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अब सुरेश रैना और भुवनेश्वर कुमार को बीसीसीआई में मिली अहम जिम्मेदारी 

अब सुरेश रैना और भुवनेश्वर कुमार को बीसीसीआई में मिली अहम जिम्मेदारी
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यदि खिलाड़ी-सदस्य अपने संबंधित राज्य निकायों में मतदान अधिकार हासिल कर लेते हैं तो कुछ प्रमुख राज्य क्रिकेट संघों के मतदान  में एक बड़ा परिवर्तन हो सकता है । मुंबई से भारत के खिलाड़ियों की संख्या भी ज्यादा है. इसमे वहां भी ये खिलाड़ी निर्णायक की भूमिका अदा कर सकतें हैं. उत्तर प्रदेश से भी देश के लिये खेलने वाले खिलाड़ियों की संख्या भी ज्यादा हैं, ऐसे में ये अपनी भूमिका को भी बड़ा कर सकते हैं.

इसके बाद, तमिलनाडु, कर्नाटक, हैदराबाद और दिल्ली जैसी संस्थाएं हैं जहाँ से अब खिलाड़ी कम आ रहें हैं । खिलाडि़यों के मतदाताओं के अधिकारों के बारे में अभी भी अस्पष्टता है.  सबसे पहले, कैसे चीजें बदल सकती हैं, इसका एक अवलोकन कर सकते हैं. इस समय मुंबई के मामले में 33 अंतराष्ट्रीय पूर्व क्रिकेटर रह चुके हैं। लोढ़ा समिति की सिफारिश के अनुसार, वे स्वतः मुंबई क्रिकेट संघ (एमसीए) के सदस्य बन जाते हैं। अगर 33 क्रिकेटरों के इस समूह ने एकजुट होकर वोट देना शुरू कर दिया, तो गठजोड़ राज्य इकाई को संचालित करने के लिए अधिकारियों को चुनने के मामले में सभी शक्तिशाली बन सकता है।

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संयोग से, 2015 एमसीए के अध्यक्ष  पद के चुनाव में शरद पवार ने विजय पाटील को 34 मतों से पराजित किया था। इस समय उत्तर प्रदेश के नौ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर हैं, जो पिछले और वर्तमान संयुक्त हैं। यदि राज्य का शानदार उदय जारी है, तो भविष्य में और भी अधिक होगा।

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तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन (टीएनसीए) के वर्तमान में 181 मतदान सदस्य हैं- 150 क्लब और 31 जिलों में और राज्य में लगभग 20 जीवित पूर्व भारतीय क्रिकेटर हैं।   कर्नाटक राज्य क्रिकेट एसोसिएशन (केएससीए) की पसंद मतदाताओं के रूप में खिलाड़ी-सदस्य शामिल किए जाने से बहुत अधिक प्रभावित नहीं हो सकता है, क्योंकि उनके पास पहले से ही 1,000 सदस्य हैं। बंगाल जैसे राज्य में, जहाँ से इंटरनेशनल खिलाड़ी बहुत कम हैं. ऐसे में क्या उनको भी मतदान का अधिकार देना जरूरी है.

इसके अलावा कुछ ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब अभी तक किसी ने नहीं दिया हैं. क्या जो खिलाड़ी बोर्ड से जुड़े नही हैं वो मतदान नहीं कर पायेंगे?  इसके अलावा जिन्होंने इंटरनेशनल लेवल पर देश के लिए खेला हैं उनका क्या होगा? और इस बात की क्या गारंटी है कि खिलाड़ी बोर्ड के हित में ही काम करेंगें.

अब देखना दिलचस्प होगा बोर्ड इसका रास्ता निकलता हैं.

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