हूं कि भारतीय क्रिकेट अभिमानी बना रहेगा, क्योंकि इससे मुझे अच्छा प्रदर्शन करने की अनुमति मिलती रहेगी।”

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